वीर पालना

वीर पालना

वीर स्वामी का सुन्दर अधर पालना । 

सज रहा है सिद्धार्थ के घर पालना ॥ टेक 

जिसमें रेशम की सुन्दर पड़ी डोरियाँ । 

सच्चे मोती लगाये—चहुँ ओरियाँ ॥ 

है सुशोभित यह सुन्दर अधर पालना ॥ वीर० ॥ १ 

झुन झुना माता त्रिशलावती ले रही । 

वीर के हाथ में हँस के जब दे रही ॥ 

वीर का हिल रहा बेखतर पालना ॥ वीर० ॥ २ 

देव इन्द्रादि मिल पुष्प बरसा रहे । 

सारे नर नारी हृदय में हर्षा रहे ॥ 

देखने जा रहा हर बसर पालना ॥ वीर० ॥ ३ 

जन्म उत्सव का दिन मिल मनाओ सभी । 

यह ‘किशन’ ने लिखा है अमर पालना ॥ वीर० ॥ ४

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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