मेरी भावना (42) हर घर में धर्म की चर्चा

  मेरी भावना (42) हर घर में धर्म की चर्चा

(परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों से उद्धृत)

आदिनाथ भगवान की जय 

मेरी भावना को अपनी भावना बनाएं

घर-घर चर्चा रहे धर्म की। 

हर घर में यही चर्चा हो। बस! ऐसे ही मेरी भावना की, प्रवचन सार की, द्रव्य संग्रह की, पार्श्व कथा की, रत्नकरण्डश्रावकाचार की ही चर्चा हो।। घर-घर में ऐसा ही मंगल वातावरण हो, धर्म की चर्चा हो और -

दुष्कृत दुष्कर हो जावे। 

दुष्कृत का मतलब है - पाप। पाप करना तो दुष्कर ही हो जाए अर्थात् कठिन हो जाए, देखने को भी न मिले कि कहीं कोई पाप हो रहा है। आप भावना तो कर सकते हो, पूरे विश्व के लिए, ऐसी मंगलमय भावना! आपकी भावनाओं की तरंगें ही इकट्ठी होकर इस विश्व के अंदर कोई मंगलमय वातावरण तैयार कर सकती हैं। लेकिन हम कोई भावना करने के लिए अपना Mood बनाते ही नहीं। 

बच्चे और बड़े सभी टी.वी. देखते रहेंगे, मोबाइल पर घंटों लगे रहेंगे, लेकिन कोई अच्छा भाव करने के लिए मोबाइल छोड़कर 5 मिनट बैठेंगे नहीं। बस! इसी में हम अपना Time Waste तो करते रहेंगे, लेकिन Time को जहां Invest करना चाहिए, वह Invest करने वाली जगह हम नहीं जानते हैं। अगर आप ऐसी मंगल भावना करोगे, तो आपका Time Waste होगा या अच्छी जगह पर Invest होगा। अगर हमारे पास कोई Power है और हम उसको सही जगह पर Invest करते हैं, तो वह 10 गुना बढ़कर हमारे लिए फलीभूत होती है। Feelings और Knowledge हमारी बहुत बड़ी पावर है। अगर हम उस बड़ी Power को सही जगह पर Invest करें, जैसे Money का Investment करते हैं, वैसे ही अगर हम 'मेरी भावना' के Through इन Feelings की Power को भी Invest करें, अपनी Knowledge का Investment करें, तो यह Investment आपको बहुत ज्यादा Strong बनाएगा, आपके अंदर बहुत Tolerance Power Create करेगा। ऐसा भाव तो करो। कम से कम उस भाव से दूसरे के घर में हो या न हो, आपके घर में मंगल अवश्य होगा। 

दुष्कृत दुष्कर हो जावे। 

किसी के यहाँ पर पाप ही नहीं, उसका भाव मन में लाना भी कठिन हो जाए।

ज्ञान चरित्र उन्नत कर अपना, मनुज जन्म फल सब पावे।।

उन्नति सब चाह रहे हैं। सब को लगी है बस! Progress ... Progress  ... Progress... । 

What is the Progress?  Progress किसका नाम है? किस लक्ष्य को Progress बोलते हो? Progress इसको बोलते हैं - 

Real Progress means Progress of our Knowledge,  Progress of our Conduct. 

ज्ञान चरित्र उन्नत कर अपना, मनुज जन्म फल सब पावें।।

यह Progress मनुष्य जन्म को प्राप्त करने का फल है और दूसरा Progress है पैसा... पैसा.... पैसा....। अगर हमने पैसा प्राप्त कर लिया और इसको अगर हम प्रोग्रेस समझ रहे हैं; तो हम अभी थोड़ी-सी भूल में हैं और यह भूल आपको बहुत भारी पड़ेगी। यह बात आपको तब समझ में आएगी, जब आप जिंदगी गवां चुके होंगे या गवांने की कगार पर खड़े होंगे। उस समय  हम यह Progress नहीं कर सकते हैं कि अपनी Knowledge को बिल्कुल Concrete बनाएं या अपने Conduct को Progressive बनाएं। ये काम करने का Time इसी समय का होता है, जब हम एक Youth का जीवन जीते हैं। जब हम युवा होते हैं, इस Youth की उम्र में होते हैं, तभी हमारे अंदर हर तरीके की Progress हो सकती है। अगर हम इस उम्र में यह Progress करना सीख जाते हैं, तो आगे के लिए हमारा जीवन एक उन्नत जीवन बनता है, जिसमें हमारी उन्नति अपने आप हमें अंदर से संतुष्टि देगी और उस उन्नति के शिखर पर बैठ कर हम अपने आप को बहुत सुखी और शांत महसूस करेंगे। तो आप लोग कोरोना से डरें नहीं, आजकल की किसी भी परिस्थिति से डरे नहीं। अपने ज्ञान को, अपने चरित्र को उन्नत बनाओ और इस तरह की उन्नति के शिखर पर जब आप बैठ जाओगे, तो फिर आपको कोई भी वायरस वहां पर पहुंच कर अटैक करने की हिम्मत कर नहीं सकता और अगर कर भी देगा तो आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। इसलिए -

घर-घर चर्चा रहे धर्म की, दुष्कृत दुष्कर हो जावे।

ज्ञान चरित्र उन्नत कर अपना, मनुज जन्म फल सब पावे।।

 महावीर भगवान की जय!!

क्रमशः

 ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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