चन्द क्षण जीवन के तेरे रह गए
चन्द क्षण जीवन के तेरे रह गए धुन- दिल के अरमां......................... चन्द क्षण जीवन के तेरे रह गए, और तो विषयों में सारे बह गए। (1) अपनी रक्षा को बनाए ये महल, किन्तु मृत्यु की रहे बेला अटल, ताश के पत्तों के घर सम ढह गए। चन्द क्षण.......... (2) जाने कब जाना पड़े तन छोड़ कर, इष्ट मित्रों से सदा मुख मोड़ कर, जानकर अनजान क्यों तुम रह गए। चन्द क्षण............... (3) श्रद्धा मोती न मिला राही तुझे, कंकरों का ही भरोसा है तुझे, ज्ञान के सागर की तह तुम न गए। चन्द क्षण.............. (4) लक्ष्य था शिवपुर में जाने का तेरा, जिस समय था गर्भ में माँ के पड़ा, लक्ष्य क्यों अपना भुला कर रह गए। चन्द क्षण........ (5) क्या तू लेकर आया था क्या जाएगा, तन भी इक दिन खाक में मिल जाएगा, देह भी है ज्ञेय, ज्ञानी कह गए। चन्द क्षण............. (ज्ञेय- जानने योग्य अर्थात् ज्ञानी के लिए देह की नश्वरता का ज्ञान आवश्यक है) ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरित...