भगवान महावीर स्वामी (48)
तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी (48) चन्दनबाला भगवान महावीर की मौसी चन्दनबाला भी महावीर की भांति विवाह न करने का निश्चय करके वैराग्यमय आत्मभावना में जीवन व्यतीत करती थी। एक बार चन्दना कुमारी अपनी सहेलियों के साथ नगर के बाहर उद्यान में क्रीड़ा कर रही थी कि उसके लावण्यमय यौवन से आकर्षित होकर एक विद्याधर ने उसका अपहरण कर लिया; परन्तु बाद में अपनी पत्नी के भय से उसने चन्दना को कौशाम्बी के वन में छोड़ दिया। कहाँ वैशाली और कहाँ कौशाम्बी! वन के भील सरदार ने उसे पकड़ लिया और एक वेश्या को सौंप दिया। एक के बाद एक होनेवाली इन अप्रिय घटनाओं से चन्दना व्याकुल हो गई कि अरे! यह क्या हो रहा है?... ऐसी अद्भुत सुन्दरी को देखकर एक वेश्या विचारने लगी कि कौशाम्बी के नागरिकों ने ऐसी रूपवती स्त्री कभी देखी नहीं है। इसे रूप के बाज़ार में बेचकर मैं अच्छा धन कमाऊँगी। - ऐसा सोचकर वह स्त्री चन्दनबाला को वेश्याओं के बाज़ार में बेचने ले गई। अरे रे! इस संसार में पुण्य-पाप की कैसी विचित्रता है कि एक सती नारी वेश्या के हाथों बिक रही है! (किन्तु पाठकगण! तुम घबराना नहीं... क्योंकि ऐसे पुण्य-पाप के उदय में भी अपनी आत्मा को ...