जिनवाणी स्तुति
जिनवाणी स्तुति Sung by- Bindu Jain, Delhi धुन- संसार है इक नदिया, सुख दुःख दो किनारे हैं........ माता तू दया करके, कर्मों से छुड़ा देना। इतनी-सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना।। माता आज मैं भटका हूँ, माया के अंधेरे में। कोई नहीं मेरा है, इस कर्म के रेले में।। -2 कोई नहीं मेरा है, तुम धीर बंधा देना। इतनी-सी विनय......... जीवन के चौराहे पर, मैं सोच रहा कब से। जाऊँ तो किधर जाऊँ, यह पूछ रहा मन से।।-2 पथ भूल गया हूँ मैं, तुम राह दिखा देना। इतनी-सी विनय......... लाखों को उबारा है, मुझको भी उबारो माँ। मंझधार में है नैया, उसको भी तिरा दो माँ।। -2 मंझधार में अटका हूँ, उस पार लगा देना। इतनी-सी विनय.........