Posts

जीवन है पानी की बूंद (121-125)

Image
  जीवन है पानी की बूंद (121-125) रचयिता व प्रणेता : परमपूज्य आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे। होनी अनहोनी, कब क्या घट जाये रे ॥   ज्ञान जिसे नहीं हो पाए, कहीं नहीं वह सुख पाए,  दुख से उभर नहीं पाए - 2   ज्ञान करे भवपार यहाँ, देता जीवन सार यहाँ,  ज्ञान की महिमा,  हो ऽऽ ....     ज्ञान की महिमा, सब वेद सुनाये रे ---- जीवन है ।।121।।  भीतर की जब आँख खुले, तब ही अंतर दीप जले,  अंधकार की धूप धुले - 2,  होता जब दिल साफ तभी, होता है इंसाफ तभी,  ज्ञानी वो पाये,  हो ऽऽ ....     ज्ञानी वो पाये, जो कोई न पाये रे ---- जीवन है ।।122 ।। जो करना है आज करो, कल का मत विश्वास करो,  आज करो, व अभी करो - 2,  कल को किसने देखा है, पल का नहीं भरोसा है,  कल-2 तू करके क्यों,  हो ऽऽ ....     कल-2 तू करके क्यों, असल गंवाये रे ---- जीवन है ।।123 ।।  कर सकते वो यहाँ करो, ना कर पाओ नहीं करो, शक्ति जितना यहाँ करो - 2,  शक्ति नहीं तो शक्ति मांगो, जीवन में...