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घर-घर दीप जले

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घर-घर दीप जले  प्रभु महावीर चले, प्रभु महावीर चले। घर-घर दीप जले, घर-घर दीप जले। राजगद्दी छोड़ी, भूख प्यास तोड़ी। दीन-दुःखियों की तड़पन, मिटाते चले-२ सब ललकार उठे, मेरे महावीर चले। घर-घर दीप..... रात अमावस की थी, चमकी बिजली भी थी। सारी दुनिया जगा के, गगन पे चले-२ उनका जीवन भला, समता रस से भरा महामंत्र अहिंसा का देकर चले-२ आऽ आऽऽ प्रभु गौतम जी कहें, प्रभु पावा से चले-२ घर-घर दीप..... तप-तपते गये, ध्यान अग्नि जले। सारे कर्मों की होली, जलाकर चले-२ धर्म चक्र फिरा, गुन गुनाई सभा। जियो जीने दो नारा, लगाकर चले आऽ आऽऽ इस धरती से उठे, भव बन्धन से छुटे-२ घर-घर दीप..... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

जीवन है पानी की बूंद (121-125)

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  जीवन है पानी की बूंद (121-125) रचयिता व प्रणेता : परमपूज्य आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे। होनी अनहोनी, कब क्या घट जाये रे ॥   ज्ञान जिसे नहीं हो पाए, कहीं नहीं वह सुख पाए,  दुख से उभर नहीं पाए - 2   ज्ञान करे भवपार यहाँ, देता जीवन सार यहाँ,  ज्ञान की महिमा,  हो ऽऽ ....     ज्ञान की महिमा, सब वेद सुनाये रे ---- जीवन है ।।121।।  भीतर की जब आँख खुले, तब ही अंतर दीप जले,  अंधकार की धूप धुले - 2,  होता जब दिल साफ तभी, होता है इंसाफ तभी,  ज्ञानी वो पाये,  हो ऽऽ ....     ज्ञानी वो पाये, जो कोई न पाये रे ---- जीवन है ।।122 ।। जो करना है आज करो, कल का मत विश्वास करो,  आज करो, व अभी करो - 2,  कल को किसने देखा है, पल का नहीं भरोसा है,  कल-2 तू करके क्यों,  हो ऽऽ ....     कल-2 तू करके क्यों, असल गंवाये रे ---- जीवन है ।।123 ।।  कर सकते वो यहाँ करो, ना कर पाओ नहीं करो, शक्ति जितना यहाँ करो - 2,  शक्ति नहीं तो शक्ति मांगो, जीवन में...