नवदेवता पूजन
नवदेवता पूजन ( पारुल जैन, दरियागंज, दिल्ली) ऊँ नमः सिद्धेभ्यः ऊँ नमः सिद्धेभ्यः ऊँ नमः सिद्धेभ्यः नवदेवता पूजन अरिहंतों की शरण जो आता, सिद्ध शरण स्वयमेव ही पाता। आचार्यपद महिमा भारी, पाठक साधु गौरवधारी।। आगम हमको मार्ग दिखाता, जिनधर्म की शरण में लाता। चैत्य चैत्यालय सुखकारी, भव्यों को है आनन्दकारी।। नव देवों की शरण जो आता, भवसागर से पार हो जाता। उर आसन धारें नर-नारी, जीवमात्र को मंगलकारी।। आह्वानन स्थापन करूँ, नव देवों को आज। सान्निध्य पाऊँ प्रभु का, शिवलक्ष्मी के काज।। ऊँ ह्रीं श्री अर्हत्सिद्धाचार्योपाध्याय सर्व साधु जिनधर्म जिनागम जिनचैत्य चैत्यालय समूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् (आह्वाननम्)। आइए प्रभु! आपके आने से, नाम मात्र लेने से मेरा मन, भाव, परिणाम, चेतन सब निर्मल हो जाते हैं। ऊँ ह्रीं श्री अर्हत्सिद्धाचार्योपाध्याय सर्व साधु जिनधर्म जिनागम जिनचैत्य चैत्यालय समूह! अत्र तिष्ठ ठः ठः (स्थापनम्)। आपके चरण-कमल मेरी आत्मा के प्रत्येक प्रदेश में, मेरी आत्मा का प्रत्येक प्रदेश आपके चरणों में स...