निजातम से अपने को तू जोड़ ले,
निजातम से अपने को तू जोड़ ले, निजातम से अपने को तू जोड़ ले, कषायों से अपना तू मन मोड़ ले, तेरा फिर ये जीवन संवर जाएगा सदा के लिए -२ १) कषायों में अपने तू उलझा रहा, अपने को खुद ही तू छलता रहा, अनादि से यूं ही भटकता रहा, कर्मों के जाले ही बुनता रहा। मिथ्या कषायों को तू छोड़ दे, आतम को अनुभव से तू जोड़ ले, तेरा फिर ये जीवन -----। २) पर के सदा गीत गाता रहा, पर को ही अपना समझता रहा, तू जीवन को यूं ही गंवाता रहा, अपने सेे खुद ही तू बचता रहा--२, पर और पा को तू जान ले, जीवन को तू पहचान ले, तेरा फिर ये जीवन--------। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद