है अगरचे सुख
भजन- है अगरचे सुख है अगरचे सुख मुकम्मिल मोक्ष में वैराग में । और कषायों के विषय भोगों के बिल्कुल त्याग में ॥ पर हर इक इन्सान में इतनी भला शक्ति कहां । सारे कर्मों को जो दे चैलेंज आ वैराग में ॥ गृहस्थ नीति पर चलें बस है सुगम रस्ता यही । धीरे धीरे कम करें कर्मों को घर के राग में ॥ त्याग फिर संसार को मुनिपद धरें शिव पद लहें। सारे कर्मों को जलादे ध्यान तप की आग में ॥ आप खुद करके दिखाया था ऋषभ जिनराज ने । किस तरह इन्सां चले इस गृहस्थ में वैराग में ॥ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद