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भलाई कर भला होगा

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  भजन -  भलाई कर भला होगा धुन - बहारों  फूल  बरसाओ ...... भलाई कर भला होगा, बुराई कर बुरा होगा   कोई देखे या न देखे, पर प्रभु तो देखता होगा—टेक   यहां नेकी बदी दो रास्ते हैं गोर से सुन ले   तुझे चलना है किस मंजिल पे अपना रास्ता चुन ले   कदम रखने से पहले सोच ले अजाम क्या होगा—टेक   इसी दुनिया में जन्नत है यही दुनिया जहन्नुम है   अगर आमाल हैं अच्छे तो फिर किस बात का डर है   तेरे आमाल नामे पर ही तेरा फैसला होगा—टेक । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

श्री महावीर चालीसा

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 श्री महावीर चालीसा ( शमसाबाद निवासी स्व० पूरनमल कृत ) सिद्ध समूह नमो सदा, अरु सुमिरु अरहन्त । निर आकुल निरवांछ हो, भये लोक से अन्त ॥ विघन हरन मंगल करन, वर्द्धमान-महावीर । तुम चिंतत-चिन्ता मिटे, हो प्रभु-चरम शरीर ॥ जय महावीर—दया के सागर । जय श्री सन्मति ज्ञान उजागर ॥ १ शांत छवि मूर्ति अति प्यारी । भेष दिगम्बर के तुम धारी ॥ २ कोटि भानु से अति छवि छाजै । देखत तिमिर पाप सब भाजै ॥ ३ महाबली अरि कर्म विदारे । जोधा मोह सुभट के मारे ॥ ४ काम क्रोध तजि छोड़ी माया । क्षण में मान कषाय भगाया ॥ ५ रागी नहीं, नहीं तू द्वेषी । वीत-राग तुम हित उपदेशी ॥ ६ प्रभु तुम नाम जगत में सांचा । सुमिरत भागत भूत पिशाचा ॥ ७ राक्षस यक्ष डाकिनी भागें । तुम चिंतत भय कोई न लागें ॥ ८ महाशूल को जो तन धारै । होवे रोग असाध्य निवारै ॥ ९ वियाल कराल होय फणधारी । विष कोडगल क्रोध कर भारी ॥ १० सदा काल सम करै डसंता । निर्विष करो आप भगवन्ता ॥ ११ महा मत्त गज मद की झारै । भगे तुरन्त जब तोई पुकारै ॥ १२ फार दाढ़ सिंहदिक आवै । ताको हे प्रभु तुही भगावै ॥ १३ होकर प्रबल अगिन जो जारै । तुम प्रताप शीतलता धारै ॥ १४ शस्त्र धार अरि युद्ध लड़न...