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नहीं चाहिए दिल

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  " नहीं चाहिए दिल " नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का,  सदा न रहा है, सदा न रहेगा, ये ज़माना किसी का। नहीं चाहिए दिल .............. आएगा बुलावा तो जाना पड़ेगा, सर तुमको आखिर झुकाना पड़ेगा,  वहाँ न चला है, वहाँ न चलेगा, ये बहाना किसी का, नहीं चाहिए दिल .............. पहले तो तुम अपने आप को संभालो, हक नहीं तुमको बुराई औरों में निकालो,  बुरा है बुरा जग में, बताना पड़ेगा, नहीं चाहिए दिल .............. दुनिया का गुलशन सजा ही रहेगा, ये तो जहाँ में लगा ही रहेगा,  आना किसी का जग में, जाना किसी का, नहीं चाहिए दिल .............. शौहरत तुम्हारी रह जाएगी ये, दौलत यहाँ पर रह जाएगी ये  नहीं साथ जाता ये, खज़ाना किसी का, नहीं चाहिए दिल .............. ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

जिनवाणी जग मैया

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जिनवाणी जग मैया   जिनवाणी जग मैया, जनम दु:ख मेट दो,  जनम दु:ख मेट दो, मरण दु:ख मेट दो। समवशरण सा महल तुम्हारा, गणधर जैसा भैया,  कुंद-2 से पुत्र तुम्हारे, तीर्थंकर से सैंया , जिनवाणी ___________ । सात तत्व छ द्रव्य बताए, हो उपकारी मैया,  जो भी शरण में आया उसकी, पार लगा दी नैया, जिनवाणी ___________ । संकट मोचन नाम तुम्हारा, तुम हो जग की मैया,  हाथ जोड़कर शीश नवाऊँ, पडूँ तुम्हारे पैंया, जिनवाणी ___________ । ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

मुझे मिले मेरे भगवान

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मुझे मिले मेरे भगवान सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा Sung by Bindu Jain,Delhi मुझे मिले मेरे भगवान, मन के मन्दिर में, मुझे मिल गया सच्चा ज्ञान, मन के मन्दिर में। जिसको ढूंढ रही थी जग में, छुपा हुआ वो मेरे मन में, वो तो बैठे घर कर ध्यान, मन के मन्दिर में। मुझे... मन-मन्दिर का द्वार बंद था, दुर्व्यसनों का ताला जड़ा था, कैसे दर्शन हों भगवान, मन के मन्दिर में। मुझे... मन-मन्दिर में धूल जमी थी, माया-मोह की गर्द चढ़ी थी, मैंने आँगन दिया बुहार, मन के मन्दिर में। मुझे... तप के जल से मैल निकाला, अन्तर दीप से किया उजाला तब दर्श हुए भगवान मन के मन्दिर में। मुझे —   तुझ में मुझ में भेद नहीं था, मैं ही जग के भ्रम में पड़ा था,  मैंने पाया जगत निःसार, मन के मन्दिर में। मुझे —  जग को भूल के तुम को ध्याया, अपने अन्दर तुमको पाया,  मुझे मिला आनन्द अपार मन के मन्दिर में। मुझे —  जगत लगे मुझे झूठा सपना, तू मुझको लागे है अपना,  मैं तो करूँ तेरा गुणगान मन के मन्दिर में। मुझे —  मुझ को तुम हरगिज न भुलाना, अंत समय में पास बुलाना,  दो...

छहढाला(35)

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अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत छहढाला(35)   सम्यग्ज्ञानके भेद, परोक्ष और देशप्रत्यक्षके लक्षण तास भेद दो हैं, परोक्ष परतछि तिन मांहीं; मति श्रुत दोय परोक्ष, अक्ष मनतैं उपजाहीं । अवधिज्ञान मनपर्जय दो हैं देश-प्रतच्छा; द्रव्य क्षेत्र परिमाण लिये जानें जिय स्वच्छा ॥ ३ ॥ अन्वयार्थः   (तास ) उस सम्यग्ज्ञान के (परोक्ष) परोक्ष और (परतछि) प्रत्यक्ष (दो) दो (भेद हैं) भेद हैं; (तिन मांहीं) उनमें (मति श्रुत) मतिज्ञान और श्रुतज्ञान (दोय) यह दोनों (परोक्ष) परोक्षज्ञान हैं। क्योंकि वे (अक्ष मनतैं) इन्द्रियों तथा मन के निमित्त से (उपजाहीं) उत्पन्न होते हैं। (अवधिज्ञान) अवधिज्ञान और (मनपर्जय) मनःपर्ययज्ञान (दो) यह दोनों ज्ञान (देश-प्रतच्छा) देशप्रत्यक्ष (हैं) हैं; क्योंकि उन ज्ञानों से (जिय) जीव (द्रव्य क्षेत्र परिमाण) द्रव्य और क्षेत्र की मर्यादा (लिये) लेकर (स्वच्छा) स्पष्ट (जानै) जानता है। भावार्थः  इस सम्यग्ज्ञान के दो भेद हैं - (१) प्रत्यक्ष और (२) परोक्ष; उनमें मतिज्ञान और श्रुतज्ञान ’परोक्षज्ञान’ हैं, क्योंकि ये दोनों ज्ञान इन्द्रियों तथा मन के निमित्त से वस्तु को अस्पष्ट...

तीन भुवन के स्वामी मेरे

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  तीन भुवन के स्वामी मेरे  तीन भुवन के स्वामी मेरे, आया सुखद सवेरा, आनंद उर न समाए प्रभुवर, दर्शन पाया तेरा  - २  वीतराग सर्वज्ञ प्रभु हम, सुनी नहीं जिनवाणी, कर्ता धर्ता तुमको माना, कर बैठा नादानी, - २ तुम तो स्वामी गुरु जगत के, दूर हुआ तम मेरा, आनंद उर न समाए -------- २) कण कण है स्वाधीन जगत का, तुमने प्रभु बतलाया,  निज पर के कर्तापन का भ्रम, जिनवर दूर भगाया, - २    सर्व विपद को दूर करे यह, जिनवर दर्शन तेरा,  आनंद उर न समाए --------- ३) तन मन कर्म रंग रागादिक, देते भिन्न दिखाई, सम्यक ज्ञान कला उर जागी, निज प्रभुता मैं पाई - २      शुद्ध स्वरूप अगोचर तेरा, सफल हुआ भव मेरा  आनंद उर न समाए-------- ४) सम्यक हुई प्रतीति प्रभुवर, तुम सम ही प्रभु मैं हूं,  हूँ गुण धाम सहज अभिराम, आनंद धाम सदा हूँ - २ निज में ही ध्याऊं मैं तुमको, अभिनंदन है तेरा , आनंद उर न समाए --------। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लग...

देवों के देव

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 देवों के देव देवों के देव श्री जिन देव, नाथों के नाथ श्री जिन नाथ -२  महा पुण्य से दर्शन पाया, भक्ति भाव उर में उमगाया, -२ स्वयमेव चरणों में झुकता है माथ,  देवों के देव ----------- तुम ही हो जग में शरण सहारे, निरपेक्ष बांधव हो तुम हमारे, -२ अहो अहो तुम ही हो सांझेदार, देवों के देव ---------  तुमसे विमुख रह बहु दुःख उठाए, आज विकल सब सहज नशाए, -२ दर्शन से स्वामी हुए कृतार्थ, देवों के देव -----------  तत्वों का अब ज्ञान हुआ है, निज पर भेद विज्ञान हुआ है, -२ अनुभव में आप यह चैतन्य नाथ, देवों के देव -----------  जग से उदासी हुई सुखकारी,  दूर हुए दुर्भाव विकारी, -२  मन में बसी छवि तेरी मुनिराज,   देवों के देव ------------  वीतराग सर्वज्ञ तुम्हीं हो,  बीच भंवर के हितैषी तुम ही हो, -२  समवशरण में नमो निज माथ,  देवों के देव-------------। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वार...

मैंने सारे सहारे छोड़ दिए

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 मैंने सारे सहारे छोड़ दिए   मैंने सारे सहारे छोड़ दिए, बस तेरा सहारा काफी है -2  मुझे चाह नहीं दुनिया भर की, -2  बस तेरा नज़ारा काफी है, -2  मैंने सारे सहारे --------- १) तेरी चाहत में जग छूट गया, -2  पर तू मुझसे क्यों रूठ गया, -2 मैं डूब रहा भवसागर में बस आना तुम्हारा बाकी है, -2  मैंने सारे सहारे ------------ २) मैंने जब से तुम्हारा नाम लिया, -2  इस जग ने बहुत इल्जाम दिया, -2 जब तूने मुझे यूं थाम लिया, बस मेरा गुज़ारा काफी है, -2 मैंने सारे सहारे-------- ३) मैंने तेरे लिए ही जोग लिया, -2  और छोड़ जगत का भोग दिया, -2  रो रो के बुलाना काम मेरा, बस आना तुम्हारा बाकी है, -2 मैंने सारे सहारे-----------। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

नवदेवता पूजन

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नवदेवता पूजन   ( पारुल जैन, दरियागंज, दिल्ली) ऊँ नमः सिद्धेभ्यः ऊँ नमः सिद्धेभ्यः ऊँ नमः सिद्धेभ्यः  नवदेवता पूजन  अरिहंतों की शरण जो आता, सिद्ध शरण स्वयमेव ही पाता।  आचार्यपद महिमा भारी, पाठक साधु गौरवधारी।।  आगम हमको मार्ग दिखाता, जिनधर्म की शरण में लाता।  चैत्य चैत्यालय सुखकारी, भव्यों को है आनन्दकारी।।  नव देवों की शरण जो आता, भवसागर से पार हो जाता।  उर आसन धारें नर-नारी, जीवमात्र को मंगलकारी।।   आह्वानन स्थापन करूँ, नव देवों को आज।  सान्निध्य पाऊँ प्रभु का, शिवलक्ष्मी के काज।।  ऊँ ह्रीं श्री अर्हत्सिद्धाचार्योपाध्याय सर्व साधु जिनधर्म जिनागम जिनचैत्य चैत्यालय समूह! अत्र अवतर अवतर संवौषट् (आह्वाननम्)।  आइए प्रभु! आपके आने से, नाम मात्र लेने से मेरा मन, भाव, परिणाम, चेतन सब निर्मल हो जाते हैं।   ऊँ ह्रीं श्री अर्हत्सिद्धाचार्योपाध्याय सर्व साधु जिनधर्म जिनागम जिनचैत्य चैत्यालय समूह! अत्र तिष्ठ ठः ठः (स्थापनम्)।  आपके चरण-कमल मेरी आत्मा के प्रत्येक प्रदेश में, मेरी आत्मा का प्रत्येक प्रदेश आपके चरणों में स...

कुछ तो समय निकालो

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  कुछ तो समय निकालो पारुल जैन, दिल्ली द्वारा संकलित एवं प्रेषित सुन्दर भजन हर दम है तैयार तू पाप कमाने के लिए, कुछ तो समय निकालो प्रभु गुण गाने के लिए। -2 जब माता के गर्भ में आया, ध्यान धरूँगा मैं तेरा, इस झूठी पृथ्वी पर आकर, भूल गया प्रभु नाम तेरा - (2) सत्य परम गुरु आते हैं, समझाने के लिए, अजी कुछ तो समय निकालो प्रभु गुण गाने के लिए, हर दम है ....... जल गई बाती, लिपट गया तेल, छल-छल-छल-छल हो रहा, मृत्यु के आंचल में जीवन, पल-पल पल-पल खो रहा, चार जने मिल आते हैं, ले जाने के लिए, अजी कुछ तो समय निकालो, प्रभु गुण गाने के लिए हर दम है ....... हाड़ जले जैसे सूखी लकड़ी, केश जले जैसे घास रे, कंचन जैसी काया जल गई, कोई न आया पास तेरे अपने पराये होते हैं, दिखलाने के लिए, अजी कुछ तो समय निकालो, प्रभु गुण गाने के लिए हर दम है तैयार तू, पाप कमाने के लिए। अजी कुछ तो समय निकालो, प्रभु गुण गाने के लिए॥ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वा...

चौथी ढाल का अन्तर—प्रदर्शन

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चौथी ढाल का अन्तर—प्रदर्शन १— दिग्व्रत की मर्यादा तो जीवनपर्यंत के लिये है; किन्तु देशव्रत की मर्यादा घड़ी, घण्टा आदि नियत किये हुए समय तक की है। २— परिग्रहपरिमाण व्रत में परिग्रह का जितना प्रमाण (मर्यादा) किया जाता है, उससे भी कम प्रमाण भोगोपभोगपरिमाण व्रत में किया जाता है। ३— प्रोषध में तो आरम्भ और विषय—कषायादि का त्याग करने पर भी एक बार भोजन किया जाता है, उपवास में तो लेह—पेय—खाद्य और स्वाद्य —इन चारों आहारों का सर्वथा त्याग होता है। प्रोषध—उपवास में आरम्भ, विषय—कषाय और चारों आहारों का त्याग तथा उसके अगले दिन और पारणे के दिन अर्थात् अगले—पिछले दिन भी एकाशन किया जाता है। ४- भोग तो एक ही बार भोगने योग्य होता है, किन्तु उपभोग बारम्बार भोगा जा सकता है।  (आत्मा परवस्तु को व्यवहार से भी नहीं भोग सकता; किन्तु मोह द्वारा, 'मैं इसे भोगता हूँ' -ऐसा मानता है और तत्सम्बन्धी राग को, हर्ष-शोक को भोगता है। यह बतलाने के लिये उसका कथन करना सो व्यवहार है ।)                                         ...

आरती पंचकल्याणक

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  आरती पंचकल्याणक आरती श्री जिनराज चरण की, गुण छयालीस अठारह दोष हरण की। पहली आरती गर्भ पूर्ण की, पन्द्रह मास रतन वर्षन की। आरती श्री........ दूसरी आरती जन्म करन की, मति श्रुत अवधि सुज्ञान पूर्ण की। आरती श्री........ तीसरी आरती तपोचरण की, पंच मुष्टिका लोच करन की। आरती श्री........ चौथी आरती केवल ज्ञान पूरण की, समवशरण धनपति रचनन की। आरती श्री........ पाँचवी आरती मोक्ष गमन की, सुर नर मिल उछाह करन की। आरती श्री........ जो यह आरती करे करावे, ‘द्यानत’ मन वांछित सुख पावे। आरती श्री........ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

आरती श्री महावीर जी (अतिशय क्षेत्र)

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  आरती श्री महावीर जी (अतिशय क्षेत्र)  जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो। कुंडलपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभो। जय महावीर प्रभो,  सिद्धार्थ घर जन्मे, वैभव था भारी। बाल ब्रह्मचारी व्रत पाल्यो तप धारी। जय महावीर प्रभो, आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी। माया मोह विनाशक, ज्ञान ज्योति जारी। जय महावीर प्रभो, जग में पाठ अहिंसा, आपहिं विस्तारयो। हिंसा पाप मिटाकर, सुधर्म परिचारयो। जय महावीर प्रभो, इह विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो। ग्वाल मनोरथ पूर्यो, दूध गाय पायो। जय महावीर प्रभो, अमरचंद को सपना, तुमने प्रभु दीना। मंदिर तीन शिखर का, निर्मित है कीना। जय महावीर प्रभो, जयपुर नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी। एक ग्राम तिन दीनो, सेवा हित यह भी। जय महावीर प्रभो, जो कोई तेरे दर पर, इच्छा कर आवे। होय मनोरथ पूरण, संकट तिट जावे। जय महावीर प्रभो, निशदिन प्रभु मंदिर में, जगमग ज्योति जगे। हम सेवक चरणों में, आनंद मोद धरें। जय महावीर प्रभो, जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो। कुंडलपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभो। जय महावीर प्रभो  ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्रा...

भगवान पार्श्वनाथ

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  भगवान पार्श्वनाथ जय पारस जय पारस जय पारस देवा। माता तुम्हारी वामा देवी, पिता अश्व देवा। जय पारस....... काशी जी में जन्म लिया था, हो देवों के देवा। जय पारस....... आप तेइसवें हो तीर्थंकर, भक्तों को सुख देवा। जय पारस....... पाँचों पाप मिटाकर हमरे, शरण देओ जिन देवा। जय पारस....... दूजा और कोई न दीखे, जो पार लगावे खेवा। जय पारस....... नवयंवक मण्डल बना रहे, जो करे आपकी सेवा। जय पारस....... हम भी शरण तिहारी आए, हाथ जोड़ कर शीश नवाए। जय पारस....... हमको भी तो दे दो भगवन्, तव भक्ति की मेवा। जय पारस....... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

प्रभु के बिना

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प्रभु के बिना  प्रभु के बिना मन भटकेऽऽ, महावीरा...  प्रभु जी तुमने मस्तक दिया अनमोल - 2 धोक देऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ...  प्रभु जी तुमने नैन दिए अनमोल - 2 शास्त्र पढ़ूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... दरश करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ...  प्रभु जी तुमने कान दिए अनमोल - 2 वचन सुनूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... भजन सुनूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... प्रभु जी तुमने मुख दिया अनमोल - 2 भजन गाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... कीर्तन करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... प्रभु जी तुमने हाथ दिए अनमोल - 2 दान करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... पूजन करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ...  प्रभु जी तुमने पैर दिए अनमोल - 2  तीरथ जाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... निरत करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... मैं मंदिर जाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... प्रभु जी तुमने हृदय दिया अनमोल - 2 मैं सिमरन करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ......