वीर पालना
वीर पालना वीर स्वामी का सुन्दर अधर पालना । सज रहा है सिद्धार्थ के घर पालना ॥ टेक जिसमें रेशम की सुन्दर पड़ी डोरियाँ । सच्चे मोती लगाये—चहुँ ओरियाँ ॥ है सुशोभित यह सुन्दर अधर पालना ॥ वीर० ॥ १ झुन झुना माता त्रिशलावती ले रही । वीर के हाथ में हँस के जब दे रही ॥ वीर का हिल रहा बेखतर पालना ॥ वीर० ॥ २ देव इन्द्रादि मिल पुष्प बरसा रहे । सारे नर नारी हृदय में हर्षा रहे ॥ देखने जा रहा हर बसर पालना ॥ वीर० ॥ ३ जन्म उत्सव का दिन मिल मनाओ सभी । यह ‘किशन’ ने लिखा है अमर पालना ॥ वीर० ॥ ४ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद