चेतन हूं निराकार
भजन - चेतन हूं निराकार (चाल—मामूर हूं शोखी से शरारत से भरी हूँ) चेतन हूं निराकार हर बात का ज्ञाता पर क्या करूं जग बन्ध से फंदे में फंसा हूँ शक्ति है कि कर्मों को मैं इक दम में उड़ा दूँ लाचार हूँ इस मोह की नागिन से डसा हूँ क्या असल है कर्मों की मेरे तेज के आगे इक छिन के छिन में ध्यान की अग्नि से जला दूँ अब आन गही न्यामत जिन शरण तिहारी अरदास यही है कि मैं कर्मों से रिहा हूँ। । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद