जिन दर्शन
मन्दिरजी में प्रवेश से लेकर अभिषेक और शांति धारा तक (एक कविता के रूप मे) निःसही निःसही कह करें प्रवेश फिर दर्शन विधि पढ़ माथा टेक, स्तुति पाठ पूजन सामायिक साईड खड़े हो पढ़ें प्रत्येक, सिर पर टोपी और दुपट्टा ध्यान रखें यह बात विशेष, साईड खड़े हो तिलक करें पूजन फल तब परम विशेष, मंद ध्वनि मे पूजन पाठ सहयोगी बन सबके आप, स्वाध्याय तब ठीक से होगा और ठीक जिनवर का जाप, छोटा-सा जब मंदिर अपना माईक करें न कभी प्रयोग, ध्वनि प्रदूषण तभी रुकेगा और बनेगा पुण्य का योग, जिन पूजन अभिषेक महान पापाचरण तजिए श्रीमान् , कविवर बुधजन कहते हैं उत्तम फल तब ही बस जान, कटे फटे न पहनें वस्त्र नाखून रखें न कभी बड़े, सभी पुराने रक्षा सूत्र छोड़ कलाई रखिये शुद्ध, थोडे-थोड़े जल से ही श्री जिन का अभिषेक करें, गंधोदक का ठीक विसर्जन करके सब तब विघ्न हरें, अभिषेक विधि चल रही हो जब रोक परिक्रमा वेदी की तब, विधि पूर्ण जब हो जावे गंधोदक माथे तब लगावें, यह भी निश्चित ध्यान रखें पूजन जब प्रारंभ करें, भूमि गिरे न द्रव्य पवित्र हाथ रकेवी उतनी ही भरें, जि...