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है अगरचे सुख

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भजन- है अगरचे सुख   है अगरचे सुख मुकम्मिल मोक्ष में वैराग में । और कषायों के विषय भोगों के बिल्कुल त्याग में ॥ पर हर इक इन्सान में इतनी भला शक्ति कहां । सारे कर्मों को जो दे चैलेंज आ वैराग में ॥ गृहस्थ नीति पर चलें बस है सुगम रस्ता यही । धीरे धीरे कम करें कर्मों को घर के राग में ॥ त्याग फिर संसार को मुनिपद धरें शिव पद लहें। सारे कर्मों को जलादे ध्यान तप की आग में ॥ आप खुद करके दिखाया था ऋषभ जिनराज ने । किस तरह इन्सां चले इस गृहस्थ में वैराग में ॥ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

हाय इन भोगों ने

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भजन- हाय इन भोगों ने चाल—घर से यहां कौन खुदा के लिए लाया मुझको । हाय इन भोगों ने क्या रंग दिखाया मुझ को बेखबर जगत के धन्धों में फसाया मुझको ॥टेक॥ मैं तो चेतन हूं निराकार सभी से न्यारा दुष्ट भोगों ने ही कर्मों से बंधाया मुझ को ॥टेक॥ नींद गफलत से मेरी आंख कभी भी न खुली भोग इन्द्री और विषयों ने भुलाया मुझको ॥टेक॥ ज्ञान धन मेरा हरा रूप दिखा कर अपना जून चौरासी में भटका के रुलाया मुझको ॥टेक॥ अब न सेऊंगा कभी भूल कर इन विषयों को 'न्यायमत' जैन धर्म अब तो है पाया मुझको ॥टेक॥   । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

आरती

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आरती तर्ज :— आरती ओं जय जय श्री महावीर, -2 त्रिशला नंदन स्वामी, दिखलाओ भवतीर ॥ (ध्रुव) कुण्डलपुर में तेरा, शुभ दिन जन्म हुआ, स्वामी.... पावापुरी पावास में, तव निर्वाण हुआ — ओं जय......॥१॥ ज्ञान का स्रोत बहाकर, सब की प्यास हरो, स्वामी... छाया घोर अंधेरा, दिव्य प्रकाश करो, ओं जय ......॥२॥ तू जीवन की ज्योति, तू घट घट ज्ञाता, स्वामी.... भाग्य विधाता तू ही, तू ही सुखदाता, ओं जय .........॥३॥ लीन रहे अपने में, ऐसा शुभवर दो, स्वामी... संकट मोचक तू ही, सब संकट हर दो, ओं जय .........॥४॥ हमको दिखा दो शिवपुर, सविनय अर्ज करें, स्वामी... "मुनि कन्हैया" स्थिर मन, तेरा ध्यान धरें — ओं जय...॥५॥ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

चेतन हूं निराकार

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भजन -  चेतन हूं निराकार (चाल—मामूर हूं शोखी से शरारत से भरी हूँ) चेतन हूं निराकार हर बात का ज्ञाता पर क्या करूं जग बन्ध से फंदे में फंसा हूँ शक्ति है कि कर्मों को मैं इक दम में उड़ा दूँ लाचार हूँ इस मोह की नागिन से डसा हूँ क्या असल है कर्मों की मेरे तेज के आगे इक छिन के छिन में ध्यान की अग्नि से जला दूँ अब आन गही न्यामत जिन शरण तिहारी अरदास यही है कि मैं कर्मों से रिहा हूँ। । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद  

जिया राग भाव

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भजन - जिया राग भाव  (चाल - सोरठ - अधिक सरूप रूप का दिया न जागा मोल) जिया राग भाव दुखदाई, राग को मन से हटाओ जी मन से हटाओ जी, राग को मन से हटाओ जी - टेक है राग निमित संसार करम का मूल बताओ जी जो चाहो हो परमानन्द भाव वैराग बनाओ जी - टेक  यह राग चिकट सम जान भूल इस रस्ते न जावो जी लग जावेगी कर्मों की धूल ज्ञान दामन को बचावो जी - टेक अब पर परिणति को छोड़ ध्यान आपे में जमावो जी न्यामत तजराग अरु द्वेष सदा आतम गुण गावो जी - टेक । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद  

ये व्यर्थ नर

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 **भजन** - ये व्यर्थ नर *(चाल—ये जिन्दगी उसी की है जो किसी का हो गया)* ये व्यर्थ नर जन्म तेरा, इस जगत में हो गया,  भोग ही में खो गया ....... है अमोल ये रतन नर जनम जहान में,  है भोग कांच के समान, जान ले तू ज्ञान में --- क्यों काँच बदले खो रहा, मूढ़ ये रतन महान—टेक  है विषय में सुख नहीं, दुःख ही महान है,  सरसों समान सुख अगर, तो कष्ट मेरु मान है,  भोगों में चित्त न लगा, जो चाहता है निज भला—टेक  हाथी व मीन और भ्रमर, तथा पतंग और हिरण,  एक एक विषय के वश, इनका हुआ है मरण,  पाँचों के जो वश भये, भगवान उनकी क्या दशा—टेक । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

महावीर बाबा

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 **भजन** -  महावीर बाबा   महावीर बाबा, तू दर्श दिखाजा, तू गले से लगाजा,  तू बिगड़ी बना जा, अपने दास की,  पड़े हैं भिखारी तेरे द्वार पर—टेक  अर्ज़ करी है भगवन, मर्जी है तेरी, आओगे या न आओ , अर्ज़ी पर मर्जी दिखाजा प्रभु जी, आकर दर्श दिखा जाओ,  चांदनपुर के, महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक  बाबा ना मांगू तुम से सोना या चांदी, धन दौलत भी न मांगू , भीख दया की तू दे दे रे बाबा, भीक दया की मैं मांगू , चांदनपुर के महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक  नाव पड़ी है भगवान बीच भंवर में, पार लगा या ठुकरा दे,  आकर पड़े हैं भगवन तेरी शरण में, अपना ले या ठुकरा दे, चांदनपुर के महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक ---  । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

स्तवन रत्न - गौतम स्वामी

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स्तवन रत्न गौतम स्वामी, महावीर प्रभु के प्रथम शिष्य थे। उन्हें प्रभु के प्रति बहुत राग था। प्रभु का विरह उनसे सहन नहीं होता था। अपने निर्वाण का समय नज़दीक आया जानकर,प्रभु महावीर ने गौतम स्वामी के लिए एक युक्ति की। उन्होंने गौतम स्वामी को आज्ञा दी कि पास के गाँव में जाकर एक श्रावक को धर्म उपदेश देकर आओ। भगवान की आज्ञा गौतम स्वामी के लिए ब्रह्मवाक्य जैसी थी, आज्ञा मिलते ही वे प्रसन्न चित्त से श्रावक के घर जाने के लिए निकल पड़े। वे बस आधे रास्ते ही पहुँचे होंगे कि तभी भगवान महावीर के निर्वाण की आकाशवाणी हुई। यह सुनकर गौतम स्वामी को बहुत आघात लगा कि सब कुछ जानते हुए भी प्रभु ने अंत समय मुझे उनसे दूर कर दिया! भगवान ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? क्यों? क्यों?.... गौतम स्वामी सोच में पड़ गए। और विचार शृंखला आगे बढ़ी तो उनकी दृष्टि भगवान पर से हटकर खुद पर पड़ी। विचारों की शृंखला ने अपनी काया पलटी... "अरे रे! मेरी भूल हो गई! मैंने भगवान के लिए कैसा गलत सोचा! मुझे भगवान के लिए राग है लेकिन भगवान तो वीतराग हैं। भगवान को किसी के साथ राग-द्वेष नहीं होता। भगवान तो अत्यंत करुणा वाले हैं, वीतराग हैं...

प्यारी दुनिया है

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भजन- प्यारी दुनिया है चाल — (कवाली) कोई चतुर ऐसी सखी न मिली प्यारी दुनिया है सागर दु:खों से भरा या में सुख कहीं आता नजर ही नहीं या में मोह का जाल पड़ा है सती या में जीव फंसे हों खबर ही नहीं ॥टेक॥ कौन माता पिता कौन बन्धु सुता कैसे भाई बहिन कैसे दारा पति इस दुनिया के नाते हैं झूठे सभी सच पूछो तो रहने का घर ही नहीं ॥टेक॥ नदी नाव संजोग से आके मिले जैसे पेड़ पे पंखी बसेरा करे जब भोर भई सब बिछड़ के चले संग चलने का कोई ज़िकर ही नहीं ॥टेक॥ रानी स्वारथ की सारी है दुनिया लखो या में भूल के कोई न नेह करो सूखे दरिया पे नर पशु पंछी कोई देखो करता है आके गुजर ही नहीं ॥टेक॥ चाहे फौज प्यादे हजारों रहो चाहे महल किले में जा बंद करो चाहे जंतर मंतर लाखों पढ़ो मौत टारी किसी से भी टरती नहीं ॥टेक॥ धन दौलत राज खजाना सभी कोई अन्त समय काम आवे नहीं आ मुसीबत में कोई सहाई करे ऐसा कोई भी सुर या असुर ही नहीं ॥टेक॥ ऐसा जान के प्यारी विचार करो दु:ख शोक तजो समता को भजो मोह माया को मन सेती दूर करो मोह करने का अच्छा समर ही नहीं ॥ जिन राज भजो मन धीर धरो तप सयंम शील सिंगार करो धर ध्यान निज आतम कर्म हरो बिन धर्म के होगा ग...