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धन्य-२ आज घड़ी

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धन्य-२ आज घड़ी, कैसी सुखकार है, जिन चरणों की भक्ति करके आनन्द अपार है। खुशियाँ अपार आज हर दिल में छायी  है, दर्शन के हेतु देखो, जनता अकुलाई है। चारों ओर देख लो भीड़ बेशुमार है, जिन .......... भक्ति भावन से नृत्य गायन कोई हैं कर रहे, आतम सुबोध कर पापों से डर रहे, पल-२ पुण्य का कर रहे भंडार हैं, जिन ........... जय-जय के नाद से गूंजा ये आकाश है, छूट जाएंगे पाप सारे, निश्चय ये आज है, देखो सौभाग्य से खुला, मुक्ति का द्वार है। जिन ....... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

सतगुरु तुम्हारे प्यार ने

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  सतगुरु तुम्हारे प्यार ने  सतगुरु तुम्हारे प्यार ने, जीना सिखा दिया,  गुरुवर तुम्हारे प्यार ने, इंसां बना दिया। भूला हुआ था रास्ता, भटका हुआ था मैं, -2 किस्मत ने मुझको आपके, काबिल बना दिया। गुरुवर तुम्हारे प्यार ने ............................. । रहते हैं जलवे आपके, नजरों में हर घड़ी, -2 मस्ती का जाम आपने, ऐसा पिला दिया। -2 गुरुवर तुम्हारे प्यार ने ............................. । जब से मुझको आपने, अपना बना लिया। -2 दोनों जहाँ को दास ने , तब से भुला दिया। -2 गुरुवर तुम्हारे प्यार ने ............................. । जिसने किसी की राह में, सजदा नहीं किया, -2 उसने भी ये सर आपके, दर पे झुका दिया। -2 गुरुवर तुम्हारे प्यार ने ............................. । ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

छोटा सा मंदिर

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  छोटा सा मंदिर   छोटा सा मंदिर बनाएंगे, वीर गुण गाएंगे।-2 हाथों में ले कर सोने का कलशा-2 प्रभु जी का अभिषेक कराएंगे, गुरुवर के चरण धुलाएंगे, वीर गुण गाएंगे ॥ हाथों में ले कर घी का दीपक-2, प्रभुजी की आरती उतारेंगे, वीर........... । हाथों में ले कर द्रव्य की थाली-2, प्रभु जी की पूजा रचाएंगे, वीर................... । हाथों में ले कर ढोल मंजीरा-2, श्री जी का कीर्तन कराएंगे, वीर............ । ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

अँखियों के झरोखों से

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अँखियों के झरोखों से अँखियों के झरोखों से, देखा मैंने जो सामने। गुरु दूर नजर आए, बड़ी दूर नजर आए ॥ बंद करके झरोखों को, जरा बैठा मैं ध्यान में। मन में प्रभु मुस्काए, मन में प्रभु मुस्काए ॥ अँखियों के झरोखों से ................................... प्रभु भक्ति में प्रभु ध्यान में, मन खोने लगा है। संसार के दुःख जाल में, हंस-रोने लगा है ॥ जिनवर के भरोसे पर, सब बैठा हूँ भूलकर, यूँ ही उम्र गुज़र जाए, ले के नाम गुज़र जाए ॥ अँखियों के झरोखों से ................................... मैं जब से अपने गुरु के रंगों में रंगा हूँ। सोई हुई मेरी आशा, मैं कहता हूँ जगी हैं। अपनी मुक्ति का ये सपना, कहीं कोई न तोड़ दे। मन सोच के घबराए, यही सोच के घबराए ॥ अँखियों के झरोखों से ................................... माना इस काल में, मुक्ति तो नहीं है। पर हार कर चुप बैठना, युक्ति तो नहीं है। मेरी मुक्ति का ये विरवा, मैं जाऊँगा रोप के। संभव है किसी भव में, मेरी मुक्ति हो जाए ॥ अँखियों के झरोखों से ...................................   ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 ...

मीठो-मीठो बोल

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मीठो-मीठो बोल  मीठो-मीठो बोल थारो कांई बिगड़े। कांई बिगड़े थारो कांई बिगड़े। -2 आ जीवन मा दम नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं। मीठो-मीठो ........................... सोच समझ ले स्वारथ रो संसार। लाख जतन कर छूटे न घर बार। तू जान ले, पहचान ले, अरे मान ले। संसार किसी का घर नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं। मीठो-मीठो ........................... युग-युग से गुरु कहते बारम्बार। एक बार तू करले मन में विचार। तू जान ले, पहचान ले, अरे मान ले। संसार किसी का घर नहीं। कब निकले प्राण मालूम नहीं। मीठो-मीठो ........................................ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

आए हैं मेरे गुरुवर

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  आए हैं मेरे गुरुवर  तर्ज - आए होे मेरी जिंदगी में... आए हैं मेरे गुरुवर, अपना मुझे बनाने-२ अज्ञान का अंधेरा, मन से मेरे मिटाने-२ गुरु के मुखारविन्द से सदा ज्ञान गंगा बहती, करें  प्रेम सब से प्यारों, वाणी उन्हीं की कहती, सत्संग रूप अमृत, आए हमें पिलाने, अज्ञान का अंधेरा ....................................... कल्याण हो जगत का, सन्देश ये ही देते, उद्धार हो भगत का, उपदेश ये ही देते, हिल मिल के सभी रहना, आए हमें सिखाने, अज्ञान का अंधेरा ....................................... तुम मात पिता भ्राता, गुरुदेव को ही जानो, ये ब्रह्म और विष्णु गुरु का ही रूप मानो, दाता दयालु गुरु को, प्रभु का स्वरूप समझें, अज्ञान का अंधेरा ....................................... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

शारदे स्तुति

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  शारदे स्तुति  हे शारदे माँ, हे शारदे माँ अज्ञानता से हमें तार दे माँ। -2  मुनियों ने समझी, मुनियों ने जानी,  शास्त्रों की भाषा, आगम की वाणी।  हम भी तो समझें, हम भी तो जानें,  विद्या का फल तू  हमें मात! देना। हे शारदे माँ.... तू  है ज्ञान दायी, हमें ज्ञान दे दे, रत्नत्रयों का हमें दान दे दे। मन से हमारे मिटा दे अंधेरे, हमको उजालों का शिव द्वार देना। हे शारदे माँ....  तू  है मोक्षदायी  है संगीत तुझमें,  हर शब्द तेरा है हर भाव तुझमें।  हम हैं अकेले हम हैं अधूरे,  तेरी शरण माँ ! हमें तार देना। हे शारदे माँ.... निजातम को भूले विषयों में फूले, नहीं निज के झूले कभी हमने झूले। आतम भवन में मिले सुख अपारा, हे माँ ! तुझी में मिले भव किनारा। हे शारदे माँ..... हृदय  कमल पर पधारो हे माता ! आ कंठ मेरे विराजो हे माता ! नमन हो नमन हो नमन हो हमारा , समर्पित है सेवक तू देना सहारा । हे शारदे माँ..... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि ...

गुरुवर तू है जग का नूर

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 गुरुवर तू है जग का नूर   तर्ज - तेरी दुनिया से दूर, चले हो के मजबूर। गुरुवर तू है जग का नूर, तेरी ख्याति दूर-दूर, हमें याद रखना। तुझको जाना है जरूर, हम तो श्रावक मजबूर, हमें याद रखना। आएंगे जब मन्दिर तो, तेरी मीठी वाणी बुलाएगी हमें-2 सूना सिंहासन ये आँखें, हर पल हमें रुलाएगी हमें-2 रुलाएगी हमें, तड़पाएगी हमें-2 ......  गुरुवर तू है जग का नूर.... ॥ किसको पड़गाहूँ और किसको अब नमोस्तु, कहूँगा ये बता। अत्रो-अत्रो कहकर के, विधि किसकी, मिलाऊंगा ये बता-2 बुलाएंगे किसे-2..........  गुरुवर तू है जग का नूर....॥ तेरी गुरु भक्ति और तेरी आनन्द यात्रा, मिलेगी अब कहाँ। प्रवचन करती वाणी और वैय्यावृत्ति तेरी, मिलेगी अब कहाँ। याद आएगी जहाँ-2, आँसू बहेंगे वहाँ.....  गुरुवर तू है जग का नूर..... ॥ जाते हो तो जाओ, पर वापस आने का, इशारा तो करो। इस तरह हमको छोड़कर गुरुवर, बेसहारा न करो-2 बेसहारा न करो, इशारा तो करो-2......... गुरुवर तू है जग का नूर..... ॥ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादाय...

कभी तो ये गुरुवर

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कभी तो ये गुरुवर   कभी तो ये गुरुवर, माँझी बन जाते हैं कभी तो ये गुरुवर, साथी बन जाते हैं अँगुली पकड़ मेरी, ये राह दिखाते हैं तो बोलो न! कभी तो ये गुरुवर माँझी .............. । जो ठुकरा दिया तुमने, हम किससे बोलेंगे दर तेरे खड़े होकर, छुप-छुप के रो लेंगे। मेरे इस जीवन की बस एक तमन्ना है तुम सामने हो मेरे और प्राण निकल जाएं। कभी तो ये गुरुवर..... गुरुदेव की महिमा को हम मिलके गाएंगे इस चातुर्मास को हम सफल बनाएंगे सुनते हैं तेरी रहमत दिन-रात बरसती है एक बूँद जो मिल जाए किस्मत ही बदल जाए। कभी तो ये गुरुवर..... आँखों में बसाया है तुझे दिल से गाया है मेरी हर धड़कन में बस तू ही समाया है ठोकर लगी मुझको, पतवार नोकीला था पर चोट ना आई, गुरुवर ने सम्हाला था। कभी तो ये गुरुवर माँझी ............................. । ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

साधना के रास्ते

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साधना के रास्ते धुन - ए मेरे प्यारे वतन....... साधना के रास्ते, आत्मा के वास्ते, चल रे राही चल। मुक्ति की मंज़िल मिले, शांति के सरसिज खिलें, चल रे राही चल......-2 ज्ञान नहीं, अज्ञान था, जो भटकते रहे हर जनम। छल कपट माया में पड़, करते रहे हम हर करम। राह हो कल्याण की, भवहरण भगवान की, चल रे राही चल.....-2. कौन है अपना यहाँ, किसको पराया हम कहें। एक की आँखों में खुशियां, एक के आंसू बहें। आत्म मंदिर में चलें, ज्योति से ज्योति मिले, चल रे राही चल.......-2 सब यहाँ जीओ जगत में, जल में कमल सी ज़िन्दगी। सत्य शिव सौंदर्य की, करते रहें हम बंदगी। शेष सब निःशेष हो, हृदय का अभिषेक हो, चल रे राही चल........-2  ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

मेरे सर पर रख दो

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मेरे सर पर रख दो  मेरे सर पर रख दो गुरुवर, अपने ये दोनों हाथ। देना है तो दीजिए, जन्म-जन्म का साथ ॥ -2 सुना है अपने शरणागत को, अपने गले लगाते हो। ऐसा मैंने क्या माँगा, जो देने से घबराते हो। चाहे कुछ भी करो हे गुरुवर, बस थामे रहना हाथ। देना है तो दीजिए ........  ग़म की धूप में झुलस रहे हैं, प्यार की छाया कर दे तू। बिन माँझी के नाव चले न, अब पतवार पकड़ ले तू। मेरा रस्ता रोशन कर दो , छाई अंधियारी रात। देना है तो दीजिए........ । भव-भव में हम भटक रहे हैं, अपने गले लगाले तू। जीना था बेकार हमारा, अपनी शरण बुला ले तू। मेरा जीवन सरल बना दो , अब करना न इन्कार। देना है तो दीजिए...... ।  ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

जब कोई नहीं आता

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जब कोई नहीं आता    जब कोई नहीं आता, मेरे गुरुवर आते हैं । मेरे दुःख के दिनों में वो, बड़े काम आते हैं ॥ टेक ॥ वो इतने बड़े होकर, दीनों से प्यार करें । अपने भक्तों को ये, पल में स्वीकार करें । ये बिन बोले सबको, पहचान लेते हैं । जब कोई नहीं आता, ............ । मेरी नैय्या चलती है, पतवार नहीं चलती,  किसी और की अब तो, दरकार नहीं होती। वे डरते नहीं रस्ते, सुनसान आते हैं । जब कोई नहीं आता,.......... । कोई याद करे उनको, दुःख हल्का हो जाए -२ कोई भक्ति करे उनकी, उन जैसा बन जाए । वे  भक्तों का कहना, झट मान जाते हैं । जब कोई नहीं आता, ......... ।   ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

दरश गुरुदेव तेरा

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दरश गुरुदेव तेरा  तर्ज - बता मेरे यार सुदामा रे  दरश गुरुदेव तेरा पाके, मोहे लगे सुहानी छाँव। थारे ढिंग जब जब आया करता, आशीर्वाद मैं पाया करता।  हूँ खुश आशीष तेरा पाके, मोहे .......... जब जब देख्यो तोहे निकट से, मोहे बचावे हर संकट से।  महिमा धन्य भयो गाके, मोहे .......... जन मानस नै गुरु जगावे, रे मानव धर्म सबै सिखलावे।  जनम भयो धन्य तुम्हें पाके, मोहे.......... जब जब होवे दर्शन तेरा, हो जाए धन्य ये जीवन मेरा।  अंखियन की प्यास बुझे जाके, मोहे .......... अब मैं आयो  ठीक बखत पे, प्रवचन दय्यो बैठ तखत पे।  रिमझिम धरम नै बरसा के, मोहे .......  तुमरो साथ मोहे मिल जावै, रे नंगे पाँव चल्यो नहीं जावै।  चरण पकड़ें हम घबरा के, मोहे .......... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

छहढाला(42) पाँचवीं ढाल

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अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत छहढाला(42)  पाँचवीं ढाल भावनाओं के चिंतवन का कारण, उसके अधिकारी और उसका फल मुनि सकलव्रती बड़भागी भव-भोगन तें वैरागी; वैराग्य उपावन माई, चिन्तैं अनुप्रेक्षा भाई ॥१॥ अन्वयार्थ - (भाई) हे भव्य जीव! (सकलव्रती) महाव्रतों के धारक (मुनि) भावलिंगी मुनिराज (बड़भागी) महान पुरूषार्थी हैं, क्योंकि वे (भव-भोगनतैं) संसार और भोगों से (वैरागी) विरक्त होते हैं और (वैराग्य) वीतरागता को (उपावन) उत्पन्न करने के लिये (माई) माता समान (अनुप्रेक्षा) बारह भावनाओं का (चिन्तैं) चिंतवन करते हैं। भावार्थ - पाँच महाव्रतों को धारण करने वाले भावलिंगी मुनिराज महापुरूषार्थवान हैं, क्योंकि वे संसार, शरीर और भोगों से अत्यन्त विरक्त होते हैं और जिस प्रकार कोई माता पुत्र को जन्म देती है, उसी प्रकार यह बारह भावनाएँ वैराग्य उत्पन्न करती हैं; इसलिये मुनिराज इन बारह भावनाओं का चिंतन करते हैं। भावनाओं का फल और मोक्षसुख की प्राप्ति का समय इन चिन्तत सम सुख जागै, जिमि ज्वलन पवन के लागै; जब ही जिय आतम जानै, तब ही जिय शिवसुख ठानै ॥ २ ॥ अन्वयार्थः— (जिमि) जिस प्रकार (पवनके ) वायु के (लागै) लगन...

तू ज्ञान का सागर है

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तू ज्ञान का सागर है  तू ज्ञान का सागर है, आनन्द का सागर है उसी आनन्द के प्यासे हमऽऽऽ। निज ज्ञान सुधा चाखें, -2 प्रभु जी तेरी कृपा से हमऽऽऽ।। -2  तू ज्ञान का सागर है..... -2  विषय भोग में तन्मय होकर, खोया है जीवन वृथा। बात प्रभु तेरी एक न मानी, अपनी ही धुन में रहा -2 जाना है किधर हमको, -2 और आए कहाँ से हमऽऽऽ।। -2 तू ज्ञान का सागर है.....-2 आतम अनुभव अमृत तजकर, पीया विषय जल क्षार। मोह नींद में पागल होकर, किया न तत्व विचार-2 नैया है मेरी मँझधार, इसी से प्रभु को बुलाते हमऽऽऽ। -2  तू ज्ञान का सागर है -2 भूल रहे हैं राह वतन की, भटक रहे मँझधार। भीख मांगते दर दर भ्रमते, घर में भर भण्डार -2 निज धाम हमारा है, जाएं स्वदेश यहाँ से हमऽऽऽ। -2 तू ज्ञान का सागर है -2 ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

वर्द्धमान आरती

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  वर्द्धमानआरती  जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा। वर्द्धमान महावीर वीर अति, जय संकट लेवा। जय सन्मति देवा सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे, त्रिशला के जाये। कुण्डलपुर अवतार लियो प्रभु, सुर नर हर्षाए। जय सन्मति देवा देव इन्द्र जन्माभिषेक कर, उर प्रमोद भरिया। रूप आपका लख नहीं पाए, सहस्र आँख धरिया। जय सन्मति देवा जल में भिन्न कमल ज्यों रहिए, उर में बाल यति। राजपाट एश्वर्य छोड़ कर, ममता मोह हति। जय सन्मति देवा बारह वर्ष छद्मस्थ रूप में, आतम ध्यान किया। घातिकर्म चकचूर चूर प्रभु, केवल ज्ञान लिया। जय सन्मति देवा पावापुर के बीच सरोवर, आकर योग कसे। हने अघातिया कर्म शत्रु तब, शिवपुर जाय बसे। जय सन्मति देवा भूमण्डल के चांदनपुर में, मन्दिर मध्य बसे। शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी, दर्शन पाप नसे। जय सन्मति देवा  नत्थी देवी और कपूरी, आकर शरण गही। दीनदयाला जग प्रतिपाला, आनन्द भरण तुही। जय सन्मति देवा ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों ...

वीतरागी देव तुम्हारे

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 वीतरागी देव तुम्हारे (धुनः कसमें वादे प्यार वफा सब----) वीतरागी देव तुम्हारे, जैसा जग में देव कहाँ। मार्ग बताया है जो जग को, कह न सके कोई और यहाँ।। वीतरागी देव तुम्हारे----- हैं सब द्रव्य स्वतन्त्र जगत में, कोई न किसी का काम करे। अपने अपने स्व चतुष्टय में, सभी द्रव्य विश्राम करें। अपनी अपनी..... -2  अपनी अपनी सहज गुफा में, रहते हैं पर से मौन यहाँ।। वीतरागी देव तुम्हारे----- भाव शुभाशुभ का भी करता, बनता जो दीवाना है। ज्ञायक भाव शुभाशुभ से भी, भिन्न न उसने जाना है। अपने से......-2  अपने से अनजान, तुझे भगवान बताते, देव यहाँ।। वीतरागी देव तुम्हारे----- पुण्य भाव भी ‘पर’ आश्रित हैं, उससे धर्म नहीं होता। ज्ञान भावमय निज परिणति से, बन्धन कर्म नहीं होता। निज आश्रय से.....-2  निज आश्रय से ही मुक्ति है, कहते हैं जिनदेव यहाँ।। वीतरागी देव तुम्हारे----- ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी ...