घर-घर दीप जले
घर-घर दीप जले प्रभु महावीर चले, प्रभु महावीर चले। घर-घर दीप जले, घर-घर दीप जले। राजगद्दी छोड़ी, भूख प्यास तोड़ी। दीन-दुःखियों की तड़पन, मिटाते चले-२ सब ललकार उठे, मेरे महावीर चले। घर-घर दीप..... रात अमावस की थी, चमकी बिजली भी थी। सारी दुनिया जगा के, गगन पे चले-२ उनका जीवन भला, समता रस से भरा महामंत्र अहिंसा का देकर चले-२ आऽ आऽऽ प्रभु गौतम जी कहें, प्रभु पावा से चले-२ घर-घर दीप..... तप-तपते गये, ध्यान अग्नि जले। सारे कर्मों की होली, जलाकर चले-२ धर्म चक्र फिरा, गुन गुनाई सभा। जियो जीने दो नारा, लगाकर चले आऽ आऽऽ इस धरती से उठे, भव बन्धन से छुटे-२ घर-घर दीप..... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद