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मेरे भगवान

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मेरे भगवान (प्रिय शिष्य कैलाश चन्द्र जैन द्वारा रचित) चाल -बहारो फूल बरसाओ (फिल्म सूरज) उठा कर देख लो नजरें मेरे भगवान आये हैं। सिद्धार्थ के दुलारे है, माँ त्रिशला के जाये हैं॥ माँ॥ टेक॥ छवि इनकी निहारूँ मैं, नैन को चैन आता है। बिठा लूँ दिल में इन को मैं, दिल को सुरूर आता है। सफल जीवन ये हो जाता, दरश जिसने भी पाये हैं॥ दरश.....॥१॥ उठा कर देख लो... ये कैसी शान्ति सुना है, देखते मन नहीं भरता, यहाँ पर बैठने के बाद जाने को दिल नहीं करता। जिन्हों केे बैठकर हमने, यहाँ गुणगान गाए हैं। यहाँ...॥२॥ उठा कर देख लो... अहिंसा का जहाँ में आपने डंका बजाया था। जुल्म करना नहीं अच्छा, दिलों में यह बिठाया था, दया का भाव तुम रखना यही सन्देश लाए हैं...यही॥३॥ उठा कर देख लो... अगर उपदेश पर उनके चले ‘कैलाश’ जग सारा, अभय दुनिया में हो जाए रहे कोई न भय मारा, करो धारण अहिंसा को, यही सन्देश लाए हैं। यही...॥४॥ उठा कर देख लो...   । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द...

तेरी सूरत

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तेरी सूरत धुन - मैंने सारे सहारे छोड़ दिए..... दुनियाँ में तेरी सूरत से कहो, बढ़ के कोई सूरत क्या होगी। ऐ वीर! तेरी मूरत से अलग इक, शान्ति की मूरत क्या होगी॥ टेक॥ है राग नहीं और द्वेष नहीं, और क्रोध नहीं जिनके मन में।                है मान नहीं और माया नहीं, और लोभ नहीं जिनके मन में ॥ निर्भय जो बने, हथियार की तो फिर, उनको जरूरत क्या होगी॥१॥ है दृष्टि धरी नासा पे जब, तुमने धारा है पद्माासन। और हाथ पे हाथ रखा तुमने, और किया नहीं कोई साधन॥ मोह कर्म है चकनाचूर किया, इन से बड़ी ताकत क्या होगी॥२॥ जो ध्यान धरे तेरा प्रभु जी, वह तुम सा ही हो जाता है। मिलती है उस को मोक्ष रमा, और अजर अमर पद पाता है॥ ‘शिवराम’ उसे दरकार कहो, संसार की दौलत क्या होगी॥३॥   । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

प्रभु पतित पावन

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  बुधजन कृत - दर्शन पाठ   प्रभु पतित पावन मैं अपावन, चरण आयो शरण जी। यो विरद् आप निहार स्वामी, मेटो जामन मरन जी ॥ तुम ना पिछान्यो आन मान्यो, देव विविध प्रकार जी। या बुद्धि सेती निज न जान्यो, भ्रम गिन्यो हितकार जी ॥१॥ भव विकट बन में करम बैरी, ज्ञानधन मेरो हरयो । तब इष्ट भूल्यो भ्रष्ट होय, अनिष्ट गति धरतो फिरयो ॥ धन घड़ी यों धन दिवस योही, धन जन्म मेरो भयो । अब भाग मेरो उदय आयो, दरश प्रभुजी की लख लयो ॥२॥ छवि वीतरागी नगन मुद्रा, दृष्टि नासा पै धरै। वसु प्रातिहार्य अनन्त गुणयुत, कोटि रवि छवि को हरै ॥ मिट गयो तिमिर मिथ्यात्व मेरो, उदय रवि आतम भयो । मो उर हरष ऐसो भयो, मनु रङ्क चिन्तामणि लयो ॥३॥ मैं हाथ जोड़ नवाय मस्तक, बीनऊँ तुम चरण जी । सर्वोत्कृष्ट त्रिलोक पति जिन, सुनहु तारन तरन जी ॥ जाँचूं नहीं सुर वास पुनि, नर राज परिजन साथ जी । ‘बुध’ जाँचहूँ तुम भक्ति भवभव, दीजिये शिवनाथ जी ॥४॥ ( फिर लाई हुई प्रासुक सामग्री के अनुसार नीचे लिखे छन्द पढ़ कर पुंज चढ़ावे । ) चावल चढ़ाने का मंत्र तन्दुल धवल पवित्र अति, नाम सुअक्षत तास । अक्षत सों प्रभु पूजिये, अक्षय गुणप्रकाश ॥ ॐ ह्रीं देवशास्त्रगुरुभ्यो...

हे वीर तुम्हारे

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हे वीर तुम्हारे  हे वीर तुम्हारे द्वारे पर एक दरश भिखारी आया है । प्रभु दर्शन भिक्षा पाने को दो नयन कटोरे लाया है ॥ १ नहीं दुनियाँ में कोई मेरा है आफत ने मुझ को घेरा है । अब एक सहारा तेरा है जगने मुझ को ठुकराया है ॥ २ धन दौलत की कुछ चाह नहीं घरबार छुटे परवाह नहीं । मेरी इच्छा है तेरे दर्शन की दुनियाँ से चित घबराया है ॥ ३ मेरी बीच भूँवर में नैया है, प्रभु तू ही एक खिवैया है । लाखों को ज्ञान सिखा तुमने भवसिंधु से पार लगाया है ॥ ४ आपस में प्रीति व प्रेम नहीं, और तुम बिन हमको चैन नहीं । अब तुम ही आकर दर्शन दो 'त्रिलोकी'नाथ अकुलाया है ॥ ५ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

महावीर प्यारे

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महावीर प्यारे महर की नजर कर, महावीर प्यारे । दर्श अपना हमको दिखा वीर प्यारे ॥ टेक सुनाया था जो ज्ञान, गौतम ऋषि को । वही ज्ञान हमको, सुना वीर प्यारे ॥ १ तिराया था अंजन से, पापी को तुमने । हमें भी तिराओ, महावीर प्यारे ॥ २ जो लड़ती परस्पर हैं, सन्तान तेरी । इन्हें “प्रेम” करना, सिखा वीर प्यारे ॥ ३ गफलत में सोये, सभी हिन्द वासी । इन्हें शीघ्र आकर, जगा वीर प्यारे ॥ ४ जैन कौम पीछे हटी जा रही है । इसे उन्नति पर, लगा वीर प्यारे ॥ ५ करें अर्ज “केवल” सुनो हे दयामय । हमें पास अपने बुला वीर प्यारे ॥ ६    । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

प्रभु दर्श कर

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प्रभु दर्श कर ( चलते समय ) प्रभु दर्श कर आज घर जा रहे हैं । झुका तेरे चरणों में सर जा रहे हैं ॥ टेक यहाँ से कभी दिल न जाने को करता । करें कैसे जाये बिना भी न सरता । अगरचे हृदय नैन भर आ रहे हैं ॥ हुई पूजा भक्ती न कुछ सेव काई । न मन्दिर में बहुमूल्य वस्तु चढ़ाई । यह खाली फकत जोर कर जा रहे हैं ॥ सुना तुमने तारे अधम चोर पापी । न धर्मी सही फिर भी तेरे हैं हामी । हमें भी तो करना पार जा रहे हैं ॥ बुलाना यहां फिर भी दर्शन को अपने । सुमत तुम भरोसे लगें कर्म हरने । जरा लेते रहना खबर जा रहे हैं ॥ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

तेरी शरण

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तेरी शरण प्रभु वीर तेरी शरण में हैं आए, चौरासी में धक्के जी हमने हैं खाए॥ टेक॥ लिया आज हमने तुम्हारा सहारा, प्रभु आप तारण तरण एक पाए॥ १॥ सिवा तेरे कोई न ऐसा खिवैया, जो नैया हमारी किनारे लगाए॥ २॥ परम वीतरागी अगरचे हैं स्वामी, मगर फिर भी सङ्कट हरण हैं कहाए॥ ३॥ हैं तारे हज़ारों अधम नीच तुमने, पशु पक्षियों के हैं कष्ट मिटाए॥ ४॥ तुम्हें जो कि ध्यावे वो बन जाये तुमसा, न शिवराम फिर क्यों तेरे गुण ये गाए॥ ५॥   ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

वीर भक्ति

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  वीर भक्ति    ( तर्ज—रे पंछी बावरिया )  क्यों ना ध्यान लगाये, वीर से बावरिया ।  जाना देश पराये, झमेला दो दिन का ॥ टेक ॥  जीवन तेरा है एक सपना, इस दुनियाँ में कोई न अपना ।  हंस अकेला जाये वीर से० ॥ १ ॥  माता, बहना, चाची, ताई, पिता, पुत्र और भाई जमाई ।  मतलब से प्रीति लगाये वीर से० ॥ २ ॥  जो हैं तुझको सबसे प्यारे, मृतक देख तुझसे हों न्यारे ।  कोई सङ्ग न जाय, वीर से बावरिया ॥ ३ ॥  जिस तन को तू खूब सजाये, आखिर में कुछ काम न आये ।  फिर पीछे पछताय, वीर से बावरिया ॥ ४ ॥  जिस माया पर तू इतरावे, आखिर में कुछ काम न आवे ।  वहीं पड़ी रह जाये, वीर से बावरिया ॥ ५ ॥  धर्म ही आखिर काम में आवे, हर दम तेरा साथ निभावे ।  “त्रिलोकीनाथ” समझाये, वीर से बावरिया ॥ ६ ॥ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-...

मेरी भावना (बा० न्यायमत सिंह जैन )

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मेरी भावना (बा० न्यायमत सिंह जैन - रचियता सती कमल श्री नाटक से ली गई) (चाल) मेरे मौला बुलाले मदीने मुझे ॥ स्वामी चरणों का तेरे सहारा मुझे । केवल तेरा ही शरणा गवारा मुझे - टेक तू न रागी है न द्वेषी, है कि अविनाशी है तू । विश्व का ज्ञाता द्रष्टा, जग हितोपदेशी है तू ॥ अपने दर्शन का देना नज़ारा मुझे ।। टेक वीर पारस हर हरि. ब्रह्मा कि बुद्ध अर्हन्त राम । या तुझे स्वाधीन कह दूँ, हैं हजारों तेरे नाम                                                       जिन में हर इक है प्यारे से प्यारा मुझे ॥ टेक                                                    जिन को विषयों की न आशा, है न दिल में राग है । स्वार्थ माया लोभ क्रोध अभिमान, का भी त्याग है ॥ ऐसे ऋषियों की सेवा है प्यारा मुझे-टेक झूठ चोरी ईर्ष्या हिंसा, से हूँ हर वक्त दूर । शील सन्तोष और ...

आत्मा का स्वभाव

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आत्मा का स्वभाव मैं ज्ञानानन्द स्वभावी हूँ-टेक मैं हूँ अपने में स्वयं पूर्ण, पर की मुझ में कुछ गन्ध नहीं । मैं अरस अरूपी अस्पर्शी, पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं ॥ मैं राग राग से भिन्न भेद से, भी मैं भिन्न निराला हूँ । मैं हूँ अखण्ड चैतन्य पिंड, निज रस में रमने वाला ॥ मैं ही मेरा कर्ता-धर्ता, मुझ में पर का कुछ काम नहीं । मैं मुझ में रहने वाला हूँ, पर में मेरा विश्राम नहीं ॥ मैं शुद्ध बुद्ध अविरुद्ध एक, पर परिणति से अप्रभावी हूँ । आत्मानुभूति से प्राप्त तत्व, मैं ज्ञानानन्द स्वभावी हूँ ॥ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

कर्मों के बंधन तोड़ो -6 परिग्रह

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  कर्मों के बंधन तोड़ो -6 परिग्रह माया का जाल!! कमरे का दृश्य -  कमरा कीमती सामानों, सजावटी शो-पीस और अलमारियों से भरा हुआ है। दूसरी ओर घर का शांत कोना पात्र - सुरेश, नीता, रोहन, आनंद भाई, सूत्रधार सूत्रधार -  कर्मों के बंधन तोड़ो  जिनवर से नाता जोड़ो। धर्म प्रेमियों! आपस में प्रेम करो, धर्म प्रेमियों! आज हम आपको एक प्रेरणादायक लघु नाटिका दिखाने जा रहे हैं - माया का जाल!! यहाँ ‘परिग्रह’ अर्थात् आवश्यकता से अधिक संचय करना और भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह रखने के विषय पर एक सरल और विचारोत्तेजक लघु नाटिका प्रस्तुत है। नाटक का नाम है - माया का जाल। आइए हम आपको कर्म-बंधन का लेखा-जोखा समझाते हैं और पात्रों का परिचय देते हैं। (पात्र परिचय - एक-एक पात्र मंच पर आता है और हाथ जोड़ता हुआ दूसरी ओर चला जाता है।) ये हैं - सुरेश (उम्र 40) - एक धनवान व्यक्ति, जो हमेशा और अधिक कमाने और चीजों को इकट्ठा करने में लगा रहता है। नीता (उम्र 35) - सुरेश की पत्नी, जो दिखावे और संग्रह से परेशान है। रोहन (उम्र 14) - सुरेश और नीता का बेटा, जो गैजेट्स और खिलौनों में उलझा रहता है।  आनंद भाई (उम्र 65...

कर्मों के बंधन तोड़ो -5 कुशील

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 कर्मों के बंधन तोड़ो -5 कुशील शीलवान की विजय!! सूत्रधार -  कर्मों के बंधन तोड़ो  जिनवर से नाता जोड़ो। धर्म प्रेमियों! आपस में प्रेम करो, धर्म प्रेमियों! आज हम आपको एक प्रेरणादायक लघु नाटिका दिखाने जा रहे हैं - शीलवान की विजय!!  आइए हम आपको कर्म-बंधन का लेखा-जोखा समझाते हैं और पात्रों का परिचय देते हैं। (पात्र परिचय - एक-एक पात्र मंच पर आता है और हाथ जोड़ता हुआ दूसरी ओर चला जाता है।) ये हैं - पात्र- सत्यवान (शीलवान)- एक सीधा-साधा, ईमानदार और सदाचारी व्यक्ति। दौलत राम - भ्रष्ट और चालाक व्यापारी। मदन - दौलत राम का चापलूस साथी। सतीश - एक बेरोजगार युवा। दो पुलिस के सिपाही।                                                                                                                    ...

कर्मों के बंधन तोड़ो -4 चोरी

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 कर्मों के बंधन तोड़ो -4 चोरी सरिता जैन, हिसार द्वारा रचित सुन्दर नाटिका लालच का परिणाम!! कक्षा के कमरे का दृश्य -  1 ब्लैक बोर्ड, 1 कुर्सी, 1 मेज, दरी, मेज पर घड़ी, पैन, किताब, चॉक, डस्टर। पात्र - गुरुजी, जीवन कुमार, अस्तेय, सत्यव्रत, पवित्रा (लड़की)  सूत्रधार -   कर्मों के बंधन तोड़ो  जिनवर से नाता जोड़ो। धर्म प्रेमियों! आपस में प्रेम करो, धर्म प्रेमियों! आज हम आपको एक प्रेरणादायक लघु नाटिका दिखाने जा रहे हैं - लालच का परिणाम!!  आइए हम आपको कर्म-बंधन का लेखा-जोखा समझाते हैं और पात्रों का परिचय देते हैं। (पात्र परिचय - एक-एक पात्र मंच पर आता है और हाथ जोड़ता हुआ दूसरी ओर चला जाता है।) ये हैं - गुरु जी - सफेद धोती, कुर्ता, जैकेट, टोपी हाथ में रजिस्टर लेकर आता है अस्तेय- हाथ में स्कूल बैग, ब्राउन पैंट, सफेद कमीज पहनकर आता है  जीवन कुमार - हाथ में स्कूल बैग, सफेद पैंट, सफेद कमीज पहनकर आता है  सत्यव्रत - हाथ में स्कूल बैग,  सफेद पैंट, हल्की नीली कमीज पहनकर आती है पवित्रा - हाथ में स्कूल बैग,  सफेद सलवार - हल्की गुलाबी कमीज पहनकर आती है कक्षा के...

कर्मों के बंधन तोड़ो -3 झूठ

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  कर्मों के बंधन तोड़ो -3 झूठ सरिता जैन, हिसार द्वारा रचित सुन्दर नाटिका सच्चे का बोलबाला!! कक्षा के कमरे का दृश्य -   1 ब्लैक बोर्ड, 1 कुर्सी, 1 मेज, दरी, मेज पर घड़ी, पैन, किताब, चॉक, डस्टर। पात्र - गुरुजी, सम्यक, जीवन कुमार, सत्येन्द्र, अनीता (लड़की)    सूत्रधार -  कर्मों के बंधन तोड़ो  जिनवर से नाता जोड़ो। धर्म प्रेमियों! आपस में प्रेम करो, धर्म प्रेमियों! आज हम आपको एक प्रेरणादायक लघु नाटिका दिखाने जा रहे हैं - सच्चे का बोलबाला!! आइए! हम आपको कर्म-बंधन का लेखा-जोखा समझाते हैं और पात्रों का परिचय देते हैं। (पात्र परिचय - एक-एक पात्र मंच पर आता है और हाथ जोड़ता हुआ दूसरी ओर चला जाता है।) ये हैं - गुरु जी - सफेद धोती, कुर्ता, जैकेट, टोपी हाथ में रजिस्टर लेकर आता है सम्यक - हाथ में स्कूल बैग, ब्राउन पैंट, सफेद कमीज पहनकर आता है । सम्यक के बैग में एक चाॅक का डिब्बा है।  जीवन कुमार - हाथ में स्कूल बैग, सफेद पैंट, सफेद कमीज पहनकर आता है   सत्येन्द्र - हाथ में स्कूल बैग, काली पैंट, हल्की नीली कमीज पहनकर आती है अनीता - हाथ में स्कूल बैग,  सफेद स...