Posts

जिया राग भाव

Image
भजन - जिया राग भाव  (चाल - सोरठ - अधिक सरूप रूप का दिया न जागा मोल) जिया राग भाव दुखदाई, राग को मन से हटाओ जी मन से हटाओ जी, राग को मन से हटाओ जी - टेक है राग निमित संसार करम का मूल बताओ जी जो चाहो हो परमानन्द भाव वैराग बनाओ जी - टेक  यह राग चिकट सम जान भूल इस रस्ते न जावो जी लग जावेगी कर्मों की धूल ज्ञान दामन को बचावो जी - टेक अब पर परिणति को छोड़ ध्यान आपे में जमावो जी न्यामत तजराग अरु द्वेष सदा आतम गुण गावो जी - टेक । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद  

ये व्यर्थ नर

Image
 **भजन** - ये व्यर्थ नर *(चाल—ये जिन्दगी उसी की है जो किसी का हो गया)* ये व्यर्थ नर जन्म तेरा, इस जगत में हो गया,  भोग ही में खो गया ....... है अमोल ये रतन नर जनम जहान में,  है भोग कांच के समान, जान ले तू ज्ञान में --- क्यों काँच बदले खो रहा, मूढ़ ये रतन महान—टेक  है विषय में सुख नहीं, दुःख ही महान है,  सरसों समान सुख अगर, तो कष्ट मेरु मान है,  भोगों में चित्त न लगा, जो चाहता है निज भला—टेक  हाथी व मीन और भ्रमर, तथा पतंग और हिरण,  एक एक विषय के वश, इनका हुआ है मरण,  पाँचों के जो वश भये, भगवान उनकी क्या दशा—टेक । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

महावीर बाबा

Image
 **भजन** -  महावीर बाबा   महावीर बाबा, तू दर्श दिखाजा, तू गले से लगाजा,  तू बिगड़ी बना जा, अपने दास की,  पड़े हैं भिखारी तेरे द्वार पर—टेक  अर्ज़ करी है भगवन, मर्जी है तेरी, आओगे या न आओ , अर्ज़ी पर मर्जी दिखाजा प्रभु जी, आकर दर्श दिखा जाओ,  चांदनपुर के, महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक  बाबा ना मांगू तुम से सोना या चांदी, धन दौलत भी न मांगू , भीख दया की तू दे दे रे बाबा, भीक दया की मैं मांगू , चांदनपुर के महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक  नाव पड़ी है भगवान बीच भंवर में, पार लगा या ठुकरा दे,  आकर पड़े हैं भगवन तेरी शरण में, अपना ले या ठुकरा दे, चांदनपुर के महावीर स्वामी, आकर दर्श दिखाजा—टेक ---  । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

स्तवन रत्न - गौतम स्वामी

Image
स्तवन रत्न गौतम स्वामी, महावीर प्रभु के प्रथम शिष्य थे। उन्हें प्रभु के प्रति बहुत राग था। प्रभु का विरह उनसे सहन नहीं होता था। अपने निर्वाण का समय नज़दीक आया जानकर,प्रभु महावीर ने गौतम स्वामी के लिए एक युक्ति की। उन्होंने गौतम स्वामी को आज्ञा दी कि पास के गाँव में जाकर एक श्रावक को धर्म उपदेश देकर आओ। भगवान की आज्ञा गौतम स्वामी के लिए ब्रह्मवाक्य जैसी थी, आज्ञा मिलते ही वे प्रसन्न चित्त से श्रावक के घर जाने के लिए निकल पड़े। वे बस आधे रास्ते ही पहुँचे होंगे कि तभी भगवान महावीर के निर्वाण की आकाशवाणी हुई। यह सुनकर गौतम स्वामी को बहुत आघात लगा कि सब कुछ जानते हुए भी प्रभु ने अंत समय मुझे उनसे दूर कर दिया! भगवान ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? क्यों? क्यों?.... गौतम स्वामी सोच में पड़ गए। और विचार शृंखला आगे बढ़ी तो उनकी दृष्टि भगवान पर से हटकर खुद पर पड़ी। विचारों की शृंखला ने अपनी काया पलटी... "अरे रे! मेरी भूल हो गई! मैंने भगवान के लिए कैसा गलत सोचा! मुझे भगवान के लिए राग है लेकिन भगवान तो वीतराग हैं। भगवान को किसी के साथ राग-द्वेष नहीं होता। भगवान तो अत्यंत करुणा वाले हैं, वीतराग हैं...

प्यारी दुनिया है

Image
भजन- प्यारी दुनिया है चाल — (कवाली) कोई चतुर ऐसी सखी न मिली प्यारी दुनिया है सागर दु:खों से भरा या में सुख कहीं आता नजर ही नहीं या में मोह का जाल पड़ा है सती या में जीव फंसे हों खबर ही नहीं ॥टेक॥ कौन माता पिता कौन बन्धु सुता कैसे भाई बहिन कैसे दारा पति इस दुनिया के नाते हैं झूठे सभी सच पूछो तो रहने का घर ही नहीं ॥टेक॥ नदी नाव संजोग से आके मिले जैसे पेड़ पे पंखी बसेरा करे जब भोर भई सब बिछड़ के चले संग चलने का कोई ज़िकर ही नहीं ॥टेक॥ रानी स्वारथ की सारी है दुनिया लखो या में भूल के कोई न नेह करो सूखे दरिया पे नर पशु पंछी कोई देखो करता है आके गुजर ही नहीं ॥टेक॥ चाहे फौज प्यादे हजारों रहो चाहे महल किले में जा बंद करो चाहे जंतर मंतर लाखों पढ़ो मौत टारी किसी से भी टरती नहीं ॥टेक॥ धन दौलत राज खजाना सभी कोई अन्त समय काम आवे नहीं आ मुसीबत में कोई सहाई करे ऐसा कोई भी सुर या असुर ही नहीं ॥टेक॥ ऐसा जान के प्यारी विचार करो दु:ख शोक तजो समता को भजो मोह माया को मन सेती दूर करो मोह करने का अच्छा समर ही नहीं ॥ जिन राज भजो मन धीर धरो तप सयंम शील सिंगार करो धर ध्यान निज आतम कर्म हरो बिन धर्म के होगा ग...

तोरा मन दर्पण

Image
तोरा मन दर्पण   तोरा मन दर्पण कहलाए -2 भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाए -टेक मन ही देवता मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय  मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय  इस उजले दर्पण पर प्राणी, धूल न जमने पाये—टेक  सुख की कलियां दुख के कांटे मन सब का आधार  मन से कोई बात छुपे ना मन के नयन हज़ार  जग से चाहे भाग ले कोई, मन से भाग न पाये  तन की दौलत ढलती छाया, मन का धन अनमोल  तन के कारण मन के धन को मत माटी में रोल  मन की कदर भुलाने वाला हीरा जन्म गवांये—टेक ---  । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

भेष दिगम्बर धार

Image
भेष दिगम्बर धार भेष दिगम्बर धार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 ले के हर्ष अपार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 पंच महाव्रत जामा सजाया, दसलक्षण का सेहरा बंधाया। -2 चारित्र रथ हो सवार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 बारह भावना संग बाराती। समिति गुप्ति सब हिल मिल गाती। -2 हर्ष से मंगलाचार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 राग-द्वेष आतिशबाजी छूटी। क्रोध-कषाय की लड़ियाँ टूटी।-2 दमका पायल झंकार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 शुक्ल ध्यान की अग्नि जलाकर, होम किया निज कर्म खपा कर। तप तेरा यशगान , चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 शुभ बेला शिव रमणी वरेंगे, मुक्ति महल में प्रवेश करेंगे। गूंजेगी ध्वनि जयकार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 भेष दिगम्बर धार, चले हैं शिव रमणी वरने।  भेष दिगम्बर धार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत ...