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पुकारे आज तुझे

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पुकारे आज तुझे  (तर्ज - ओहरे ताल मिले...) पुकारे आज तुझे तेरी आत्मा, तुझको जगाये रे, भूल गया तू पथ अपना, बोध कराये  रे, पुकारे...... आहुति कितने जन्म की, भोगों में दे दिया -2 पुण्यों का ये फल नरतन, विषयों में खो दिया ओ मितवा सुन.... पिंजरे का पंछी बन गई, तेरी  ये आत्मा। पुकारे...... कितने जन्मों की भटकन, सहती ये आत्मा -2 अपने बाबुल घर जाने, तरसे ये आत्मा -2 ओ मितवा सुन..... कर्मों के जाल को तोड़ो, कहे आत्मा। पुकारे..... पारे के जैसे चमकती, उज्ज्वल थी आत्मा -2 जल-जल कर राग-द्वेष में, विकृत हुई आत्मा -2 ओ मितवा सुन..... संवर से कर्मों को रोको, कहे आत्मा। पुकारे..... नामुमकिन मुमकिन बनता, मुमकिन आसान रे तेरी संगत में सीखा, कुछ संयम ध्यान रे। ओ गुरुवर रे...... तेरे चरण न छूटे, कहे आत्मा। पुकारे..... ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और...