तुम रूठे रहो भगवन
तुम रूठे रहो भगवन तुम रूठे रहो भगवन, हम तुमको मना लेंगे, आहों में असर होगा, यहीं बैठे बुला लेंगे। तुम कहते कहाँ बैठूँ, तेरे पास ना आसन है, मैं कहता आ भी जाओ, पलकों पे बिठा लेंगे, आहों ___________ । तुम देख लो आ कर के, लगी आग जुदाई की, ये अश्रु प्रेम ढलके, लगी आग बुझा देंगे, आहों ___________ । अपनाते हमें तुम ना, इसकी ना ज़रा चिंता, हम बात के पक्के हैं, अपना ही बना लेंगे, आहों ___________ । हाथ पकड़ के छोड़ूँ ना, हे वीर कभी तेरा, अब हम तुमको भगवन, ऐसे ही रिझा लेंगे, आहों ___________ । ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा - सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद