छहढाला(8)
अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत छहढाला(8) (सुबोध टीका) पहली ढाल का भेद-संग्रह एकेन्द्रिय - पृथ्वीकायिक जीव, जलकायिक जीव, अग्निकायिक जीव, वायुकायिक जीव, वनस्पतिकायिक जीव । गति :- मनुष्यगति, तिर्यंचगति, देवगति और नरकगति । जीव :- संसारी और मुक्त । त्रस :- द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय और पंचेन्द्रिय । देव :- भवनवासी, व्यन्तर, ज्योतिषी और वैमानिक । पंचेन्द्रिय :- संज्ञी और असंज्ञी । योग :- मन, वचन और काय; अथवा द्रव्य और भाव । लोक :- ऊर्ध्व, मध्य, अधो । वनस्पति :- साधारण और प्रत्येक । वैमानिक देव - कल्पोत्पन्न, कल्पातीत । संसारी - त्रस और स्थावर; अथवा एकेन्द्रिय (स्थावर), द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय और पंचेन्द्रिय (त्रस) । पहली ढाल का लक्षण-संग्रह अकामनिर्जरा - सहन करने की अनिच्छा होने पर भी जीव रोग, क्षुधादि सहन करता है। तीव्र कर्मोदय में युक्त न होकर जीव पुरुषार्थ द्वारा मंदकषाय रूप परिणमित हो, वह है अकामनिर्जरा । अग्निकायिक - अग्नि ही जिसका शरीर होता है, ऐसा जीव। असंज्ञी - शिक्षा और उपदेश ग्रहण क...