आत्मा का स्वभाव
आत्मा का स्वभाव मैं ज्ञानानन्द स्वभावी हूँ-टेक मैं हूँ अपने में स्वयं पूर्ण, पर की मुझ में कुछ गन्ध नहीं । मैं अरस अरूपी अस्पर्शी, पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं ॥ मैं राग राग से भिन्न भेद से, भी मैं भिन्न निराला हूँ । मैं हूँ अखण्ड चैतन्य पिंड, निज रस में रमने वाला ॥ मैं ही मेरा कर्ता-धर्ता, मुझ में पर का कुछ काम नहीं । मैं मुझ में रहने वाला हूँ, पर में मेरा विश्राम नहीं ॥ मैं शुद्ध बुद्ध अविरुद्ध एक, पर परिणति से अप्रभावी हूँ । आत्मानुभूति से प्राप्त तत्व, मैं ज्ञानानन्द स्वभावी हूँ ॥ ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद