कर्मों के बंधन तोड़ो -5 कुशील
कर्मों के बंधन तोड़ो -5 कुशील शीलवान की विजय!! सूत्रधार - कर्मों के बंधन तोड़ो जिनवर से नाता जोड़ो। धर्म प्रेमियों! आपस में प्रेम करो, धर्म प्रेमियों! आज हम आपको एक प्रेरणादायक लघु नाटिका दिखाने जा रहे हैं - शीलवान की विजय!! आइए हम आपको कर्म-बंधन का लेखा-जोखा समझाते हैं और पात्रों का परिचय देते हैं। (पात्र परिचय - एक-एक पात्र मंच पर आता है और हाथ जोड़ता हुआ दूसरी ओर चला जाता है।) ये हैं - पात्र- सत्यवान (शीलवान)- एक सीधा-साधा, ईमानदार और सदाचारी व्यक्ति। दौलत राम - भ्रष्ट और चालाक व्यापारी। मदन - दौलत राम का चापलूस साथी। सतीश - एक बेरोजगार युवा। दो पुलिस के सिपाही सूत्रधार - जो कहानी को आगे बढ़ाएगा। मंच के आधे भाग में दृश्य 1 (मंच पर एक मेज और दो कुर्सियाँ लगी हैं। दौलत राम और मदन बैठे हैं।) दौलत राम - (हँसते हुए) मदन! इस शहर में ईमानदारी की दुकान नहीं चलती। आजकल बेईमानी ही असल में सबसे बड़ा मुनाफा है। मदन- बिल्कुल सही कहा सेठ जी! लेकिन यह सत्यवान बड़ा अजीब इंसान है। सारा शहर हमारे कदमों में झुकता है, पर वह सत्यवान है कि अपनी ईमानदारी का झंडा गाड़े बैठा है। दौलत राम - ...