भेष दिगम्बर धार
भेष दिगम्बर धार भेष दिगम्बर धार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 ले के हर्ष अपार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 पंच महाव्रत जामा सजाया, दसलक्षण का सेहरा बंधाया। -2 चारित्र रथ हो सवार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 बारह भावना संग बाराती। समिति गुप्ति सब हिल मिल गाती। -2 हर्ष से मंगलाचार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 राग-द्वेष आतिशबाजी छूटी। क्रोध-कषाय की लड़ियाँ टूटी।-2 दमका पायल झंकार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 शुक्ल ध्यान की अग्नि जलाकर, होम किया निज कर्म खपा कर। तप तेरा यशगान , चले हैं मुनि दूल्हा बन के ।। भेष दिगम्बर धार,-2 शुभ बेला शिव रमणी वरेंगे, मुक्ति महल में प्रवेश करेंगे। गूंजेगी ध्वनि जयकार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 भेष दिगम्बर धार, चले हैं शिव रमणी वरने। भेष दिगम्बर धार, चले हैं मुनि दूल्हा बन के। -2 । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत ...