अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत छहढाला(32) तीसरी ढालका भेद-संग्रह अचेतन द्रव्य :- पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल । चेतन एक, अचेतन पाँचों, रहे सदा गुण-पर्ययवान, केवल पुद्गल रूपवान है, पाँचों शेष अरूपी जान । अन्तरंग परिग्रह :- १ मिथ्यात्व, ४ कषाय, ९ नोकषाय । आस्त्रव :- ५ मिथ्यात्व, १२ अविरति, २५ कषाय, १५ योग । कारण :- उपादान और निमित्त द्रव्यकर्म :- ज्ञानावरणादि आठ नोकर्म :- औदारिक, वैक्रियिक और आहारकादि शरीर परिग्रह :- अन्तरंग और बहिरंग प्रमाद :- ४ विकथा, ४ कषाय, ५ इन्द्रिय, १ निद्रा, १ प्रणय ( स्नेह ) । बहिरंग परिग्रह :- क्षेत्र, मकान, सोना, चाँदी, धन, धान्य, दासी, दास, वस्त्र और बरतन - यह दस हैं। भावकर्मः- मिथ्यात्व, राग, द्वेष, क्रोधादि । मदः- आठ प्रकार के हैंः- जाति, लाभ, कुल, रूप, तप, बल, विद्या, अधिकार; इनको गर्व न कीजिये, ये मद अष्ट प्रकार । मिथ्यात्वः- विपरीत, एकान्त, विनय, संशय और अज्ञान । रसः- खारा, खट्टा, मीठा, कड़वा, चरपरा और कषायला । रूपः- ( रंग ) - काला, पीला, हरा, लाल और सफेद- यह पाँच रूप हैं । स्पर्शः- हलका, भारी, रूखा, चिकना, कड़ा, कोमल, ठण्डा, गर्म- यह आठ स्पर्श...