मेरी भावना (29) गुणी जनों में प्रमोद भाव

 मेरी भावना (29) गुणी जनों में प्रमोद भाव 

(परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों से उद्धृत)

आदिनाथ भगवान की जय 

मेरी भावना को अपनी भावना बनाएं

पिछली बार आपको बताया था कि हमें अच्छा जीवन जीने के लिए कुछ अच्छी भावनाओं की आवश्यकता होती है। जैसा तीर्थकरों व गणधरों के द्वारा बताया गया, वैसा ही ऋषियों व मुनियों के द्वारा हमें बताया गया है। इन भावनाओं के क्रम में हमने तीन भावनाओं के बारे में अब तक बताया था। एक है मैत्री की भावना, दूसरी है करुणा की भावना और तीसरी है माध्यस्थ भावना।

चौथी भावना जो बची थी उसी का व्याख्यान आगे किया जाना है।

‘मेरी भावना’ का पाठ सभी लोग करते होंगे, लेकिन शायद उन्हें यह ज्ञात न हो कि इसमें जिन चार भावनाओं का वर्णन किया गया है, आचार्यों ने वे चार भावनाएँ अपने सिद्धान्त ग्रंथ में और ध्यान ग्रंथ लिखी हुई हैं। ध्यान करने से पहले इस तरह की भावनाओं को अति आवश्यक बताया गया है, क्योंकि उसके बिना आपका मन कभी पवित्र नहीं हो सकता। जिन लोगों को कभी अपना मन शांत करने की इच्छा हो या ध्यान में बैठने के लिए अपने मन की तैयारी करना हो, तो वे लोग भी आराम से ये ‘मेरी भावना’ की जो चार भावनाएं हैं, इनका अपने मन में चिंतन ला सकते हैं। जब हमें संस्कृत ज्ञान में नहीं आती, तो हिंदी में भी हम इन भावनाओं को पढ़ सकते हैं। तो यहां लिखा हुआ है -

गुणी जनों को देख हृदय में, मेरे प्रेम उमड़ आवे। 

बने जहां तक उनकी सेवा, करके यह मन सुख पावे।। 

होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं, द्रोह न मेरे उर आवे।

गुण ग्रहण का भाव रहे नित, दृष्टि न दोषों पर जावे।।

ये इतने अच्छे भाव हमारे व्यवहारिक जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं। चौथी भावना है - गुणिषु प्रमोदम् अर्थात् गुणी जनों में प्रमोद भाव रखना। यानि 

गुणी जनों को देख हृदय में, मेरे प्रेम उमड़ आवे। 

यहाँ मेरे का अर्थ है - जो भी इसे पढ़ रहे हैं उनके लिए और जो इसे सुन रहे हैं, उनके लिए, हर उस आत्मा के लिए, जो अपने अंदर गुणों को ग्रहण करना चाहता है, उसे भाव करना ही होता है कि मेरे अंदर गुणों के प्रति एक Respect का भाव कैसे आएगा? तो वह तभी आएगा, जब हम गुणी जनों का Respect करेंगे। क्योंकि गुण कहाँ मिलेंगे? कहीं बाज़ार में तो नहीं मिलेंगे। आपके घरों में तो नहीं मिलेंगे। किचन रूम में तो नहीं मिलेंगे। गुण कहां मिलेंगे? किसी न किसी गुणवान व्यक्ति में ही तो गुण मिलेंगे। तो गुणवान व्यक्तियों को देखकर मन में क्या भाव आना चाहिए? उनके प्रति एक प्रमोद का भाव आ जाना, मुदित हो जाना, चेहरा खिल जाना और उनके प्रति एक आदर भाव से उन गुणों को ग्रहण करने का भाव करना; यह कहलाता है - गुणी जनों के प्रति प्रेम भाव। 

प्रेम का मतलब गले लगाना ही नहीं होता है। यह तो अपनी Culture में है ही नहीं कि अगर किसी से प्रेम उमड़ा हो, तो उसको गले लगाया जाए। प्रेम का मतलब प्रमोद भाव है यहां पर और प्रमोद का मतलब होता है कि जैसे ही हमें कोई गुणी व्यक्ति दिखाई दे, तो उनको देखकर हमारा चेहरा खिल जाए। भले ही हम परेशानी में हों, भले ही हमारे मन में कुछ भी चल रहा हो, भले ही हमारा मन किसी भी तरीके से किसी भी प्रकार की उलझन में पड़ा हुआ हो, लेकिन आपके मन में यह भाव रहना चाहिए कि अगर हमें कभी गुणी व्यक्ति का दर्शन हो जाए, तो हम उसको देखकर सब परेशानियाँ भूल जाएं और हमारे चेहरे पर अपने आप एक अच्छी-सी, प्यारी-सी मुस्कुराहट आ जाए। 

क्या ऐसा हो पाता है कि अगर हम गुस्से में हैं, और हमारे सामने गुणवान व्यक्ति भी आ गए, तो भी हम वैसा ही मुंह बनाए रहें, जैसा बनाए हुए थे? ऐसा भी तो होता है। आप कह देते हो कि हमारा मूड ठीक नहीं है। बहुत से बच्चे ऐसे भी होते हैं कि जिनके मम्मी पापा कहते हैं - चलो बेटा! दर्शन करने के लिए चलना है। तो आप कह देते हो कि हमारा Mood नहीं है। हमें नहीं चलना है। आप को जाना है तो जाइए। अगर आपके सामने कोई गुणवान व्यक्ति आ जाए, तो वे भी तो यही बात बोल सकते हैं कि आज मेरा Mood ठीक नहीं है। आज आप क्यों आ गए मेरे सामने?

अगर उनके घर में कभी ऐसे गुणवान व्यक्ति पहुँच जाएं, तो भी यह हो सकता है कि बच्चे अपने इसी भाव में रहें कि मेरा आज Mood ठीक नहीं है। आज आपको नहीं आना चाहिए था। आज सुबह-सुबह मेरी घर में लड़ाई हुई है। कलह हो गया। आज मेरा Mood ठीक नहीं था और उसी समय पर आपका आना हो गया। आप यह बात ध्यान में रखो कि कुछ निमित्त ऐसे होते हैं, कुछ चीजें ऐसी होती हैं, कुछ ऐसे कारण हमारे सामने होते हैं, जिनके होने पर हमें सब कुछ भूल जाना चाहिए। अगर यह हमें सीखने को मिल गया और हमारे दिमाग में एक Practice के रूप में आ गया, तो ध्यान रखना कि आज की दुनिया में तरह-तरह की परेशानियां हैं सामने। लॉकडाउन एक परेशानी नहीं है, लेकिन लॉकडाउन के कारण जो परेशानियां पैदा हो रही हैं, वे परेशानियां बहुत बड़ी-बड़ी हैं। हर किसी को अपने-अपने Job की परेशानी है, अपनी-अपनी Economical Problems हैं, तरह-तरह की पारिवारिक स्थितियां भी बिगड़ रही हैं और उन सबको ध्यान में रखते हुए भी आपको एक चीज ध्यान रखनी चाहिए कि हमें अपना Mind कभी न कभी इन भावनाओं के साथ जोड़ना चाहिए। 

अगर आपकी  Practice में यह बात रहे कि हम वैसे तो भले ही चाहे कितने ही दुःखी रहें या कैसे ही अपना मुंह बनाए रखें, लेकिन जैसे ही हमारे सामने गुणवान व्यक्ति आएं, तो हमें क्या करना है? BE HAPPY. अगर आप कहीं गुणवान व्यक्ति के दर्शन कर रहे हो, प्रवचन सुन रहे हो, तो आपके चेहरे पर अपने आप में इस तरीके की Expression होनी चाहिए कि सुनाने वाले को लगे कि आप उसे Accept कर रहे हो। ये बातें सीख लो। बहुत ही व्यावहारिक बातें हैं, जरूरी भी हैं और इसी से आपके अंदर कुछ गुण आएंगे। गुणी जनों को देखकर आपके मन में प्रमोद उत्पन्न होगा, प्रसन्नता उत्पन्न होगी, तो आपके चेहरे पर प्रसन्नता आए बिना रहेगी नहीं। 

ऐसा कैसे, ,महाराज? हमारा चेहरा तो ऐसा ही रहता है, लेकिन हम भीतर से प्रसन्न रहते हैं। 

It is not possible.

अगर आपके हृदय में प्रसन्नता है, तो आपके Face पर वह आएगा। Face is the index of our heart. इसीलिए कहा जाता है कि हमारा चेहरा हमें बता देता है कि हम क्या सोच रहे हैं? हम किस दुनिया में घूम रहे हैं? हमारा मन कहां हैं? अगर आप यहां बैठे हो तो आपका चेहरा समझने वाला समझ लेता है कि आप सुन तो रहे हो, लेकिन फिर भी आपका दिमाग कहीं दूसरी जगह पर है। 

ऐसे कैसे पता लगेगा, महाराज? 

आपका चेहरा बता देता है। आपकी आंखें बता देती हैं। आपके Expression बता देते हैं। अगर आप ढंग से Concentration के साथ सुन रहे हो, तो अलग समझ में आएगा कि हां! आप बिल्कुल Aware हो कर सुन रहे हो और आपके अंदर भाव आ रहा है कि मुझे आज बहुत अच्छा सुनने को मिल रहा है। So I am so much happy. यह भाव कब आएगा? जब आप गुणी जनों के प्रति एक आदर का भाव अपने अंदर रखते होंगे। जो गुणी लोग हैं, उनके प्रति आपके मन में एक आनंद का भाव रहता होगा, तब अगर कभी आपको वे गुणी जन मिल जाएंगे, तो आप अपने पुण्य को बहुत सराहोगे। 

महाराज! मैं बहुत समय से सोच रहा था कि कब हमें मुनि महाराज का दर्शन होगा? कब हमें गुणी जनों के दर्शन होंगे? आज अचानक से हो गए। मेरा बहुत बड़ा भाग्य है। यह Feeling किसी और के लिए नहीं है। This is My Feeling. किसकी भावना है यह - ‘मेरी भावना’। हर किसी व्यक्ति की भावना मेरी भावना, मेरी अपनी Feelings  होनी चाहिए। अगर आपकी इस तरीके की Feelings होने लग जाएंगी तो अगर आपका Mind कभी भी, थोड़ा भी Disturb होगा और आपके लिए इस तरीके का कोई संयोग बन जाएगा, तो आप अपने लिए वह सारा का सारा दुःख भूल जाओगे और आपका Mind अपनी एक Happiness की State में आ जाएगा। यह कितनी ज़रूरी चीज है आज के समय में! 

आपको कब-कब Happy होना है, कब-कब आपकी Feeling बिल्कुल Positive होना है। आप सोच भी लोगे, तो भी बहुत देर तक Sad नहीं रह पाओगे। लेकिन अगर आपको यह पता है कि अगर हमें गुणी जनों का दर्शन हो जाएं, तो हमें ज़रूर प्रसन्न होना है। यह हमारी Condition होनी चाहिए। मतलब कि जब जब हमें गुणी जनों का दर्शन हो, हमें प्रसन्नता का अनुभव होना ही चाहिए और यह प्रसन्नता ही वह भाव है, जिससे आप कुछ Gain कर सकते हो। आपके अंदर कुछ बदलाव आ सकता है। आप कभी महसूस करके देखना। 

आपका मन भले ही खराब हो, लेकिन मान लो अगर आप नकली भाव में भी अपने चेहरे को प्रसन्न बनाने की कोशिश करोगे, तो भी आपके अंदर से बहुत कुछ दुःख चला जाएगा। कब? अगर असलियत में आपका चेहरा प्रसन्न न हो रहा हो, तो भी आप उसको प्रसन्न बनाने की कोशिश करो। आपका बहुत कुछ दुःख दूर हो जाएगा और अगर वास्तव में यदि आप अपने मन से चेहरे पर प्रसन्नता ले आए, फिर तो कहना ही क्या है!

यह आज के समय में बहुत जरूरी है। हम किसी भी प्रकार की परिस्थितियों से गुजर रहे हों, मन का खुश रहना बहुत जरूरी है और कोई भी दुनिया में ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो आज ढंग से सुखी हो। उसको कोई दिक्कत न हो, चिंता न हो। कोई न कोई चिंता बनी ही रहती है। वह चिंता ही आदमी की Smile को गायब कर देती है। नहीं तो आप कहोगे कि महाराज! कौन ऐसा व्यक्ति है, जो ख़ुश नहीं रहना चाहता। लेकिन क्या करें? हमारी परिस्थितियां ही ऐसी हैं कि हम ख़ुश रह नहीं पाते। कोशिश भी करते हैं, फिर भी ख़ुश नहीं रह पाते हैं।

ऐसी बात नहीं है। आपने Practice नहीं की। अगर आप खुश रहने की Practice  करोगे, तो आपके लिए यही ‘मेरी भावना’ हमेशा खुश रखने का कारण बनी रहेगी। 

क्रमशः

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद

Comments

Popular posts from this blog

बालक और राजा का धैर्य

सती कुसुम श्री (भाग - 11)

चौबोली रानी (भाग - 24)

सती नर्मदा सुंदरी की कहानी (भाग - 2)

हम अपने बारे में दूसरे व्यक्ति की नैगेटिव सोच को पोजिटिव सोच में कैसे बदल सकते हैं?

मुनि श्री 108 विशोक सागर जी महाराज के 18 अक्टूबर, 2022 के प्रवचन का सारांश

जैन धर्म के 24 तीर्थंकर व उनके चिह्न

बारह भावना (1 - अथिर भावना)

रानी पद्मावती की कहानी (भाग - 4)

चौबोली रानी (भाग - 28)