Posts

Showing posts from May, 2026

निजातम से अपने को तू जोड़ ले,

Image
निजातम से अपने को तू जोड़ ले,  निजातम से अपने को तू जोड़ ले,  कषायों से अपना तू मन मोड़ ले, तेरा फिर ये जीवन संवर जाएगा सदा के लिए -२ १) कषायों में अपने तू उलझा रहा, अपने को खुद ही तू छलता रहा,  अनादि से यूं ही भटकता रहा, कर्मों के जाले ही बुनता रहा।  मिथ्या कषायों को तू छोड़ दे, आतम को अनुभव से तू जोड़ ले, तेरा फिर ये जीवन -----। २) पर के सदा गीत गाता रहा, पर को ही अपना समझता रहा, तू जीवन को यूं ही गंवाता रहा, अपने सेे खुद ही तू बचता रहा--२, पर और पा को तू जान ले, जीवन को तू पहचान ले, तेरा फिर ये जीवन--------। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

जो जो देखी वीतराग ने

Image
जो जो देखी वीतराग ने जो जो देखी वीतराग ने, सो सो होसी वीरा रे।  अनहोनी होसी नहिं जग में, काहे होत अधीरा रे।।टेक।।    समयो एक बढ़े नहिं घटसी, जो सुख-दुःख की पीरा रे।  तू क्यों सोच करै मन मूरख, होय वज्र ज्यों हीरा रे ।।(1)।।    लगै न तीर कमान बान कहुँ, मार सकै नहिं मीरा रे।  तू सम्हारि पौरुष बल अपनो, सुख अनन्त तो तीरा रे ।।(2)।।   निश्चय ध्यान धरहु वा प्रभु को, जो टारे भव भीरा रे।  ‘भैया’ चेत धरम निज अपनो, जो तारें भव तीरा रे ।।(3)।। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

दे दो थोड़ा ज्ञान

Image
“ दे दो थोड़ा ज्ञान ” Sung by- Bindu Jain, Delhi. धुन- एक तेरा साथ, हमको दो जहां से प्यारा है दे दो थोड़ा ज्ञान गुरुवर, तेरा क्या घट जाएगा,  ये बालक भी तर जाएगा। दे दो थोड़ा ज्ञान.... दे दिया तुमने उसको सहारा, जो द्वारे पर आया।  भर दिया दामन उसका खुशी से, जो अर्जी है लाया। मुझको देने से-2  खज़ाना कम नहीं हो जाएगा, ये बालक भी ........।  दे दो थोड़ा ज्ञान.... नैया मेरी तेरे हवाले, गुरुवर इसको पार करो।  दे दिया तुमने, मुझको सहारा तो इतना विश्वास करो। ये तेरा दरबार-2  जय जयकारों से गुँजाएगा, ये बालक भी ...........। दे दो थोड़ा ज्ञान.... भक्तों के सहारे गुरुवर हमारे, हर दिल में रहते हैं।  चरणों में आए, झोली को भर जाए, बड़े उपकारी हैं। भक्तों को शरण देते-2  जो शरण में आएगा, ये बालक भी ...........। दे दो थोड़ा ज्ञान गुरुवर, तेरा क्या घट जाएगा,  ये बालक भी तर जाएगा। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारो...

दिगम्बर गुरु की महिमा

Image
दिगम्बर गुरु की महिमा ऐसे परम दिगम्बर मुनिवर देखे, हृदय हर्षित होता है,  आनन्द उल्लसित होता है। होऽऽऽऽऽ......सम्यग्दर्शन होता है। वास जिनका वन उपवन में, गिरि शिखर के नदी तटे-2 वास जिनका चित्त गुफा में, आतम आनन्द में रमे-2  ऐसे परम दिगम्बर....... कंचन कामिनी के त्यागी, महा तपस्वी ज्ञानी ध्यानी-2 काया की माया के त्यागी,तीन रतन गुण भंडारी-2 ऐसे परम दिगम्बर....... परम पावन मुनिवरों के, पावन चरणों में नमूँ-2 शान्त मूर्ति सौम्य मुद्रा, आतम आनन्द में रमूँ-2 ऐसे परम दिगम्बर....... चाह नहीं है राज्य की, चाह नहीं है रमणी की-2 चाह हृदय में एक यही है, शिव रमणी को वरने की-2 ऐसे परम दिगम्बर....... भेद ज्ञान की ज्योति जला कर, शुद्धातम में रमते हैं-2 क्षण-क्षण में अन्तर्मुख होकर, सिद्धों से बातें करते हैं-2 ऐसे परम दिगम्बर....... “बोलो महावीर भगवान की जय” ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।   सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरण...

गुरु वन्दना

Image
  गुरु वन्दनाः गुरु मेरे जीवन को......... गुरु मेरे जीवन को, कुन्दन बना दो।  कोई खोट इसमें रहने न पाए।। करो मेरे जीवन में ऐसा उजाला, हर श्वास हो तेरे चिंतन की माला। मेरे दिल की दुनिया को इतना बदल दो, कि दुनिया हमेंभी गले से लगाए।। गुरु मेरे जीवन को......... वर्षा की रिमझिम, पवन के तराने, भौरों की गुनगुन, लताओं के गाने।  नज़र ये जिधर भी जाएगी मेरी, अमर ज्योति तेरी, उधर मुस्कुराए।। गुरु मेरे जीवन को........ सारे जगत को मैं परिवार समझूँ, परिवार को तेरा, उपहार समझूँ। चारों कषायों से खुद को बचाऊँ, कोई भी मुझको, सताने न पाए।।                   गुरु मेरे जीवन को..........  ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

हांसी का पुण्योदय तीर्थ धाम

Image
हांसी का पुण्योदय तीर्थ धाम अतिशयकारी है मनहारी, पार्श्वनाथ का धाम,  यहां आकर तकदीर संवरती, बनते बिगड़े काम,  है हांसी तीर्थ हमारा, हमें प्राणों से प्यारा -२  १) पद्मासन में सोहे, प्रतिमा लगती मनभावन,  पारस सा सोना पाकर, अब धरा हो गई पावन,  हरियाणा के पवित्र तीर्थ का हुआ है जग में नाम,  है हांसी तीर्थ हमारा हमें प्राणों से प्यारा -२  २) नंद्यावर्त की रचना आदृश्य लग रहा न्यारा,  हांसी की हंसी हुई जग में जागा सौभाग्य हमारा,  उत्तर में विख्यात हुआ पुण्योदय तीर्थ धाम ,  है हांसी तीर्थ हमारा हमें प्राणों से प्यारा-२  ३) गुरु विद्यासागर का आशीष जो हमने पाया ,  धन्य हो गई धरती मिली गुरु कृपा की छाया ,  गुरु के उपकारों हमको मिला आज सम्मान - २,  है हांसी तीर्थ हमारा हमें प्राणों से प्यारा - २।  ४) पूज्य सुधा सागर की जब नजर पड़ी भक्तों पर,  माटी हो गई चंदन गुरु मात् दृढ़मती को पाकर,  मुनी प्रणम्य और चंद्र सागर ने, मुनी वीर सागर ससंघ ने किया पंचकल्याण - २  है हांसी तीर्थ हमारा हमें प्राणों से प्यारा - २ ।।...

भला किसी का कर न सको तो

Image
  भला किसी का कर न सको तो भला किसी का कर न सको तो, बुरा किसी का मत करना। पुष्प नहीं बन सकते तो, तुम कांटे बनकर मत रहना।। बन न सको भगवान अगर तुम, कम से कम इंसान बनो। नहीं कभी हैवान बनो तुम, नहीं कभी शैतान बनो।। सदाचार अपना न सको तो, पापों में पग मत ध्ारना। भला किसी का ................। सत्य वचन न बोल सको तो, झूठ कभी भी मत बोलो। मौन रहो तो ही अच्छा, कम से कम विष तो मत घोलो।। बोलो यदि पहले तुम तोलो, फिर मुँह को खोला करना। भला किसी का ................। घर न किसी का बसा सका तोे, झोपड़ियाँ न जला देना। मरहम पट्टी कर न सको तो, नोन मिर्च न लगा देना।। दीपक बनकर जल न सको तो, अंध्ाियारा भी मत करना। भला किसी का .......................। अमृत पिला सको न किसी को, ज़हर पिलाते भी डरना। ध्ाीरज बंध्ाा सको न किसी को, घाव किसी को मत करना। प्रभु नाम की माला लेकर, सुबह और शाम जपा करना। भला किसी का ................। ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारो...

है वही सुखी श्रीमंत

Image
 मराठी भजन का हिन्दी अनुवाद धुनः ए मेरे दिले नादां...... है वही सुखी श्रीमंत, जो जपे णमो अरिहन्त, वो बने यहाँ भगवन्त, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी........ जो मन्त्र नित्य ही गाते, वो प्रेममग्न हो जाते। णमोकार मन्त्र जो गाते, पाँचों परमेष्ठी ध्याते। वही श्रावक जैन जीवंत, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी........ कर जोड़ शुद्ध भक्ति से, जो अरिहंतों को वंदे। वे पुरुषोत्तम कहलाते, जो नमे सहित आनन्दे। वह मनुज नहीं, वह संत, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी........ मन में सुख शांति पावे, निज आनन्द में खो जावे। दुःख और क्लेश भगावे, जब मंत्रोच्चार सुनावे। वह मूर्तिमंत भगवंत, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी........ प्रति श्वास णमो अरिहंता, प्रति ग्रास णमो अरिहंता। लो श्वास णमोकारों का, हो घोष महामन्त्रों का। वह सदा रहे निश्चिन्त, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी........ णमोकार मंत्र जो गावे, वो अनहद नाद सुनावे। यह बंद नंत्रों का काजल, जिसे डाल जीव जग जावे। वह पाए शांति अनन्त, जो जपे णमो अरिहन्त। है वही सुखी....... मराठी भजन तो खरा सुखी श्रीमंत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’। जो मंत्र नित्य हा गातो, ...

महावीर की अमृत वाणी

Image
  महावीर  की अमृत वाणी दयादृष्टि कब होएगी, हे सन्मति महावीर।  तुमरे दर्शन के बिना, मन है अधिक अधीर। माँ त्रिशला के लाल तुम, हो करुणा के धाम।  धर्म धरा इस देश की, जपत तुम्हारा नाम। शुद्धाचार की भीति पर, कर अपना निर्माण।  ज्ञान चरण उत्थान से, पायो पद निर्वाण। नाथ तुम्हारे जगत में, सेवक लाखों लाख।  नाथवंश के वृक्ष तुम, बढ़ी तुम्हारी शाख।   वीर महा अति वीर जी, तुम जग की जागीर।  तुम निर्धन की सम्पदा, वर्धमान महावीर। नाम तिहारो ध्याय के, सकल दाह मिट जाय।  मृत्युंजय तुम हो प्रभु, ध्यान धरे    दुःख  जाय।   परम पिता परमात्मा, सिद्धार्थ सुत आप।  अजर अमर प्रभु आपका, जग में सुयश प्रताप। जैन धर्म तुम पर टिका, हो तुम अंतिम देव।  तीर्थंकर चौबीसवें, महामहिम जिनदेव। निर्मल हिय में धार के, कर निर्मल परिणाम।  करें वंदना आपकी, शत शत करें प्रणाम।  2. वीर प्रभु तुम धर्म धुरंधर, ज्ञान रूप अतुलित अति सुंदर।  वीर प्रभु तुम जग में नामी, वीतराग तुम अन्तर्यामी। वीर नाम जग तारणहारा, पतितन को प्रभु देय किनारा।  वीर नाम...

छहढाला(34) चौथी ढाल

Image
अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत छहढाला(34) चौथी ढाल सम्यग्ज्ञान का लक्षण और उसका समय सम्यक् श्रद्धा धारि पुनि, सवहु सम्यग्ज्ञान, स्व-पर अर्थ बहु धर्मजुत, जो प्रगटावन भान ॥ १ ॥ अन्वयार्थः--(सम्यक् श्रद्धा) सम्यग्दर्शन (धारि) धारण करके (पुनि) फिर (सम्यग्ज्ञान) सम्यग्ज्ञान का (सेवहु) सेवन करो; जो सम्यग्ज्ञान ( बहु धर्मजुत ) अनेक धर्मात्मक (स्व-पर अर्थ) अपना और दूसरे पदार्थों का (प्रगटावन) ज्ञान कराने में (भान) सूर्य समान है। भावार्थः-सम्यग्दर्शन सहित सम्यग्ज्ञान को दृढ़ करना चाहिये। जिस प्रकार सूर्य समस्त पदार्थों को तथा स्वयं अपने को यथावत् दर्शाता है, उसी प्रकार जो अनेक धर्मयुक्त स्वयं अपने को (आत्माको) तथा पर-पदार्थों को ज्यों का त्यों बतलाता है, उसे सम्यग्ज्ञान कहते हैं। सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञानमें अन्तर (रोला छन्द) सम्यक् साथै ज्ञान होय, पै भिन्न अराधी, लक्षण श्रद्धा जान, दुहूँमें भेद अबाधौ । सम्यक् कारण जान, ज्ञान कारज है सोई; युगपतू होते हू, प्रकाश दीपकर्तै होई ।। २ ।। अन्वयार्थ : --- (सम्यक् साथै) सम्यग्दर्शनके साथ (ज्ञान) सम्यग्ज्ञान (होय) होता है ( पै ) तथापि [ उन दो...

थोड़ा ध्यान धरो

Image
 थोड़ा ध्यान धरो  तर्ज़-ओहरे ताल मिले.... थोड़ा ध्यान धरो प्रभु का मन में, प्रभु मिले आतम में, आतम मिले कौन से भव में, कोई जाने ना, थोड़ा ध्यान ................ ज्ञानी तो ध्यान को तरसे, ध्यानी तो साधना-2 पानी में दूध जैसे, काया में आत्मा-2 ओ चेतन रे ...... पानी में दूध जैसे, काया में आत्मा, आया है कौन से भव से, कोई जाने ना, थोड़ा ध्यान ................ कैसी ये दुनिया सारी, कैसे ये लोग हैं-2 झूठी ये दुनिया सारी, झूठे ये लोग हैं-2 ओ मनवा रे ......... झूठी ये दुनिया सारी, झूठे ये लोग हैं, जाना है कौन से भव में, कोई जाने ना, थोड़ा ध्यान .........   ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद

प्रभु के बिना

Image
भजन प्रभु के बिना मन भटकेऽऽ, महावीरा...  प्रभु जी तुमने मस्तक दिया अनमोल - 2 धोक देऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ...   प्रभु जी तुमने नैन दिए अनमोल - 2 शास्त्र पढ़ूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... दरश करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ...   प्रभु जी तुमने कान दिए अनमोल - 2 वचन सुनूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... भजन सुनूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... प्रभु जी तुमने मुख दिया अनमोल - 2 भजन गाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... कीर्तन करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... प्रभु जी तुमने हाथ दिए अनमोल - 2 दान करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... पूजन करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... ़ प्रभु जी तुमने पैर दिए अनमोल - 2  तीरथ जाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... निरत करूँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना  ... मैं मंदिर जाऊँ रज रज केऽऽ, महावीरा। प्रभु के बिना ... प्रभु जी तुमने हृदय दिया अनमोल - 2 मैं सिमरन क...
Image
ओंकारमयी वाणी तेरी   ओंकारमयी वाणी तेरी, जिनधर्म की शान है। समोशरण देख के, शांत छवि देख के, गणधर भी हैरान है। स्वर्ण कमल पर आसन है तेरा, और इन्द्र कर रहे गुणगान हैं। दृष्टि है तेरी नासा के ऊपर, सर्वज्ञता ही तेरी शान है। चाँद सितारों में, लाखों हज़ारों में, तेरी यहाँ कोई मिसाल नहीं है। चार मुख दिखते, समोशरण में, स्वर्ग में भी ऐसा कमाल नहीं है। हमको भी मुक्ति मिले, हम सब का अरमान है। समोशरण..... सारे जहाँ में फैली है वाणी, गणधर ने गूंथी इसे शास्त्र में। सच्ची विनय से श्रद्धा करें तो, ले जाती है मुक्ति के मार्ग में। कषाय मिटाए, राग को भगाए, जिसके श्रवण से ये शांति मिली है। सुख का ये सागर, आत्म में रमण कर, आतम की बगिया में मुक्ति खिली है। हम सब भी तुम सा बनें, ऐसा ये वरदान है। समोशरण.....  मैं हूँ त्रिकाली ज्ञानी स्वभावी, दिव्य ध्वनि का यही सार है। शक्ति अनंत का पिंड अखंड, पर्याय का भी ये आधार है। दीए झलकते हैं ज्ञान की कला में, कैसा ये अद्भुत कलाकार है। दृष्टि को जीता फिर भी अछूता, तुझमें ही ऐसा चमत्कार है। जग में है महिमा तेरी, गूंज रहा नाम है। समोशरण..... । । ओऽम् श्री महावीराय ...

भक्तामर-महिमा

Image
॥ भक्तामर-महिमा ॥ श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रात, भक्ति मन लाई। सब संकट जाएँ नशाई॥ जो ज्ञान-मान-मतवारे थे, मुनि मानतुंग से हारे थे। उन चतुराई से नृपति लिया, बहकाई।। सब संकट...॥1॥ मुनिजी को नृपति बुलाया था, सैनिक जा हुक्म सुनाया था। मुनि वीतराग को आज्ञा नहीं सुहाई॥  सब संकट...॥2॥ उपसर्ग घोर तब आया था, बलपूर्वक पकड़ मँगाया था। हथकड़ी बेड़ियों से तन दिया बंधाई॥ सब संकट...॥3॥ मुनि काराग्रह भिजवाए थे, अड़तालिस ताले लगाए थे। क्रोधित नृप बाहर पहरा दिया बिठाई॥ सब संकट...॥4॥ मुनि शांतभाव अपनाया था, श्री आदिनाथ को ध्याया था। हो ध्यान-मग्न भक्तामर दिया बनाई॥सब संकट...॥5॥ सब बंधन टूट गए मुनि के, ताले सब स्वयं खुले उनके। काराग्रह से आ बाहर दिए दिखाई॥ सब संकट...॥7॥ जो पाठ भक्ति से करता है, नित ऋषभ-चरण चित धरता है। जो ऋद्धि-मंत्र का विधिवत जाप कराई॥ सब संकट...॥8॥ भय विघ्न उपद्रव टलते हैं विपदा के दिवस बदलते हैं। सब मन वांछित हों पूर्ण, शांति छा जाई॥ सब संकट...॥9॥ जो वीतराग आराधन है, आतम उन्नति का साधन है। उससे प्राणी का भव बंधन कट जाईं॥ सब संकट...॥10॥ ' कौशल' सुभक्ति को पहिचानो, संसार-दृष्टि ...