आरती श्री बाहुबली स्वामी
आरती श्री बाहुबली स्वामी
श्री बाहुबली की आरती उतारो मिल के,
उतारो मिल के, छवि निहारो मिल के, श्री.........
रिषभदेव पितु मात सुनन्दा, भ्रात भरत दोऊ सूरज चंदा,
प्रेम की वर्षा दिन रैन करते थे, चारों के चारों मिल के, श्री........
सवा पंच शत धनु की काया, जिसमें जग का तेज समाया,
बाहुबली जी की इस मोहनी मूरत पे, तन मन वारो मिल के, श्री.......
शस्त्र शास्त्र विद्या परवीणा, दोउ सुत को पितु नृप कर दीना,
आदीश्वर बोले मैं वन चला, पुत्रों दोउ राज संभालो मिल के,
तुम्ही संभालो मिल के, श्री......
चक्रवर्ती पर जय जब पाई, कर्म विजय की मन तब आई।
नश्वर माया को पाकर भी क्या होगा, ये तनिक विचारो मिल के, श्री........
वृक्ष जान तन चढ़ गई बेलें, सर्पादिक चरणों में खेलें।
ध्यान में डूबे हैं, प्रभु ध्यान में डूबे हैं, इन्हें पुकारो मिल के, श्री.......
धीर वीर बाहुबली स्वामी, पितु के पूर्व भए शिवगामी।
ऐसे त्यागी का, ऐसे महायोगी का, नाम उचारो मिल के,
श्री बाहुबली की आरती उतारो मिल के।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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