सारा पाप पुण्य का खेल

सारा पाप पुण्य  का खेल 

Sung by - Bindu Jain, Delhi

(रसिया) अब आगया कलयुग घोर पाप का जोर हुआ भारी ।

सारा पाप पुन्य का खेल जगत में देखो आंख पसार ।
देखो आंख पसार करम के वश में है संसार— टेक

पुण्य उदय सीता जब आयो , अग्निकुण्ड जल सार बनायो
पाप उदय रावण हर ले गया करती हा हा कार— टेक

पुण्य उदय इन्द्रादिक देवा , भगवन ऋषभ करें सब सेवा
पाप उदय से बारह मास तक मिला नहीं आहार — टेक

पुण्य उदय यादव कुल भारी— भोगे भोग अनेक प्रकारा
पाप उदय से सारी द्वारिका हो गई जल कर खाक— टेक

पाप उदय द्रौपद पटरानी , महल विराट भरा जा पानी
चीर बढ़ा पुण्य उदय सभा में जा का वार न पार— टेक

मैना सब विद्या पढ़ आई , पाप उदय कुष्टी संग व्याही
पुण्य उदय दुख गया बनी है कोटी भट पट नार— टेक

जैसी करनी वैसी भरनी , सखी बात यह हृदय धरनी
फल पाते है सभी शुभा शुभ कर्मों के अनुसार— टेक

जीव करम का कर्ता जानो , आप ही इनका हर्ता मानो
इन कर्मों के फल का कोई और नहीं दातार— टेक
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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