वंदन अष्टापद धाम की

वंदन अष्टापद धाम की



चलो सभी मिल पूजन कर लें गिरि कैलाश महान की, 

प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के, प्रथम मोक्ष स्थान की,

 वंदे गिरिवरम् -2

कोटि-2 वर्ष पूर्व जहाँ, ऋषभदेव जी मोक्ष गए, 

चक्रवर्ती भरतेश्वर ने वहाँ, रत्न जिनालय बना दिए, 

जय-2 बोलो वंदन कर लो, उस अष्टापद धाम की। 

प्रथमतीर्थंकर ऋषभदेव के, प्रथम मोक्ष स्थान की,

 वंदे गिरिवरम् -2

उस पर्वत का कण-2 पावन, पूज्य सदा के लिए हुआ, 

इसीलिए हमने उसका, पूजन का थाल सजाए लिया, 

हाथ जोड़ कर नमन करूँ मैं, आदिनाथ भगवान की। 

प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के, प्रथम मोक्ष स्थान की,

 वंदे गिरिवरम् -2

।। ओऽम् श्री आदिनाथाय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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