हे वीर तुम्हारे
हे वीर तुम्हारे हे वीर तुम्हारे द्वारे पर एक दरश भिखारी आया है । प्रभु दर्शन भिक्षा पाने को दो नयन कटोरे लाया है ॥ १ नहीं दुनियाँ में कोई मेरा है आफत ने मुझ को घेरा है । अब एक सहारा तेरा है जगने मुझ को ठुकराया है ॥ २ धन दौलत की कुछ चाह नहीं घरबार छुटे परवाह नहीं । मेरी इच्छा है तेरे दर्शन की दुनियाँ से चित घबराया है ॥ ३ मेरी बीच भूँवर में नैया है, प्रभु तू ही एक खिवैया है । लाखों को ज्ञान सिखा तुमने भवसिंधु से पार लगाया है ॥ ४ आपस में प्रीति व प्रेम नहीं, और तुम बिन हमको चैन नहीं । अब तुम ही आकर दर्शन दो 'त्रिलोकी'नाथ अकुलाया है ॥ ५ । ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। द्वारा -सरिता जैन सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका हिसार 🙏🙏🙏 विनम्र निवेदन यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें। धन्यवाद