फैला हुआ है राजा
भजन - फैला हुआ है राजा
क्या आन कान बारे, क्या शाह शान बारे
कर्मों के आगे सब के, जाते हैं मान मारे ॥टेक॥
रावन ने हरनाकुश ने क्या क्या नहीं किया था
आखिर करम बली से, सब ही गये हैं हारे ॥टेक॥
सुख और दु:ख का देना, करमों के हाथ में हैं
चलती नहीं किसी की, करलो यतन अपारे ॥टेक॥
। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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धन्यवाद
★ विवेक का विपर्यय हो मोह है।
Here is the transcription of the printed Hindi text from the page into Unicode Devanagari format:
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★ **तप का मूल धैर्य है।**
[ २० ]
★ राग द्वेष से मुक्त होना ही परिनिर्वाण है,
[ २१ ]
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