फैला हुआ है राजा

भजन - फैला हुआ है राजा



चाल :—एक तीर फैंकता जा तिरछी कमान वाले ।

फैला हुआ है राजा, करमों का जाल सारे

दरिया पहाड़ नाले, सूरज कि चांद तारे ॥टेक॥

तिर्यंच नर सुरासुर, ब्रह्मा ऋषि हरिहर

फिरते हैं सब चराचर, कर्मों के मारे मारे ॥टेक॥

क्या आन कान बारे, क्या शाह शान बारे

कर्मों के आगे सब के, जाते हैं मान मारे ॥टेक॥

रावन ने हरनाकुश ने क्या क्या नहीं किया था

आखिर करम बली से, सब ही गये हैं हारे ॥टेक॥

सुख और दु:ख का देना, करमों के हाथ में हैं

चलती नहीं किसी की, करलो यतन अपारे ॥टेक॥

। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।

धन्यवाद












विवेक का विपर्यय हो मोह है।
Here is the transcription of the printed Hindi text from the page into Unicode Devanagari format:

---

## 

---

★ **तप का मूल धैर्य है।**
[ २० ]





राग द्वेष से मुक्त होना ही परिनिर्वाण है,

[ २१ ]


भजन

Comments

Popular posts from this blog

बालक और राजा का धैर्य

सती कुसुम श्री (भाग - 11)

चौबोली रानी (भाग - 24)

सती नर्मदा सुंदरी की कहानी (भाग - 2)

हम अपने बारे में दूसरे व्यक्ति की नैगेटिव सोच को पोजिटिव सोच में कैसे बदल सकते हैं?

जैन धर्म के 24 तीर्थंकर व उनके चिह्न

मुनि श्री 108 विशोक सागर जी महाराज के 18 अक्टूबर, 2022 के प्रवचन का सारांश

बारह भावना (1 - अथिर भावना)

रानी पद्मावती की कहानी (भाग - 4)

मेरी भावना (2) बुद्ध किसे कहते हैं?