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Showing posts from November, 2026

भक्तामर है प्यारा स्तोत्र (1-4)

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भक्तामर है प्यारा स्तोत्र भक्तामर है प्यारा स्तोत्र, मुक्ति का मार्ग दिखाए रे... प्रभु आदिनाथ का ध्यान करो, भव संकट दूर हो जाए रे... (श्लोक 1) नतमस्तक होकर देव सभी, चरणों में शीश झुकाते हैं, निकली किरणों की आभा से, पाप अंधियारे मिट जाते हैं। जो जग के तारणहारे हैं, जो आदिदेव कहलाते हैं, उन ऋषभदेव के चरणों में, हम भक्ति के अर्घ चढ़ाते हैं... भक्तों के संकट, हो ऽऽ...... भक्तों के संकट, सारे कट जाएं रे, प्रभु आदिनाथ का ध्यान करो...  (श्लोक 2) हे देव! तुम्हारी स्तुति को, बुद्धिमानी जन हैं कर पाते, इन्द्रों के अधिपति भी प्रभुवर! महिमा गाते हैं थक जाते। फिर मुझ-सा मन्द बुद्धि प्राणी, कैसे गुणगान तुम्हारा करे, जैसे सागर को पार करे, कोई लघु नौका का साथ धरे... अज्ञान अंधेरा हो ऽऽ...... सब छंट जाए रे, प्रभु आदिनाथ का ध्यान करो...  (श्लोक 3) अल्पश्रुत होकर भी प्रभुवर, मैं स्तुति करने आया हूँ, जैसे जल में पड़े चन्द्र को, बालक पाने ललचाया हूँ। पर भक्ति भाव के वश होकर, मन को न रोक मैं पाया हूँ, संसार के सारे बंधनों से, मुक्ति की आशा लाया हूँ... बेड़ी भी पल में, हो ऽऽ...... वह टूट जाए रे, प्रभु ...

जीवन है पानी की बूंद (111-115)

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जीवन है पानी की बूंद (111-115) रचयिता व प्रणेता : परमपूज्य आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे। होनी अनहोनी, कब क्या घट जाये रे ॥    सोचें वैसा हो जाए, जैसा चाहें मिल जाए  देर नहीं लगने पाए - 2 चाहते ऐसा है सब ही, ऐसा होता कभी - 2, किस्मत हो अच्छी, हो ऽऽ ....   किस्मत हो अच्छी, तो झट हो जाए रे  ।।111।। जीवन है..... करना पूजन दान यहां, गुरुओं का सम्मान यहां जिनवर का गुणगान यहां - 2, इन सबसे मन पावन हो, हृदय साफ मन भावन हो मन की निर्मलता, हो ऽऽ ....   मन की निर्मलता, निज सार दिखाये रे ।।112 ।। जीवन है  .... ज्ञान जिसे नहीं हो पाये, कहीं नहीं वह सुख पाये दु:ख से उबर नहीं पाये - 2 ज्ञान करे भव पार यहां, देता जीवन सार यहां ज्ञान की महिमा,  हो ऽऽ ....   ज्ञान की महिमा, सब वेद सुनाये रे  । ।113 ।। जीवन है .... ताक़त को बर्बाद किया, खुद को नहीं आबाद किया कैसे हो आज़ाद, यहां - 2, गुलामियत में रहते हैं, खुशी -खुशी गम सहते हैं, अपना घर भूले,   हो ऽऽ ....     अपना घर भूले,  पर में भरमाय...