रानी पद्मावती की कहानी (भाग - 2)
रानी पद्मावती की कहानी (भाग - 2) चित्रसेन और उसका मित्र रत्नसार दोनों वहां से चले गए। पद्मावती की सखियों ने राजा पद्मावत को सारा वृतान्त सुनाया। राजा ने कहा - तुम मत घबराओ। हम राजकुमार चित्रसेन को खोज लेंगे। पद्मरथ ने पद्मावती के स्वयंवर में आने के लिए सब देश देशांतरों के राजकुमारों को निमंत्रण दे दिया। स्वयंवर का मंडप बहुत ही सुंदर सजाया गया, जैसे साक्षात स्वर्ग ही पृथ्वी तल पर आ गया हो। स्वयंवर का समय आ गया। सारे राजकुमार अपने-अपने सिंहासन पर विराजमान हो गए। राजा ने मंडप में एक बहुत विशाल देव-रक्षित धनुष लाकर दिया और कहा कि जो कोई भी इस धनुष को चढ़ाएगा, वही इस रूपवती कन्या का पति होगा। राजकुमारी पद्मावती भी सहेलियों के साथ 16 शृंगार से सजकर, सुंदर वस्त्राभूषणों को धारण कर स्वयंवर मंडप में आकर अपने स्थान पर बैठ गई। सब राजकुमारों ने धनुष को चढ़ाने का साहस किया किन्तु सफल न हो सके। कुछ राजकुमार तो दृष्टिहीन हो गए। उन्हें तो यह भी मालूम नहीं हुआ कि धनुष कहाँ रखा है? इस प्रकार अशुभ कर्म के उदय से स्वयंवर की रचना निष्फल हो गई। राजकुमारी मन में सोचने लगी कि मैं अपने प्राण प्रिय के दर्शन क्यों...