प्रश्न-मंच - 4
प्रश्न-मंच - 4
प्रश्न - अचौर्यवृत्ति किसे कहते हैं?उत्तरः जिस वस्तु को लेने के लिए स्वामी की अनुमति न ली गई हो, और वह जल या मिट्टी के अतिरिक्त हो, उसे न लेना अचौर्यवृत्ति (चोरी) कहलाती है।
दूसरे शब्दों में -
जो वस्तु गिरी हुई, पड़ी हुई, छोड़ी हुई, भूली हुई हो और उसका स्वामी स्पष्ट न हो, तो भी यदि बिना अनुमति लिए उसे न लिया जाए, तो वह भी अचौर्यवृत्ति कहलाती है।
प्रश्न- अचौर्यवृत्ति के कितने अतिचार होते हैं?
उत्तरः अचौर्यवृत्ति के पाँच अतिचार होते हैंः
1. स्तेनप्रयोगः
चोर को चोरी के लिए प्रेरित करना और उसके उपाय बताना।
2. तदाहृतादानः
चोर के द्वारा चुराई गई वस्तु को खरीदना।
3. विरुद्ध राज्यातिक्रम
राज नियमों के विरुद्ध चुराई गई वस्तु का व्यापार करना।
4. हीनाधिक मानोन्मानः
बाट, तराजू, मीटर आदि में हेराफेरी करना।
5. प्रतिरूपकव्यवहारः
सस्ती वस्तु को कीमती वस्तु में मिलाकर बेचना।
प्रश्न- ब्रह्मचर्यवृत्ति किसे कहते हैं?
उत्तरः “निज वनिता बिन सकल, नारियों से रहे विराग।“
अपनी विवाहित स्त्री को छोड़कर, समस्त स्त्रियों से विरक्त रहना ब्रह्मचर्यवृत्ति कहलाता है।
प्रश्न- ब्रह्मचर्यव्रत के कितने अतिचार होते हैं?
उत्तरः ब्रह्मचर्यव्रत के पाँच अतिचार होते हैंः
1. परविवाहकरण
अपने संरक्षण (संयम) से रहित होकर दूसरों के पुत्र-पुत्रियों का विवाह कराना या कराने देना परविवाहकरण कहलाता है।
2. अपरिगृहीतस्त्री का गमन
पति रहित स्त्रियों (जैसे वेश्याएँ आदि) के पास आना-जाना, लेन-देन या कोई व्यवहार करना यह अतिचार कहलाता है।
3. परिगृहीतस्त्री का गमन
विवाहित स्त्रियों से प्रेम, राग या अनौचित्यपूर्वक वार्तालाप आदि करना, यह भी एक ब्रह्मचर्य अतिचार है।
4. अनंगक्रीडा
काम-सेवन के लिए निश्चित अंगों को छोड़कर अन्य अंगों से काम सेवन करना अर्थात अन्य अंगों से अशुद्ध क्रिया करना।
5. कामसेवनाभिलाषा
काम-सेवन की अत्यंत इच्छा रखना, उस विषय में मन में तृष्णा पालना।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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