सती चंदनबाला की कहानी
सती चंदनबाला की कहानी चंदनबाला वैशाली नगर के राजा चेटक की पुत्री थी। वह भगवान महावीर की माता महारानी त्रिशला की सबसे छोटी बहिन थी। राजा चेटक की पत्नी का नाम रानी सुभद्रा था। उनके दस पुत्र और सात पुत्रियां थी। त्रिशला, मृगावती, वसुप्रभा, सुप्रभावती, चेलना, जेष्ठा और चंदनबाला। चंदनबाला बहुत रूपवती और शीलवती थी। एक दिन वह उद्यान में घूम रही थी कि एक विद्याधर उसको बलपूर्वक उठा कर ले गया। विद्याधर चंदनबाला के शील को नष्ट करना चाहता था, परंतु उसकी पत्नी भी घूमते हुए वहां आ पहुंची। उसके भय के कारण विद्याधर ने चंदनबाला को एक भयानक वन में छोड़ दिया। चंदनबाला उस भयानक वन में भूखी-प्यासी अकेली घूम रही थी। उसने निश्चय किया कि यह उसके पाप कर्मों का ही उदय है। वह पंच नमस्कार मंत्र को जपती हुई धर्म साधना में तत्पर हो गई। वहां एक भीलों का राजा आया। उसने वन में चंदनबाला को अकेले देखकर उसे अपनी पत्नी बनाना चाहा, लेकिन चंदनबाला अपने संकल्प पर दृढ़ थी। उसने चंदनबाला से धन प्राप्ति की इच्छा से कौशाम्बी नगर में चौराहे पर खड़ा करके उसकी बोली लगा दी। भील राजा चंदनबाला का मूल्य बढ़ाता जा रहा था और इस प्रकार उसने च...