श्रेष्ठ दान
श्रेष्ठ दान
फिरोजपुर के लाल देवी सहाय जी ठंड के प्रारंभ होते ही रात के समय शहर में जितने आदमी फुटपाथ अथवा कहीं पर भी कपड़ों के बिना सिकुड़ कर बैठे हुआ अथवा सोते हुआ मिलते, तो दूसरे दिन रूई की भरी उतनी ही रजाइयाँ बनवाकर दूसरी रात को 12:00 बजे जाकर उन गरीबों को सोते समय ओढ़़ा जाते। उन बेचारों को पता भी नहीं चलता कि कौन विशाल हृदय दानी पुरुष ये रजाइयाँ ओढ़ा गया है। इस तरह वे हमेशा गुप्त दान करते रहते थे।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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