छहढाला (1)
छहढाला (1)(सुबोध टीका)✠ पहली ढाल ✠
(सोरठा)
तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता;
शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ त्रियोग सम्हारि के ॥१॥
अन्वयार्थः
(वीतराग) रागद्वेष रहित, (विज्ञानता) केवलज्ञान, (तीन भुवन में) तीन लोकों में, (सार) उत्तम वस्तु, (शिवस्वरूप) आनन्दस्वरूप और (शिवकार) मोक्ष प्राप्त करानेवाला है। उसे मैं (त्रियोगें) तीन योगों से (सम्हारि के) सावधानीपूर्वक (नमहुँ) नमस्कार करता हूँ।
भावार्थ : रागद्वेषरहित “केवलज्ञान” ऊर्ध्व, मध्य और अधो इन तीन लोकों में उत्तम, आनन्दस्वरूप तथा मोक्षदायक है, इसलिए मैं (दौलतराम) अपने त्रियोग अर्थात् मन-वचन-काय द्वारा सावधानीपूर्वक उस वीतराग (१८ दोष रहित) स्वरूप केवलज्ञान को नमस्कार करता हूँ।१।
प्रश्न 1. दिगम्बर जैन समाज में लोकप्रिय छहढाला ग्रन्थ के रचयिता कौन हैं? (पंडित दौलतराम जी)
प्रश्न 2. छहढाला में किस जीव के भ्रमण की कथा है? (संसारी जीव की)
प्रश्न 3. किस के वशीभूत होकर संसारी जीव संसार में भ्रमण करता है? (मिथ्यात्व के)
प्रश्न 4. संसारी जीव संसार में कितनी गतियों में भ्रमण करता है? (चार)
प्रश्न 5. संसारी जीव की चारों गतियों के नाम बताओ। (देव, मनुष्य, तिर्यंच, नारकी)
प्रश्न 6. संसार में योनियों की संख्या बताओ। (84 लाख)
प्रश्न 7. संसार-भ्रमण से मुक्ति के क्या उपाय हैं? (सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यग्चारित्र का अनुपालन)
प्रश्न 8. गुणस्थान कितने होते हैं? (14)
प्रश्न 9. व्रती के कौन से दो भेद हैं? नाम बताओ। (देशव्रती, सकलव्रती)
प्रश्न 10. मोक्ष प्राप्ति के लिए कितनी भावनाओं का चिन्तन किया जाता है? (12 भावनाओं का)
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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