छहढाला (1)

 अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत

छहढाला (1)
(सुबोध टीका)
✠ पहली ढाल ✠


छहढाला का शाब्दिक अर्थ
'छहढाला' का शाब्दिक अर्थ है "छह ढाल" (6 Shields), जो जैन धर्म का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें छह अलग-अलग छंदों/प्रकरणों में जीव को मिथ्यात्व, राग-द्वेष और सांसारिक दुखों से बचाने के लिए ढाल के समान सुरक्षा प्रदान करने वाले उपाय बताए गए हैं। यह ग्रंथ मुख्य रूप से संसार की असारता और मोक्ष मार्ग का वर्णन करता है। 
छहढाला की मुख्य विशेषताएं:
अर्थ: छह ढालें (संसार-दुखों से रक्षा करने वाले प्रकरण)।
रचनाकार: पं. दौलतराम जी द्वारा रचित, जो जैन आगमों का सार है।
संरचना: इसमें 6 ढाल (अध्याय) हैं जो संसार परिभ्रमण, दुखों और मोक्ष मार्ग का वर्णन करती हैं।
उद्देश्य: जीव को मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचारित्र से हटाकर सम्यक दर्शन-ज्ञान-चारित्र (मोक्ष मार्ग) की ओर प्रेरित करना।
ढाल का अर्थ: जिस प्रकार ढाल तलवार के प्रहार को रोकती है, उसी प्रकार यह ग्रंथ जीव को मोह-राग-द्वेष रूपी शत्रुओं से बचाता है। 
संक्षेप में, यह ग्रंथ संसार के दुखों का चित्रण करते हुए उनसे सुरक्षा (मोक्ष) पाने का मार्ग दिखाता है।
 - मंगलाचरण -

(सोरठा)

तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता;

शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ त्रियोग सम्हारि के ॥१॥

अन्वयार्थः

(वीतराग) रागद्वेष रहित, (विज्ञानता) केवलज्ञान, (तीन भुवन में) तीन लोकों में, (सार) उत्तम वस्तु, (शिवस्वरूप) आनन्दस्वरूप और (शिवकार) मोक्ष प्राप्त करानेवाला है। उसे मैं (त्रियोगें) तीन योगों से (सम्हारि के)  सावधानीपूर्वक (नमहुँ) नमस्कार करता हूँ।

भावार्थ :  रागद्वेषरहित “केवलज्ञान” ऊर्ध्व, मध्य और अधो इन तीन लोकों में उत्तम, आनन्दस्वरूप तथा मोक्षदायक है, इसलिए मैं (दौलतराम) अपने त्रियोग अर्थात् मन-वचन-काय द्वारा सावधानीपूर्वक उस वीतराग (१८ दोष रहित) स्वरूप केवलज्ञान को नमस्कार करता हूँ।१।

प्रश्न 1. दिगम्बर जैन समाज में लोकप्रिय छहढाला ग्रन्थ के  रचयिता कौन हैं? (पंडित दौलतराम जी)

प्रश्न 2. छहढाला में किस जीव के  भ्रमण की कथा है? (संसारी जीव की)

प्रश्न 3. किस के  वशीभूत होकर संसारी जीव संसार में भ्रमण करता है? (मिथ्यात्व के)

प्रश्न 4. संसारी जीव संसार में कितनी गतियों में भ्रमण करता है? (चार)

प्रश्न 5. संसारी जीव की चारों गतियों के नाम बताओ। (देव, मनुष्य, तिर्यंच, नारकी)

प्रश्न 6. संसार में योनियों की संख्या बताओ। (84 लाख)

प्रश्न 7. संसार-भ्रमण से मुक्ति के क्या उपाय हैं? (सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यग्चारित्र का अनुपालन)

प्रश्न 8. गुणस्थान कितने होते हैं? (14)

प्रश्न 9. व्रती के कौन से दो भेद हैं? नाम बताओ। (देशव्रती, सकलव्रती)

प्रश्न 10. मोक्ष प्राप्ति के लिए कितनी भावनाओं का चिन्तन किया जाता है? (12 भावनाओं का)

 ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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