तीसरी छहढाला(21)

ध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत
छहढाला(21)
(सुबोध 
टीका)

तीसरी 

अजीव-पुद्गल, धर्म और अधर्म द्रव्य के लक्षण तथा भेद

चेतनता बिन सो अजीव है, पंच भेद ताके हैं;
पुद्गल पंच वरन-रस, गंध- दो फरस वसू जाके हैं ।
जिय पुद्गल को चलन सहाई, धर्म द्रव्य अनरूपी;
तिष्ठत होय अधर्म सहाई जिन बिन-मूर्ति निरूपी ॥७ ।।
अन्वयार्थः- जो (चेतनता-बिन) चेतनता रहित है (सो ) वह (अजीव) अजीव है; (ताके) उस अजीव के (पंच भेद) पांच भेद हैं; (जाके पंच वरन-रस) जिसके पाँच वर्ण और रस, दो गन्ध और (वसू) आठ (फरस) स्पर्श ( हैं) होते हैं, वह पुद्गलद्रव्य है। जो (जिय) जीव को (और ) (पुद्गलको) पुद्गल को (चलन सहाई) चलने में निमित्त है (और ) (अनरूपी ) अमूर्तिक है वह (धर्म) धर्मद्रव्य है तथा ( तिष्ठत ) गतिपूर्वक स्थितिपरिणाम को प्राप्त जीव और पुद्गल को ( सहाई ) निमित्त ( होय ) होता है वह ( अधर्मं ) अधर्म द्रव्य है। ( जिन ) जिनेन्द्र भगवान ने उस अधर्म-द्रव्य को ( बिन-मूरति ) अमूर्तिक, ( निरूपी ) अरूपी कहा है । भावार्थः जिसमें चेतना (ज्ञान-दर्शन अथवा जानने-देखने की शक्ति) नहीं होती, उसे अजीव कहते हैं। उस अजीव के पाँच भेद हैं - पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल। जिसमें रूप, रस, गंध, वर्ण और स्पर्श होते हैं, उसे पुद्गलद्रव्य कहते हैं। जो स्वयं गति करते हैं, ऐसे जीव और पुद्गल को चलने में निमित्तकारण होता है, वह धर्मद्रव्य है; तथा जो स्वयं (अपने आप ) गतिपूर्वक स्थिर रहे हुए जीव और पुद्गल को स्थिर रहने में निमित्तकारण है, वह अधर्मद्रव्य है। जिनेन्द्र भगवान ने इन धर्म, अधर्म द्रव्यों को, तथा जो आगे कहे जायेंगे उन आकाश और काल द्रव्यों को अमूर्तिक ( इन्द्रिय-अगोचर ) कहा है। ७ । धर्म और अधर्म से यहाँ पुण्य और पाप नहीं, किन्तु छह द्रव्यों में आने वाले धर्मास्तिकाय और अधर्मास्तिकाय नामक दो अजीव द्रव्य समझना चाहिये ।

1- अजीव द्रव्य का क्या लक्षण है? (चेतनतारहित)

2 - अजीव के कितने भेद हैं? (5)

3- अजीव के पाँच भेदों के नाम बताओ। (पुद्गल, वर्ण, रस, गन्ध, स्पर्श)

4 - वर्ण के कितने भेद हैं? (5)

5 - रस के कितने भेद हैं? (5)

6 - गन्ध के कितने भेद हैं? (2)

7 - स्पर्श के कितने भेद हैं? (8)

8 - धर्मद्रव्य किसमें सहायक है? (चलने में)

9 - अधर्मद्रव्य किसमें सहायक है? (रुकने में)

10 - पुद्गल मूर्तिक है या अमूर्तिक है? (मूर्तिक)

11 - धर्मद्रव्य कैसा है? (अजीवद्रव्य)

12 - अधर्मद्रव्य कैसा है? (अजीवद्रव्य)

13 - धर्मद्रव्य और अधर्मद्रव्य मूर्तिक है या अमूर्तिक है? (अमूर्तिक)

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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