छहढाला(25)

अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत
छहढाला(25)
(सुबोध टीका)

 सम्यक्त्व के पच्चीस दोष तथा आठ गुण

वसु मद टारि निवारि त्रिशठता, षट् अनायतन त्यागो; 
शंकादिक वसु दोष विना, संवेगादिक चित्त पागो। 
अष्ट अंग अरु दोष पचीसों, तिन संक्षेपै कहिये;
बिन जाने तैं दोष गुननकों, कैसे तजिये गहिये ॥ ११ ॥
अन्वयार्थः  (वसु ) आठ (मद ) मद का (टारि ) त्याग करके, (त्रिशठता ) तीन प्रकार की मूढ़ता को (निवारि) हटाकर, (षट्) छह (’अनायतन ) अनायतनों का (त्यागो ) त्याग करना चाहिये। (शंकादिक ) शंका आदि (वसु) आठ (दोष विना) दोषों से रहित होकर (संवेगादिक) संवेग, अनुकम्पा, आस्तिक्य और प्रशम में (चित) मन को (पागो) लगाना चाहिये। अब, सम्यक्त्व के (अष्ट) आठ (अंग) अंग (अरु) और (पचीसों दोष) पच्चीस दोषों को (संक्षेपै) संक्षेप में ( कहिये) कहा जाता है। क्योंकि (बिन जाते तैं) उन्हें जाने बिना (दोष) दोषों को (कैसे) किस प्रकार (तजिये) छोड़ें और (गुननको) गुणों को किस प्रकार (गहिये) ग्रहण करें?
भावार्थः आठ मद, तीन मूढ़ता, छह अनायतन (अधर्म-स्थान) और आठ शंकादि दोष; - इस प्रकार सम्यक्त्व के पच्चीस दोष हैं। संवेग, अनुकम्पा, आस्तिक्य और प्रशम सम्यग्दृष्टि को होते हैं। सम्यक्त्व के अभिलाषी जीव को सम्यक्त्व के इन पच्चीस दोषों का त्याग करके उन भावनाओं में मन लगाना चाहिये। अब सम्यक्त्व के आठ गुणों (अंगों) और पच्चीस दोषों का संक्षेप में वर्णन किया जाता है; क्योंकि जाने और समझे बिना दोषों को कैसे छोड़ा जा सकता है, तथा गुणों को कैसे ग्रहण किया जा सकता है? ॥ ११ ॥
अन + आयतन = अनायतन (धर्म का स्थान न होना) ।
1. मद कितने प्रकार के हैं? (आठ) 
2. मूढ़ता कितने प्रकार के हैं? (तीन)
3. अनायतन कितने प्रकार के हैं? (छह)  
4. दोष कितने प्रकार के हैं? (आठ) 
5. सम्यक्त्व के कितने दोष हैं? (पच्चीस)  
6. सम्यग्दृष्टि को क्या होते हैं? (संवेग, अनुकम्पा, आस्तिक्य और प्रशम)
7. सम्यक्त्व के अभिलाषी जीव को क्या करना चाहिए? (सम्यक्त्व के इन पच्चीस दोषों का त्याग करके उन भावनाओं में मन लगाना चाहिये)
8. दोषों को कैसे छोड़ा जा सकता है, तथा गुणों को कैसे ग्रहण किया जा सकता है? (सम्यक्त्व के आठ गुणों (अंगों) और पच्चीस दोषों को जानकर और समझ कर) 

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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