अध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत
छहढाला(27)

( १२-१३ पूर्वार्द्ध)
छन्द १३ ( उत्तरांर्द्ध )
मद नामक आठ दोष
पिता भूप वा मातुल नृप जो, होय न तौ मद ठानै;
मद न रूपकौ मद न ज्ञानकौ, धन बलकौ मद भानै ॥ १३ ॥
छन्द १४ ( पूर्वार्द्ध )
तपकौ मद न मद जु प्रभुताकौ, करै न सो निज जानै;
मद धारै तौ यही दोष वसु समकितकौ मल ठानै ।
अन्वयार्थः- जो जीव (जो ) यदि (पिता) पिता आदि पितृपक्ष के स्वजन (भूप) राजादि (होय) हों (तौ) तो (मद) अभिमान (न ठानै) नहीं करता, यदि (मातुल) मामा आदि मातृपक्ष्के स्वजन (नृप) राजादि (होय) हों तो (मद) अभिमान (न) नहीं करता; (ज्ञानकौ) विद्या का (मद न) अभिमान नहीं करता; (धनकौ) लक्ष्मी का (मद मानै) अभिमान नहीं करता; (बलकौ) शक्ति का (मद मानै) अभिमान नहीं करता; (तपकौ) तप का (मद न) अभिमान नहीं करता; (जु) और (प्रभुताकौ) ऐश्वर्य, बड़प्पन का (मद न करै) अभिमान नहीं करता (सो) वह (निज) अपने आत्मा को (जानै) जानता है। यदि जीव उनका (मद) अभिमान (धारै) रखता है, तो (यही) ऊपर कहे हुए मद (वसु) आठ (दोष) दोष रूप होकर (समकितकौ) सम्यक्त्व को, सम्यक दर्शन को (मल) दूषित (ठानै) करते हैं।
भावार्थ :- पिता के गोत्र को कुल और माता के गोत्र को जाति कहते हैं।
(१) पिता आदि पितृ पक्ष में राजादि प्रतापी पुरुष होने से
( मैं राजकुमार हूँ आदि) अभिमान करना, सो कुल-मद है।
(२) मामा आदि मातृपक्ष में राजादि प्रतापी पुरुष होने का अभिमान करना, सो जाति-मद है।
(३) शारीरिक सौंदर्य का मद करना, सो रूप-मद है।
(४) अपनी विद्या का अभिमान करना, सो ज्ञान-मद है।
(५) अपनी धन-सम्पत्ति का अभिमान करना सो धन-मद है।
(६) अपनी शारीरिक शक्ति का गर्व करना सो बल-मद है।
(७) अपने व्रत-उपवास आदि तप का गर्व करना सो तप-मद है।
(८) अपने बड़प्पन और आज्ञा का गर्व करना सो प्रभुता-मद है।
कुल, जाति, रूप, ज्ञान, धन, बल, तप और प्रभुता - यह आठ मद-दोष कहलाते हैं। जो जीव इन आठ का गर्व नहीं करता, वही आत्मा का ज्ञान कर सकता है। यदि उनका गर्व करता है, तो यह मद सम्यग्दर्शन के आठ दोष बनकर उसे दूषित करते हैं - (१३ उत्तरार्द्ध तथा १४ पूर्वार्द्ध) ।
1 - पितृपक्ष पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (कुल मद)
2 - मातृपक्ष पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (जाति मद)
3 - शारीरिक सौन्दर्य पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (रूप मद)
4 - विद्या पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (ज्ञान मद)
5 - धन-सम्पत्ति पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (धन मद)
6 - शारीरिक शक्ति पर अभिमान करना क्या कहलाता है? (बल मद)
7 - क्या अपने तप पर मद करने वाला सम्यग्दृष्टि कहलाता है? (नहीं)
8 - अपने बड़प्पन और आज्ञा का गर्व करना क्या कहलाता है? (प्रभुता-मद)
9 - किसी भी प्रकार का मद करने वाले सम्यग्दृष्टि का सम्यक्दर्शन क्या कहलाता है? (दूषित)
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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