विशोकसागर जी महाराज की स्तुति (चालीसा)’
पूज्य उपाध्याय श्री विशोकसागर जी महाराज की स्तुति (चालीसा)’
सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा वर्ष 2022
Sung by - Bindu Jain, Delhi
धुनः जिसने राग द्वेष कामादिक.......
शीश नवाऊँ अरिहन्तों को, भगवन्तों और संतों को,
नमन करूँ मैं सिद्धों को, उपाध्याय आचार्यों को।।
सरस्वती जिन मंदिर को, जिन चैत्यों चैत्यालय को।
वीतराग विज्ञान को, तीर्थों, अतिशय धाम को।।
विशोकसागर हैं जग हितकारी, महाव्रतों के पालनहारी।।1।।
सबको मोक्ष की राह दिखाते, उपाध्याय पदवी हैं पाते।।2।।
‘ललितपुर’ में जन्म लिया है, ‘संजय कुमार’ ये नाम मिला है।।3।।
‘ज्ञानचन्द्र’ के राजदुलारे, ‘कुसुमदेवी’ की आँख के तारे।।4।।
सन् था ’उन्नीस सौ पिचहत्तर’, दिन था पावन ’एक सितम्बर’।।5।।
’विनीता, सुनीता’ बहनें दो, लेती बलैया हर पल वो।।6।।
भाई ‘मनोज’ का बने सहारा, हुआ सबके मन में उजियारा।।7।।
’वर्णी कॉलेज’ में शिक्षा पाई, पर ‘दुनिया’ न मन को भाई।।8।।
आया वर्ष ’दो हज़ार’ का, मन में आया भाव त्याग का।।9।।
शरद पूर्णिमा ’तेरह अक्तूबर’, दीक्षा लेने पहुँचे मधुबन।।10।।
गुरु विरागसागर को पाया, बहुत आपका मन हर्षाया।।11।।
ऐलक दीक्षा दी जो गुरु ने, कदम बढ़ा संयम के पथ में।।12ं।
उपसर्ग विजेता गुरु जो पाए, मन ही मन ‘संजय’ मुस्काए।।13।।
महाव्रतों के पाए मोती, मन में जगी संयम की ज्योति।।14।।
गृह त्याग गुरु संग चले हैं, मन में दीक्षा भाव धरे हैं।।15।।
आया दो हज़ार तीन का साल, न था मन में कोई मलाल।।16।।
आठ जून का पावन दिन था, भाग्य सूर्य-सा उदय हुआ था।।17।।
‘विशोक सागर’ जब बने मुनि, हुई आलोकित अम्बर-अवनि।।18।।
गुरु के पीछे कदम बढ़ाए, ज्ञान-ध्यान के पुष्प खिलाए।।19।।
अट्ठाइस गुणों के धारी, कठिन तपस्या चर्या भारी।।20।।
आत्म-तत्त्व को जान लिया, मुक्ति पाना ठान लिया।।21।।
रुचि जगी लेखन-चिंतन की, त्याग तपस्या आत्म-मनन की।।22।।
‘हाय! मेरा भारत’ महान्, ‘कर्म दहन व्रत विधान’।।23।।
ज़िन्दगी गीत है गाने के लिए,खोजते रह जाओगे लिखने लगे।।24।।
‘इबादत मेरे दिल की’ सुखकार, ‘बिन्दु की यात्रा’ हुई साकार।।25।।
‘तेरा अहसास ज़िन्दगी मेरी’, काटे सब की कर्मन फेरी।।26।।
‘बाल बोध’ और ‘संस्कारशाला’, बच्चों के मन में करे उजाला।।27।।
ज्ञान मशाल ले चलते आगे, अज्ञान तिमिर है सबके भागे।।28।।
‘लघु सम्मेदशिखर’ की कल्पना, उनके मन का सुन्दर सपना।।29।।
सोनीपत तहसील है राईं, सबके नयनों में है समाई।।30।।
होने लगा सपना साकार, लेने लगा दिव्य आकार।।31।।
चातुर्मास में ज्ञान की वर्षा, प्राणी मात्र का हिरदय सरसा।।32।।
गंगा समान है मन पवित्र, देते सबको सद्चारित्र।।33।।
दो हज़ार तेईस है आया, तेरह फरवरी हर मन भाया।।34।।
मिली है पदवी उपाध्याय की, जीवन के नव अध्याय की।।35।।
संग्रह किए पन्द्रह भक्तामर, आदिनाथ भगवान अमर।।36।।
संचय किए ‘कल्याण मंदिर’, पुलक उठी है सबके अन्दर।।37।।
गुरुवर का जब ध्यान करें, मन की बगिया में पुष्प खिलें।।38।।
गुरु-कृपा का आशीष पाते, भक्त हैं भक्ति में खो जाते।।39।।
गुरु सबकी तकदीर सँवारें, हम सब के बन जाएँ सहारे।।40।।
।।इति परम पूज्य उपाध्याय विशोक सागर महाराज चालीसा।।
परम पूज्य मुनि श्री विशोक सागर जी महाराज ने हिसार वासियों के विशेष आग्रह पर वर्ष 2022 का चातुर्मास हिसार नगरी में निष्पन्न करने की सहमति दी
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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