तीसरी छहढाला(18)

 

ध्यात्मप्रेमी कविवर पं० दौलतरामजी कृत
छहढाला(18)
(सुबोध 
टीका)

तीसरी
जीव के भेद, बहिरात्मा और अन्तरात्मा लक्षण सहित,

बहिरातम, अन्तरआतम, परमात्म जीव त्रिधा हैं;
देह जीव को एक गिने बहिरातम तत्त्व सुधा है।

उत्तम मध्यम जघन त्रिविधके अन्तर-आतभ ज्ञानी;

द्विविध संगबिन शुभ उपयोगी मुनि उत्तम निजध्यानी ॥ ४ ॥

अन्वयार्थः- (बहिरातम) बहिरात्मा, (अन्तरआतम) अन्तरात्मा ( और ) (परमातम) परमात्मा, इस प्रकार (जीव) जीव (त्रिधा) तीन प्रकार के (है) हैंः उनमें (देह जीवको) शरीर और आत्मा को (एक गिने) एक मानते हैं, वे (बहिरातम) बहिरात्मा हैं और वे बहिरात्मा (तत्त्वसुधा) यथार्थ तत्त्वों से अज्ञान अर्थात् तत्त्वमूढ़ मिथ्यादृष्टि हैं। (आतमज्ञानी) आत्मा को परवस्तुओं से भिन्न जानकर यथार्थ निश्चय करनेवाले (अन्तर-आतम) अन्तरात्मा कहलाते हैं; वे (उत्तम) उत्तम (मध्यम) मध्यम और (जघन) जघन्य, ऐसे (त्रिविध) तीन प्रकार के हैं, उनमें (द्विविध) अंतरंग तथा बहिरंग ऐसे दो प्रकार के (संगबिन) परिग्रह रहित (शुभ उपयोगी) शुद्ध उपयोगी (निजध्यानी) आत्मध्यानी (मुनि) दिगम्बर मुनि (उत्तम) उत्तम अन्तरात्मा हैं । भावार्थः-- जीव (आत्मा) तीन प्रकार के हैं-(१) बहिरात्मा, (२) अन्तरात्मा, (३) परमात्मा। उनमें जो शरीर और आत्मा को एक मानते हैं, उन्हें बहिरात्मा कहते हैं; वे तत्त्वमूढ़ मिथ्यादृष्टि हैं। जो शरीर व आत्मा को अपने भेदविज्ञान से भिन्न भिन्न मानते हैं, वे अन्तरात्मा अर्थात् सम्यग्दृष्टि हैं।अन्तरआत्मा के तीन भेद हैं - उत्तम, मध्यम और जघन्य। उनमें अंतरंग तथा बहिरंग दोनों प्रकार के परिग्रह से रहित सातवें से लेकर बारहवें गुणस्थान तक वर्तते हुए शुद्ध-उपयोगी आत्मध्यानी दिगम्बर मुनि उत्तम अन्तरात्मा हैं ।

1- आत्मा की दृष्टि से जीव के कितने प्रकार हैं? (3)

2.आत्मा की दृष्टि से जीव के तीन प्रकारों के नाम बताओ। (बहिरात्मा, अन्तरात्मा, परमात्मा)

3- जो शरीर और आत्मा को एक मानता है, वह कैसी आत्मा वाला है? (बहिरात्मा)

4 - जो आत्मा को परवस्तुओं से भिन्न मानता है, वह कैसी आत्मा वाला है? (अन्तरात्मा)

5- अन्तरात्मा के तीन प्रकार कौन-से हैं? (उत्तम, मध्यम, जघन्य)

6 - परिग्रह कितनी प्रकार का है? (दो प्रकार का, अंतरंग और बहिरंग)

7- जो दोनों प्रकार के परिग्रह से रहित शुद्ध उपयोगी, आत्मध्यानी हैं, ऐसे दिगम्बर मुनिराज की आत्मा कैसी है? (उत्तम अन्तरात्मा)

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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