जिनवाणी स्तुति
जिनवाणी स्तुति
धुन- संसार है इक नदिया, सुख दुःख दो किनारे हैं........
माता तू दया करके, कर्मों से छुड़ा देना।
इतनी-सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना।।
माता आज मैं भटका हूँ, माया के अंधेरे में।
कोई नहीं मेरा है, इस कर्म के रेले में।। -2
कोई नहीं मेरा है, तुम धीर बंधा देना।
इतनी-सी विनय.........
जीवन के चौराहे पर, मैं सोच रहा कब से।
जाऊँ तो किधर जाऊँ, यह पूछ रहा मन से।।-2
पथ भूल गया हूँ मैं, तुम राह दिखा देना।
इतनी-सी विनय.........
लाखों को उबारा है, मुझको भी उबारो माँ।
मंझधार में है नैया, उसको भी तिरा दो माँ।। -2
मंझधार में अटका हूँ, उस पार लगा देना।
इतनी-सी विनय.........
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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