जिनवाणी स्तुति

 जिनवाणी स्तुति

Sung by- Bindu Jain, Delhi

धुन- संसार है इक नदिया, सुख दुःख दो किनारे हैं........

माता तू दया करके, कर्मों से छुड़ा देना।

इतनी-सी विनय तुमसे, चरणों में जगह देना।।

माता आज मैं भटका हूँ, माया के अंधेरे में।

कोई नहीं मेरा है, इस कर्म के रेले में।। -2

कोई नहीं मेरा है, तुम धीर बंधा देना। 

इतनी-सी विनय.........

जीवन के चौराहे पर, मैं सोच रहा कब से।

जाऊँ तो किधर जाऊँ, यह पूछ रहा मन से।।-2

पथ भूल गया हूँ मैं, तुम राह दिखा देना।

इतनी-सी विनय.........

लाखों को उबारा है, मुझको भी उबारो माँ।

मंझधार में है नैया, उसको भी तिरा दो माँ।। -2

मंझधार में अटका हूँ, उस पार लगा देना।

इतनी-सी विनय.........

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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