महावीर का पालना
महावीर का पालना
सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा
धुनः होलिया में उड़े रे गुलाल.....
रत्नों की बरसे बदरिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
चैत्र की शुक्ला तेरस आई, कुण्डलपुर में खुशियाँ लाई।
जब जन्मे श्री महावीरा, कुण्डलपुर की नगरिया।।
राय सिद्धारथ राजदुलारे, त्रिशला की आँखों के तारे।
सारी सखियाँ झुलावें पालनिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
देवी आवें मंगल गावें, ललना को ले मोद मनावें।
महावीरा की लेवें बलैंयां, कुण्डलपुर की नगरिया।
इन्द्र देव ने प्रभु को उठाया, पाण्डुक शिला पर न्हवन कराया।
सोने चाँदी के ले के कलशिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
पट-भूषण से उन्हें सजाया, सोने के रथ में बिठलाया।
सूरज चमका हो जैसे गगनिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
सिर पर उनके छत्र विराजे, रत्नों का सिंहासन साजे।
दोनों हाथों से ढुरावें चँवरिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
सम्यक् दर्शन, ज्ञान-चरण-तप, हम को दिखलाते हैं भगवन्।
मोक्ष नगर की डगरिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
रत्नों की बरसे बदरिया, कुण्डलपुर की नगरिया।
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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