पंच परमेष्ठी की आरती



 पंच परमेष्ठी की आरती

Presented by - Bindu Jain, Delhi.

चलो चलो रे ¬प्रभु के दरबार, उतारो आरतिया।

पहली आरती श्री जिनराजा, भवदधि पार उतार जहाजा।

मेरी नाव पार हो जाए, उतारो आरतिया।

दूसरी आरती सिद्धन केरी, सुमरन करत मिटे भव फेरी।

मेरा भव-भव ही नश जाए, उतारो आरतिया।

तीसरी आरती सूर मुनिंदा, जन्म मरण दुःख दूर करिंदा।

मेरा जन्म मरण नश जाए, उतारो आरतिया।

चौथी आरती श्री उवज्झाया, दर्शन देखत पाप पलाया।

मेरे पाप कर्म नश जाएं, उतारो आरतिया।

पाँचवीं आरती साधु तिहारी, कुमति विनाशन शिव अधिकारी।

मोहे सुमत ज्ञान मिल जाए, उतारो आरतिया।

छठी ग्यारह प्रतिमा धारी, श्रावक बंदो आनन्दकारी।

मोहे श्रावक कुल मिल जाए, उतारो आरतिया।

सातवीं आरती श्री जिनवाणी, द्यानत स्वर्ग मुक्ति सुखदानी।

मोहे मोक्ष महल मिल जाए, उतारो आरतिया।

कंचनदीप कपूर की बाती, जगमग दीप जले दिनराती।

मोहे केवल ज्ञान मिल जाए, उतारो आरतिया।

संध्या करके आरती कीजे, नरभव आज सफ़ल कर लीजे।

मेरा जन्म सफ़ल हो जाए, उतारो आरतिया।

जो कोई आरती पढ़े पढ़ावे, सो नर मन वांछित फल पावे।

मोहे मोक्ष डगर मिल जाए, उतारो आरतिया।

चलो चलो रे प्रभु के दरबार, उतारो आरतिया।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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