पुनः दर्शन

पुनः दर्शन

पुनः दर्शन, पुनःदर्शन , पुनः दर्शन मिले स्वामी,

यही है प्रार्थना स्वामी, यही है भावना स्वामी।

तिहारे दर्श बिन स्वामी, कहाँ हम चैन पाएंगे।

प्रभु की याद आएगी, नयन आँसू बहाएंगे।।

निकाली नीर से मछली, तड़पती चेतना स्वामी। पुनः दर्शन.......

बिना स्वाति की बूँदों के पपीहा प्राण तज देगा।

कृपा के मेघ बरसा दो, जिनेश्वर नाम भज लेगा।

निहारे चातका तुमको, यही रटना रटें स्वामी। पुनः दर्शन.....

विरह की वेदना स्वामी, तुम्हें कैसे सुनाएं हम।

लगे हथियार-सा कांटा, हमारा आज ये तन मन।।

शिशु माता से बिछड़ा जो, रुदन करता रहे स्वामी। पुनः दर्शन.....

नहीं सुर सम्पदा चाहूँ, नहीं मैं राजपद चाहूँ।

हृदय में कामना मेरी, प्रभु तू-सा ही बन जाऊँ।।

मिले निरवाण न जब लों, रहो नयनों के पथगामी। पुनः दर्शन...

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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