सोलह सपने

माँ ने देखे सोलह सपने


 सुनोजी…
माँ ने देखे सोलह सपने, जाने उनका हो… फल क्या होगा ॥ टेक॥

प्रथम सुगज ऐरावत देखो, मेघ समान सु-गरज घने।
दूजा बैल एक शुभ देखा, उन्नत कन्धा शब्द भने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।1।।

तीजे सिंह धवल शुभ देखा, कन्धे लाल सुवर्ण बने।
सिंहासन थित लक्ष्मी देखी, नाग युगल से न्हवन सने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।2।।

पाँचे फूलमाल-द्वय गुञ्जित, भ्रमर भजत गुणनाथ तने।
छठ्ठे शशि पूरण तारागण, अमृत झरता जगत तने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।3।।

सप्तम सूर्य निशातमहारी, पूर्व दिशा से उदित ठने।
अष्टम मीन युगल सर रमते, देखे चञ्चल भाव जने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।4।।

स्वर्ण कलश द्वय जल पूरण भर, कमलपत्र से ढकत घने।
दसमें हंस रमण करते सर, कमल गन्ध युत लहर तने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।5।।

सागर दर्पण-सम निर्मल लख, लसत तरङ्गनि हँसत घने।
बारम सिंहासन सुवर्णमय, सिंहपीठ मणिजड़ित बने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।6।।

तेरम स्वर्ग विमान रतनमय, भेजत सुर अनुराग घने।
चौदम नाग-भवन भू उठता, देखा कान्ति अपार जने।।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।7।।

पन्द्रम रत्न-राशि द्युति पूरण, दुःख-दारिद्र संहार हने।
सोलम धूम रहित शुभ पावक, अष्ट कर्म जल जात घने।।
उच्च वृषभ सुवरणमय आयो, मुख प्रवेश करता अपने।
ऐसे स्वप्न कभी नहीं देखे, अचरज होवे माँ को ।।8।। सुनोजी…

द्वारा -सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

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