जीवन को उन्नत बनाने के दस सोपान
एक व्यक्ति मिठाई की दुकान पर गया। उसने वहाँ रखी मिठाईयों में से दस प्रकार की बढ़िया मिठाईयाँ छाँट कर उनको आधा आधा किलो तोलने के लिए कहा। फिर उन्हें आपस में मिला कर मैश करने का आदेश दिया। हलवाई ने सोचा कि ऐसे तो यह एक भी मिठाई का स्वाद नहीं ले पाएगा। पर उसे तो अपनी मिठाई की कीमत से मतलब था। हलवाई ने वैसा ही किया। अब उस व्यक्ति ने कहा कि इसमें से 50 ग्राम तोल दो। ऐसे व्यक्ति को हम क्या कहेंगे? यही न कि यह मिठाई के गुण तो जानता है पर उनका उपयोग नहीं।
यही नादानी हम कर रहे हैं। हमने प्रेम, विनम्रता, सरलता, संतोष, सत्य, त्याग, संयम, तप, ममत्व का त्याग और आत्मा के स्वरूप मे लीन होने के सभी गुणों को जान लिया और क्षमावाणी के दिन उनको मैश करके मित्रों को क्षमाभाव कह दिया। शायद हम जीवन को उन्नत बनाने की एक भी सीढ़ी नहीं चढ़ पाए और अगले दशलक्षण पर्व की प्रतीक्षा में लग गए।
दशलक्षण पर्व उत्तम क्षमा से प्रारंभ होते हैं और उसका ध्येय हमें क्षमावाणी तक पहुँचाना है। यदि हम प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना का दृढ़ता से पालन करते हैं तो हम अपने जीवन में उपरोक्त सभी गुणों को अवश्य आत्मसात कर सकेंगे।
।।ओऽम् श्री महावीराय नमः।।
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