दुआ और बद् दुआ (शंका समाधान)
दुआ और बद् दुआ (शंका समाधान)
किसी के द्वारा दी गई दुआ और बद् दुआ का हम पर क्या प्रभाव पड़ता है?
किसी के द्वारा दी गई दुआ और बद् दुआ का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन कब और कैसे? यह समझना भी बहुत आवश्यक है।
यदि हम किसी अच्छे व्यक्ति के प्रति कोई ग़लत काम कर रहे हैं या ग़लत भावना भा रहे हैं कि इसका नाश हो जाए, और उससे प्रभावित होने वाला व्यक्ति हमें बद् दुआ दे रहा है तो हम पर उसकी बद् दुआ का प्रभाव अवश्य पड़ेगा और उसके स्थान पर हम स्वयं ही दुःखों के शिकार हो जाएंगे।
इसके विपरीत यदि हम किसी के प्रति कोई बुरा काम या बुरा भाव नहीं कर रहे और फिर भी दूसरा आदमी हमें ईर्ष्यावश बद् दुआ दे रहा है क्योंकि वह हमारी उन्नति को सहन नहीं कर पा रहा, तो उसके द्वारा दी गई बद् दुआ का हम पर कोई असर नहीं होने वाला। वह बद् दुआ हमारे उन्नति के मार्ग की रुकावट नहीं बन सकती।
इसी प्रकार यदि हम कोई ग़लत काम कर रहे हैं या किसी के प्रति बुरे भाव कर रहे हैं और कोई व्यक्ति उस बुरे काम में हमारे सहयोग के लिए हमारे लिए सफल होने की दुआ कर रहा है, उस बुरे काम की अनुमोदना कर रहा है, तो उसकी वह दुआ कभी फलीभूत नहीं होगी, क्योंकि ग़लत काम में तो भगवान भी सहयोग नहीं करते।
इसके विपरीत यदि हम कोई अच्छा काम कर रहे हैं और सामने वाला हमारी सफलता के लिए अनुमोदना कर रहा है, हमारे लिए दुआ कर रहा है तो वह दुआ हमें शीघ्र सफल होने में सहायक हो जाएगी। यह दुआ सोने में सुगंध का काम करेगी।
हमने जान लिया है कि बुरे काम के लिए की गई दुआ और अच्छे काम के लिए की गई बद दुआ कभी कारगर सिद्ध नहीं हो सकती।
यह समाधान पाने के बाद मन में यह शंका भी उठती है कि ग़लत और सही काम की क्या पहचान है?
मित्रों! जिस काम में अपना भी हित हो और दूसरे की भी भलाई हो वही काम अच्छा है तथा जिस काम में अपना हित हो या न हो, पर दूसरे का अहित अवश्य हो रहा हो, वह काम ग़लत है और करने योग्य नहीं है।
कभी किसी के लिए बुरी भावना मत करो, चाहे वह अपना शत्रु ही क्यों न हो। प्राणी मात्र के लिए दुआ करने वाले की झोली सदा खुशियों से भरी रहती है।
संत-प्रवचन के आधार पर।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
विनम्र निवेदन
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धन्यवाद।
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सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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