मेरी भावना (1) सर्वज्ञ किसे कहते हैं?
मेरी भावना (1) सर्वज्ञ किसे कहते हैं?
(परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों से उद्धृत)
आदिनाथ भगवान की जय
मेरी भावना को अपनी भावना बनाएं।
आज आप सभी के लिए मेरी भावना के माध्यम से कुछ अच्छी भावनाएँ प्रेषित काने का विचार मेरे मन में आया है। मेरी भावना का शाब्दिक अर्थ है - ‘My Feeling’, लेकिन यह ‘मेरी भावना’ यदि हमारी सबकी भावना बनेगी तभी वह आपकी व हमारी Feeling बनेगी, वरना वह रचयिता की भावना ही रह जाएगी।
मेरी भावना भारत के बहुत से स्कूलों में भी पढ़ाई जाती है। यदि हम अपने दिन का आरम्भ ‘मेरी भावना’ से करें, तो हमारे अन्दर अच्छे विचार और अच्छे भाव हमेशा बने रह सकते हैं। इन भावनाओं के माध्यम से हमारे मन और मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह हम स्वयं महसूस भी करेंगे।
जिसने रागद्वेष कामादिक जीते, सब जग जान लिया।
ये ‘मेरी भावना’ की प्रारंभिक पंक्तियाँ हैं। एक तरह से यह एक मंगल भावना है और इस मंगल भावना में यह बताया जा रहा है कि जिसने राग, द्वेष, काम आदि को जीत लिया हैं, उसने सब जग को जान लिया है। वह व्यक्ति समस्त जगत को जानने वाला सर्वज्ञ हो जाता है, जिसने राग, द्वेष, काम आदि सभी विकारी भावों पर विजय प्राप्त कर ली है।
सर्वज्ञ किसे कहते हैं?
आप कभी किसी सर्वज्ञ के अस्तित्व पर विश्वास तब कर पाएंगे, जब आपके ज्ञान में यह बात आए कि जैसे-जैसे राग-द्वेष-मोह आदि की कमी होती चली जाती है, वैसे-वैसे ही हमारा ज्ञान भी Pure होता चला जाता है। हमारी आत्मा में जो ज्ञान है, उस ज्ञान को Impure बनाने वाली जो चीजें हैं, वे यही विकारी भाव हैं और उसमें भी मुख्य कारण दो हैं - राग और द्वेष। जिसे हम कहते हैं Attachment & Aversion।
इन दो कारणों के माध्यम से हमारे अंदर ऐसी प्रवृत्तियाँ बनी रहती हैं, जिससे हमारा ज्ञान हमेशा संसारी अवस्था में रहकर संसार की चीजों को ही चाहता रहता है। जो राग और द्वेष को जीत लेता है, वह संसार की सब वस्तुओं को जानने वाला सर्वज्ञ बन जाता है।
सर्वज्ञ का अर्थ है - जो सब कुछ जानता हो और सर्वज्ञ बनने के पीछे कारण क्या छिपा होता है - जिसे संसार के किसी भी प्राणी से न राग हो और न द्वेष हो। राग का अर्थ है - Emotion Of Attachment और द्वेष का मतलब होता Emotion Of Aversion। यदि व्यक्ति राग और द्वेष पर नियन्त्रण कर ले, तो उसकी आत्मा में इतनी शक्ति आने लगती है कि वह हमेशा Positive Energy से ओतप्रोत रहता है और उसे किसी वस्तु की कमी अनुभव नहीं होती। हर व्यक्ति में Energy का अलग-अलग Level होता है। जिन व्यक्तियों को हम Great मानते हैं, उनमें कुछ Special Energy भी होती है। इस Special Energy को पाने के लिए किसी Special Path पर चलना पड़ता है। हमें भी उन महान् व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए उन्हीं के पथ का अनुसरण करना होगा।
आप का जीवन भी इसी Energy से चलता है। कभी-कभी हम बहुत थकान का अनुभव करते हैं और कभी-कभी हम स्वयं को बहुत तरोताजा अनुभव करते हैं। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
आप एक काम करना। जिस दिन आप स्वयं को तरोताज़ा अनुभव करें, उस दिन यह सोचना कि आज हमने क्या विचार किया या कैसी भावनाएँ की और जिस दिन आपको अच्ठा-अच्छा भोजन लेने के बाद भी थकान अनुभव हो, किसी काम में मन न लगे, तो सोचना कि आज हमारे आसपास एक ऐसा Environment है जिसके कारण हमारे मन में Negative विचार या Negative Energy आती जा रही है और उसी के कारण हमारा मन किसी काम में नहीं लग रहा, हमें थकान का अनुभव हो रहा है। हमारे पास दोनों तरह की भावनाएँ हैं, जो Source Of Positive Energy भी हैं और Source Of Negative Energy भी हैं।
जैसी Energy को हम अपने अंदर लेंगे, वैसा ही हमारे अंदर विचार आएगा, वैसी ही हमको Feeling आएगी और वैसा ही हम बनते चले जाएंगे। अगर आप दिन भर लैपटॉप पर रहोगे, मोबाइल पर Chatting करोगे या ऐसे दृश्य देखते रहोगे कि उसने उसको नुकसान पहुँचा दिया या वह पकड़ा गया, उसे जेल हो गई। यह सब देखने, सुनने से आपका Energy Level Down होता चला जाएगा।
Energy Level इस बात पर Depend करता है कि हम क्या सोच रहे हैं, क्या देख रहे हैं। गलत बातें सोचने से हमारा हर दिन ख़राब हो सकता है। देखने-जानने तक तो ठीक है, परन्तु जब वे बातें हम पर हावी होने लगती हैं तो आपका Energy Level Down होता चला जाता है। हमें स्वयं को ऐसी बातों से बचाना चाहिए। हमें अपना ध्यान अच्छी बातों की ओर ले जाना होगा।
आपको पता होना चाहिए कि Great Energy के Source कहाँ से आते हैं। जब आपके पास कोई Energetic व्यक्ति होगा, उसी से हमें Positive विचार मिल सकते हैं और हमारे अन्दर Positive Energy आ सकती है। जब आपकी Thinking Good होगी, तभी आपकी भावनाएं या Feelings Good होगी।
क्रमशः
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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