मेरी भावना (30) गुणी व्यक्ति कहते किसे हैं?
मेरी भावना (30) गुणी व्यक्ति कहते किसे हैं?
(परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों से उद्धृत)
आदिनाथ भगवान की जय
मेरी भावना को अपनी भावना बनाएं
गुणी जनों को देख हृदय में, मेरे प्रेम उमड़ आवे।
बने जहां तक उनकी सेवा, करके यह मन सुख पावे।।
होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं, द्रोह न मेरे उर आवे।
गुण ग्रहण का भाव रहे नित, दृष्टि न दोषों पर जावे।।
आपको पता होना चाहिए कि गुणी व्यक्ति कहते किसे हैं? गुणी का मतलब क्या होता है? अगर आप इस ‘गुण’ शब्द की इंग्लिश ढूंढने जाओगे डिक्शनरी में, तो आपको मिलेगा इसका नाम - Merit। आप तो बड़ी व्यावहारिक भाषा में बोल देते हो कि हां! मेरा बेटा Merit में आ गया। Merit List में आ गया। क्या हो गया है, यह आपको पता नहीं। Merit का मतलब क्या होता है? Merit means गुण होता है और Demerit means दोष होते हैं। आपको एक तरह से गुण मिल रहे हैं। जब हम आचार्य महाराज के पास थे, तो आचार्य महाराज बताते थे कि उधर कर्नाटक की तरफ जब परीक्षाएं होती हैं और किसी को नंबर मिलते हैं, अंक मिलते हैं तो उसको ‘गुण’ बोला जाता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की तरफ जब बच्चों की परीक्षाएं होती हैं, तो इधर हम उसके अंकों को बोलते हैं कि हमें नंबर मिले और उधर बोलते हैं कि हमें ‘गुण’ मिले।
‘गुण’ का मतलब है कि हमारे अंदर जो कुछ भी Qvalityथी, जब वह सामने आई और लोगों ने उसको देखा, तो हमें भी प्रसन्नता हुई कि यह हमारी गुणवत्ता है। लेकिन यहां पर वास्तव में ‘गुण’ का मतलब क्या है? गुणी जनों से मतलब क्या है? जो व्यक्ति सदाचारी हों, जो व्यक्ति शाकाहारी हों, जो व्यक्ति नम्रता का स्वभाव रखते हों, जो व्यक्ति कभी किसी से कलह करने का भाव नहीं रखते हों, जो व्यक्ति बड़े-बड़े काम करने के बाद भी अपने को छोटा समझते हों, जिस व्यक्ति में शिष्टाचार हो, ऐसे व्यक्ति गुणी कहलाते हैं।
अब अगर आपको ऐसी गुणी व्यक्तियों को देखना है, तो फिर आपको तभी वह चीज देखने में आएगी, जब आपको यह भाव होगा कि हां! इनके विचारों की Quality अच्छी है और अगर हम इनके प्रति Respect करेंगे, तो यह Quality हमको भी मिलेगी। आज के समय में तो सबसे अच्छा गुण क्या है? जो व्यक्ति हमेशा खुश रहता हो। यह भी एक बहुत बड़ी Quality है। किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में Irritate नहीं होता हो। यह आज के समय की बहुत बड़ी Quality है और ऐसा व्यक्ति आपको मिले, तो आप उसकी प्रशंसा करना। बहुत अच्छे आदमी हो आप। क्या नाम है आपका? आप इतने खुश कैसे रहते हो? ऐसा कौन सा बिजनेस है, ऐसा कौन सा आपका परिवार है, जो आपको इतना खुश बनाए रखना है? तब आप उससे बात करना, मिलना।
व्यावहारिक जीवन में यदि आपको खुश रहना है, तो अपनी Quality को और Develop करने के लिए आपको ऐसे Qualitative Person को ढूंढना होगा और जब आप उनको देखकर अपने मन के अंदर भी आनंद भाव लाओगे, प्रसन्नता का भाव लाओगे, तो आपके अंदर भी उन गुणों की प्राप्ति का भाव आ जाएगा। आपके अंदर भी वे गुण आने लग जाएंगे।
आप किसी को आदर्श बना लो। सोच लो कि बस! हमें ऐसा बनना है, तो ऐसा आपके साथ होने लग जाएगा कि वे गुण आपके अंदर भी आने लग जाएंगे।। ये तो व्यावहारिक जीवन में जीने वाली बातें हैं। व्यावहारिक जीवन में सदाचार, शिष्टाचार, नम्रता का स्वभाव, ये सब बातें बहुत ही उपयोगी हैं। क्षमा का भाव, मृदुता का भाव, जो हमारे अंदर दसलक्षण पर्व में दस धर्म बताए जाते हैं, वे दस धर्म सारे के सारे गुण हैं। लेकिन हम कभी उन्हें गुण के रूप में नहीं देखते। हम हमेशा बस दसलक्षण पर्व में उन दस धर्मों की जाप जप लेते हैं। क्षमा का भाव, Forgiveness एक गुण, एक Quality है या नहीं। Humility, Humbleness एक Quality है या नहीं।
जो व्यक्ति नम्र है, क्षमावान है, सरल है, संतोषी है; तो समझो कि वह कितना गुणवान व्यक्ति है। गुणीजन का अर्थ यही है कि जिसके अंदर इस तरह की Quality हो। क्षमा हो, सरलता हो, मृदुता हो, ऋजुता हो, लोभ न हो, संतुष्टि का भाव हो, ऐसे गुण अगर हमें किसी में दिखाई देते हैं, तो हमें उन गुणी जनों को देखकर प्रसन्न होना है। प्रसन्न होने के लिए कौन-सी Electric Line आपमें Fit की जाए, तब आप प्रसन्न होंगे? कौन सा Connection आपको लगाया जाए, तब आप प्रसन्न होंगे? प्रसन्न तो हम तभी हो सकते हैं, जब हमें पता हो कि ये गुण ही प्रसन्नता के कारण हैं। तो आप देखो कि यह प्रसन्नता अगर हमारे अंदर आने लगेगी, तो हम अपने आप को भीतर से गुणी बनाने लग जाएंगे। हमारे अंदर भी गुण आने लग जाएंगे। इसीलिए यहाँ लिखा है -
गुणी जनों को देख हृदय में, मेरे प्रेम उमड़ आवे।
क्या आप जानते हो कि प्रेम कैसे उमडता है? मैं मनुष्य के बच्चों की बात नहीं कर रहा हूँ, वे तो सब मोही होते हैं। लेकिन क्या कभी आपने गाय और उसके बच्चे को खेलते हुए देखा है?़ केवल गाय ही नहीं, किसी भी पशु का बच्चा हो, चाहे वह बिल्ली का बच्चा हो या शूकर का, उसकी माँ अपने बच्चों को देखकर कैसे गोदी में लेती है और कैसे उसको अपने पास बिठाती है, कैसे उसका शरीर चाटती है? मान लो उसका बच्चा कहीं दूर चला गया हो, वहाँ से आवाज़ लगा रहा हो और उसकी माँ ने सुन लिया हो और बच्चे को भी माँ दिखाई दे गई हो, तो देखना कि बच्चा कैसे अपनी माँ के पास दौडता हुआ चला आता है और कैसे बच्चे को देख का उसकी माँ का प्रेम उमड़ता है? इसी को बोलते हैं कि -
मेरे प्रेम उमड़ आवे।
क्या ऐसा देखा है कभी? हो सकता है, आप कहोगे कि हमें तो ऐसे कभी गुणी व्यक्ति ही नहीं मिले, तो हमें प्रेम कैसे उमड़ेगा? कहां मिलेंगे आपको गुणी व्यक्ति? उन्हें कहाँ ढूंढने जाओगे? इन 10 लक्षण धर्म को धारण करने वाले गुणी व्यक्ति सामान्य से गृहस्थ भी हो सकते हैं, कोई अविरत सम्यक् दृष्टि भी हो सकते हैं, कोई व्रती भी हो सकते हैं, कोई महाव्रती भी हो सकते हैं।
लेकिन महाव्रत का वास्तव में पालन करने वाले तो नियम से गुणी होते ही हैं। अगर ऐसे गुणी व्यक्तियों को देखकर हमारे अंदर प्रमोद का भाव आता है, तो हम भी उन्हीं के जैसे चरित्र को प्राप्त करने के लिए अपने मन में भाव बना लेते हैं।
यह प्रेम उमड़ने का मतलब ऐसा होता है कि हमारे मन में अपने आप प्रसन्नता का भाव आ जाए। उन गुणी व्यक्तियों के प्रति हमें कोई भी कटुता नहीं रखना है। कटुता रखने के लिए दुनिया में बहुत सारे लोग हैं।
उनके प्रति क्या रखना है?
प्रेम भाव, स्नेह भाव।
क्रमशः
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद

Comments
Post a Comment