मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज का आशीर्वाद
मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज का आशीर्वाद
(परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों से उद्धृत)
आदिनाथ भगवान की जय
परीक्षार्थियों की विनम्र प्रार्थना - नमोस्तु महाराज श्री! आज प्रवचनसार ग्रंथराज की तृतीय सत्र की परीक्षा है, तो सभी भक्तों को आपका आशीर्वाद मिले, जिससे वे अपनी परीक्षा अच्छे से दे पाएँ। कृपया अपने आशीर्वाद से हमें कृतार्थ करें।
गुरु मुख से आशीर्वाद - देखो! अगर कोई दूर दराज़ रहकर भी आज इस लॉकडाउन और कोरोना के माहौल में बैठकर घर में ज्ञान अर्जन कर रहे हैं और आचार्य कुंदकुंद द्वारा रचित ‘प्रवचनसार’ जैसे ग्रंथों का मर्म समझ रहे हैं और सम्यक् ज्ञान को अर्जित करने के लिए जो अपना समय और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग कर रहे हैं; ऐसे सभी लोग थोड़ा-बहुत नहीं, बहुत-बहुत धन्यवाद के पात्र हैं, क्योंकि इस प्रकार के माहौल में व्यक्ति जहां निराश हो रहा है, दुःखी हो रहा है, भयभीत हो रहा है; वहां वह सम्यक् ज्ञान को अर्जित करके अपने अन्दर एक Confidence Create कर रहा है और अपने अन्दर एक Real Knowledge gain कर रहा है। यह ज्ञानार्जन होना अपने आप में, हम कहते हैं कि इस लॉकडाउन में, उसे कोरोना का एक बहुत बड़ा वरदान है क्योंकि प्रवचनसार तो पहले से चल रहा था। लेकिन अब तो लोगों के लिए इसको पढ़ने का टाइम भी अच्छा मिला है। तो जब टाइम अच्छा मिला है पढ़ने का, तो परीक्षा देने में तो घबराना ही नहीं चाहिए।
मैं तो पहले भी कह चुका हूं कि धर्म की परीक्षा तो देनी ही चाहिए। धर्म की परीक्षा देने से कभी नहीं बचना चाहिए। जो व्यक्ति धर्म की परीक्षा देने से बचता है, वह जिंदगी में कभी सफल नहीं हो सकता। वह हर जगह डरेगा। तो धर्म की परीक्षा देने वाले, ज्ञान की परीक्षा देने वाले और अपने अंदर उस ज्ञान का प्रयोग करके देखने वाले, कि हमने अपने अंदर कितनी काबिलियत हासिल की है; उन सब लोगों के लिए आशीर्वाद इसलिए देना जरूरी हो जाता है कि वे सब सम्यक् ज्ञान की राह पर चल रहे हैं। ऐसे लोग जो परीक्षा देने का अगर मन न भी बना रहे हों, तो उनको भी मन बना लेना चाहिए, क्योंकि इस परीक्षा में कोई भी फेल नहीं होता है। नंबर कम आने का मतलब यह है कि कोई फेल नहीं होता है। इस परीक्षा में सब पास ही होते हैं। सबसे बड़ी तो आपकी हिम्मत है कि आपने प्रवचन सार जैसे ग्रंथ की परीक्षा दी है।
कुछ Test तो ऐसे होते हैं कि अगर हम उसमें केवल अपना Participation किसी भी तरीके से कर लें, तो भी बहुत बड़ी Proud की बात होती है कि अच्छा! आप उस टूर्नामेंट में Participate करने गए थे! तो ऐसे ही यदि आप आचार्य कुंदकुंद के प्रवचन सार में अपना किसी भी तरीके का योगदान कर रहे हैं, तो आपके लिए यह बहुत ही गौरव की बात है और जो भी लोग कर रहे हैं, उन सबके मन में उत्साह इस बात का रहना चाहिए कि हमारे सामने जब प्रश्न पत्र होगा, तो हम कुछ न कुछ तो अपने ज्ञान का सही उपयोग करेंगे ही। यही हमारे लिए उस सम्यक् ज्ञान का सबसे बड़ा फल है।
।।ओऽम् अर्हम नमः।।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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