महावीरा की शरण
महावीरा की शरण
सरिता जैन, सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका, हिसार की लेखनी द्वारा
Sung by - Bindu Jain, Delhi
दर्शन दे दो ए महावीरा, मेटो भव की पीरा, शरण में आ गए हैं।
पार लगा दो मेरी नैया, भव सागर के तीरा, शरण में आ गए हैं।
(1) तेरे सिवा न कोई, दुनिया में तारणहार है;
सब जीवों का, तू ही तो पालनहार है।
हमरी बार करो मत देरी, हम हो रहे अधीरा, शरण में आ गए हैं।
(2) तुम से लगाई प्रीति, सारे जगत को बिसराया है;
भक्ति के दीपक से, अन्तर दीप जलाया है।
दर्श तुम्हारे पाने को, नैनन ने नीर बहाया, शरण में..........।
(3) लाख चौरासी, योनि में भटका हूँ तुम बिन ;
तुम को मैं सिमरूँ, सांसों की माला पे निशदिन।
जन्म-मरण के चक्कर से, तुमने सबको है छुड़ाया;, शरण में..........।
(4) क्रोध, मान, माया और, लोभ मुझे भरमाते हैं;
मेरे कर्म ही मुझको, दुनिया में नाच नचाते हैं।
इन सब दुष्कर्मों से भगवन्, तुमने आन बचाया, शरण में..........।
(5) लाखों जन तिर गए, जप-जप कर ये नाम तेरा;
दीन और दुःखियों को पार लगाना है काम तेरा।
मुझ पापी को पार लगा दो, द्वार तुम्हारे आए, शरण में...........।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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