आरती आचार्य विद्यासागर जी

 आरती आचार्य विद्यासागर जी


विद्यासागर की, गुण आगर की, शुभ मंगल दीप सजाय के,

मैं आज उतारूँ आरतिया........टेक

मल्लपा श्री, श्रीमती के गर्भ विषैं गुरु आए।

ग्राम सदलगा जन्म लिया है, सब जन मंगल गाए

गुरु जी, सब जन मंगल गाए।

न रागी की, न द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजाय के,

मैं आज उतारूँ आरतिया..........

 गुरुवर पाँच महाव्रत धारी, आतम ब्रह्म विहारी।

खड्गधार शिव पथ पर चल कर, शिथिलाचार निवारी

गुरु जी शिथिलाचार निवारी

गृह त्यागी की, वैरागी की, ले दीप सुमन का थाल रे

मैं आज उतारूँ आरतिया...........

गुरुवर आज नयन से लख कर, आलौकिक सुख पाया।

भक्ति भाव से आरति करके, फूला नहीं समाया।

गुरु जी फूला नहीं समाया।

ऐसे मुनिवा को, ऐसे रिषीवर को, हो वन्दन बारम्बार हो

मैं आज उतारूँ आरतिया............

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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