आरती अन्तरयामी की
आरती अन्तरयामी की
जय अन्तरयामी, स्वामी जय अन्तरयामी।
दुःख हारी, सुखकारी, त्रिभुवन के स्वामी। जय अन्तरयामी
नाथ निरंजन, सब दुःख भंजन, संतन आधारा।
पाप निकंदन, भव भय भंजन, सम्पत्ति दातारा। जय अन्तरयामी,
करुणासिन्धु दयालु दयानिधि, जय जय गुणधारी।
वांछित पूरण श्री जिन, सब जन सुखकारी। जय अन्तरयामी,
ज्ञान प्रकाशी, शिवपुर वासी, अविनाशी अविकार।
अलख अगोचर शिवमय, शिव रमणी भरतार। जय अन्तरयामी,
विमल कृतारक कल मल हारक, तुम हो दीन दयाल।
जय जय कारक तारक, षट् जीवन रिक्षपाल। जय अन्तरयामी,
‘न्यामत’ गुण गावे, पाप नशावे, चरणन शिर नावे।
पुनि पुनि अरज सुनावे, शिव कमला पावे। जय अन्तरयामी
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment