आरती पंचकल्याणक
आरती पंचकल्याणक
आरती श्री जिनराज चरण की, गुण छयालीस अठारह दोष हरण की।
पहली आरती गर्भ पूर्ण की, पन्द्रह मास रतन वर्षन की। आरती श्री........
दूसरी आरती जन्म करन की, मति श्रुत अवधि सुज्ञान पूर्ण की। आरती श्री........
तीसरी आरती तपोचरण की, पंच मुष्टिका लोच करन की। आरती श्री........
चौथी आरती केवल ज्ञान पूरण की, समवशरण धनपति रचनन की। आरती श्री........
पाँचवी आरती मोक्ष गमन की, सुर नर मिल उछाह करन की। आरती श्री........
जो यह आरती करे करावे, ‘द्यानत’ मन वांछित सुख पावे। आरती श्री........
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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