आयो-2 रे......
आयो-2 रे......
आयो-2 रे हमारो बड़ो भाग, के हम आए प्रभु पूजन को,
पूजन को प्रभु दर्शन को, दर्शन को प्रभु वंदन को। आयो-2 रे.......
जिनवर की अंतर्मुख मुद्रा, आतम दर्श कराती है,
मोह महामल प्रक्षालन कर, शुद्ध स्वरूप दिखाती है।
भव्य है भक्ति चैत्यालय की, जग में शोभा भारी है,
मंगल ध्वज ले सुरपति आए, शोभा जिसकी न्यारी है।
अनेकान्तमय वस्तु समझ जिन, शासन ध्वज लहरावे है,
स्याद्वाद शैली से प्रभुवर, मुक्ति मार्ग समझावे है । आयो-2 रे......
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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