अकेले वन में

अकेले वन में

होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में।

अकेले वन में, अकेले वन में -2

काहे का रंग खेलें मुनिवर, काहे की पिचकारी, -2 

दया धर्म का रंग पिचकारी,

दया धर्म पिचकारी रंग उड़ावे वन में -2

होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2

किस के संग गुरु खेलें होली, किसकी बनाई टोली -2

ज्ञान की टोली कर्म की होली -2

होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2

अकेले वन में -2

दया धर्म श्रद्धा भक्ति का, हमको भी रंग लगा दो - 2

रूपक से न उतरे ये रंग, पक्का रंग लगा दो -2 

होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2

अकेले वन में -2

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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