अकेले वन में
अकेले वन में
होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में।
अकेले वन में, अकेले वन में -2
काहे का रंग खेलें मुनिवर, काहे की पिचकारी, -2
दया धर्म का रंग पिचकारी,
दया धर्म पिचकारी रंग उड़ावे वन में -2
होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2
किस के संग गुरु खेलें होली, किसकी बनाई टोली -2
ज्ञान की टोली कर्म की होली -2
होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2
अकेले वन में -2
दया धर्म श्रद्धा भक्ति का, हमको भी रंग लगा दो - 2
रूपक से न उतरे ये रंग, पक्का रंग लगा दो -2
होली खेलें मुनिराज, अकेले वन में। -2
अकेले वन में -2
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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