अंतर में आनंद आयो
अंतर में आनंद आयो
अंतर में आनंद आयो, जिनवर के दर्शन पायो,
अंतर्मुख जिन मुद्रा लखकर, आतम दर्शन पायो। - 2
वीतराग छवि सबसे न्यारी, भव्यजनों को आनंदकारी,
दर्शन कर सुख पायो, जिनवर के दर्शन पायो।
पुण्य उदय से आज हमारे, दर्शन कर जिनराज तुम्हारे,
सम्यग्दर्शन पायो , जिनवर के दर्शन पायो।
मेघ घटा सम जिनवर गरजे, दिव्य ध्वनि से अमृत बरसे,
भव आताप नशायो, जिनवर के दर्शन पायो।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment