भक्ति भावना
भक्ति भावना
पारुल जैन, दिल्ली की लेखनी द्वारा रचित सुन्दर भजन
तेरे दर पर तो हे प्रभु जी! ये भक्त सारे आए हैं -2
मोह अज्ञान के मारे, ये भ्रमते जीव आए हैं। - 2
मिलेगी शांति इस दर पर, यही बस भाव लाए हैं। - (2)
मैं जड़ बुद्धि पापी मूर्ख, पर को अपना ध्याया है। -2
स्व पर का भेद विज्ञान, तेरे दर आके पाया है।-2
करूँ चिंतन, करूँ सुमिरन, निज आतम पाने आया हूँ। -2
त्यागूँ सब राग द्वेषों को, शुद्धातम पाने आया हूँ। - 2
मिलेगी शांति इस दर पर, निराकुल भाव लाया हूँ। -2
मिलेगी शांति इस दर पर, यही मैं भाव लाया हूँ। -2
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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