चिदानन्द चिद्रूप आत्मन

चिदानन्द चिद्रूप आत्मन 

चिदानन्द चिद्रूप आत्मन, निज का अनुभव किया करो, 

सब संकल्प विकल्प तोड़कर, सुखमय जीवन जिया करो।

आशंकाओं के घेरे में शांति की होली जलती है, 

होनी तो होकर रहती है टाले कभी न टलती है, 

निज स्वभाव के बल से चेतन, अप्रभावित ही रहा करो। सब संकल्प ......

आत्मानुभव भी परम रसायन, परमौषधि और परमामृत, 

आत्मानुभव से रहित आत्मा, जीवित होने पर भी मृत, 

विषय चाह की दमन सुमन को, ज्ञानामृत तुम पिया करो। सब संकल्प ......

आत्मानुभव होते ही तत्क्षण, सम्यग्दर्शन प्रगट हुआ, 

महापाप मिथ्यात नशाता, मुक्ति मार्ग तो शुरू हुआ, 

पर से हो निवृत्त स्वयं में, सहज तृप्त नित रहा करो। सब संकल्प ......

अन्तरात्मा कहलाते जब, निज सम्मुख दृष्टि होती है,  

तब ही बनेगा परमात्म, जब निज में स्थिरता होती है, 

बस हो सब विकल्पों से, निज में ज्ञायक यह लखा करो। सब संकल्प ......

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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