देवों के देव
देवों के देव
देवों के देव श्री जिन देव, नाथों के नाथ श्री जिन नाथ -२
महा पुण्य से दर्शन पाया, भक्ति भाव उर में उमगाया, -२
स्वयमेव चरणों में झुकता है माथ, देवों के देव -----------
तुम ही हो जग में शरण सहारे, निरपेक्ष बांधव हो तुम हमारे, -२
अहो अहो तुम ही हो सांझेदार, देवों के देव ---------
तुमसे विमुख रह बहु दुःख उठाए, आज विकल सब सहज नशाए, -२
दर्शन से स्वामी हुए कृतार्थ, देवों के देव -----------
तत्वों का अब ज्ञान हुआ है, निज पर भेद विज्ञान हुआ है, -२
अनुभव में आप यह चैतन्य नाथ, देवों के देव -----------
जग से उदासी हुई सुखकारी, दूर हुए दुर्भाव विकारी, -२
मन में बसी छवि तेरी मुनिराज,
देवों के देव ------------
वीतराग सर्वज्ञ तुम्हीं हो, बीच भंवर के हितैषी तुम ही हो, -२
समवशरण में नमो निज माथ, देवों के देव-------------।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
विनम्र निवेदन
यदि आपको यह लेख प्रेरणादायक और प्रसन्नता देने वाला लगा हो तो कृपया comment के द्वारा अपने विचारों से अवगत करवाएं और दूसरे लोग भी प्रेरणा ले सकें इसलिए अधिक-से-अधिक share करें।
धन्यवाद
Comments
Post a Comment