दिगम्बर गुरु की महिमा

दिगम्बर गुरु की महिमा

ऐसे परम दिगम्बर मुनिवर देखे, हृदय हर्षित होता है, 

आनन्द उल्लसित होता है। होऽऽऽऽऽ......सम्यग्दर्शन होता है।

वास जिनका वन उपवन में, गिरि शिखर के नदी तटे-2

वास जिनका चित्त गुफा में, आतम आनन्द में रमे-2 

ऐसे परम दिगम्बर.......

कंचन कामिनी के त्यागी, महा तपस्वी ज्ञानी ध्यानी-2

काया की माया के त्यागी,तीन रतन गुण भंडारी-2

ऐसे परम दिगम्बर.......

परम पावन मुनिवरों के, पावन चरणों में नमूँ-2

शान्त मूर्ति सौम्य मुद्रा, आतम आनन्द में रमूँ-2

ऐसे परम दिगम्बर.......

चाह नहीं है राज्य की, चाह नहीं है रमणी की-2

चाह हृदय में एक यही है, शिव रमणी को वरने की-2

ऐसे परम दिगम्बर.......

भेद ज्ञान की ज्योति जला कर, शुद्धातम में रमते हैं-2

क्षण-क्षण में अन्तर्मुख होकर, सिद्धों से बातें करते हैं-2

ऐसे परम दिगम्बर.......

“बोलो महावीर भगवान की जय”

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।। 

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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