है वही सुखी श्रीमंत
मराठी भजन का हिन्दी अनुवाद
धुनः ए मेरे दिले नादां......
है वही सुखी श्रीमंत, जो जपे णमो अरिहन्त,
वो बने यहाँ भगवन्त, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी........
जो मन्त्र नित्य ही गाते, वो प्रेममग्न हो जाते।
णमोकार मन्त्र जो गाते, पाँचों परमेष्ठी ध्याते।
वही श्रावक जैन जीवंत, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी........
कर जोड़ शुद्ध भक्ति से, जो अरिहंतों को वंदे।
वे पुरुषोत्तम कहलाते, जो नमे सहित आनन्दे।
वह मनुज नहीं, वह संत, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी........
मन में सुख शांति पावे, निज आनन्द में खो जावे।
दुःख और क्लेश भगावे, जब मंत्रोच्चार सुनावे।
वह मूर्तिमंत भगवंत, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी........
प्रति श्वास णमो अरिहंता, प्रति ग्रास णमो अरिहंता।
लो श्वास णमोकारों का, हो घोष महामन्त्रों का।
वह सदा रहे निश्चिन्त, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी........
णमोकार मंत्र जो गावे, वो अनहद नाद सुनावे।
यह बंद नंत्रों का काजल, जिसे डाल जीव जग जावे।
वह पाए शांति अनन्त, जो जपे णमो अरिहन्त।
है वही सुखी.......
मराठी भजन
तो खरा सुखी श्रीमंत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
जो मंत्र नित्य हा गातो, तो आनंदातच न्हातो।
जप करे णमोकाराचा, पांचाही परमेष्ठीचा।
तो श्रावक ‘जैन’ जिवंत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
कर जोडुनिया भक्तिने, जो अरिहंताना वंदे।
पुरुषोत्तम उत्तम जे जे, त्यापुढे नमे आनंदे।
माणूस नव्हे तो संत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
सुख समाधान संतोष, जागवी जीवा बेहोष,
करि दुःख दूर अन् क्लेश, हा मंत्र घोष उन्मेष।
हा मूर्तिमंत भगवन्त, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
घ्या श्वास णमोकाराने, घ्या घास णमोकाराने।
घ्या श्वास णमोकाराचा, या मंत्राच्या घोषाने।
ना खेद उरे न खंत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
संगीत धून स्वर्गीय, या णमोकार मंत्रात।
अंजन हा मूर्छित नेत्री, हे जाण पुढे चलयात्री।
जप मंत्र मनाने संथ, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।
‘तो खरा सुखी श्रीमंत, ज्या मुखी ‘णमो अरिहन्त’।।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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