हमने जग की
हमने जग की
हमने जग की अजब तस्वीर देखी,
इक हंसता है, दस रोते हैं।
ये प्रभु की अद्भुत जागीर देखी,
इक हंसता .......................
हमें हंसते मुखड़े चार मिले,
दु:खियारे चेहरे हज़ार मिले।
यहाँ सुख से सौ गुना पीर देखी,
इक हंसता ......................
दो एक सुखी यहाँ लाखों में,
आँसू हैं करोड़ों आँखों में।
हमने गिन गिन हर तकदीर देखी,
इक हंसता ........................
कुछ बोल प्रभु, ये क्या माया,
तेरा खेल समझ में न आया।
हमने देखे महल, ये कुटीर देखी,
इक हंसता .......................
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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