हे गुरुवर, धन्य हो तुम

हे गुरुवर, धन्य हो तुम

तर्ज़- तुम दिल की धड़कन में

हे गुरुवर, धन्य हो तुम, कितना परिषह सहते हो,

सर्दी, गर्मी हो या बरसात, तुम अपने में रहते हो।

समता रस को पीते हो, जग से कुछ नहीं कहते हो।.....

महाऋषि आचार्य श्री ने ऐसा संघ रचाया,-2

दर पे तुम्हारे जो आया, उसने उस ज्ञान को पाया,-2

संयम ही जीवन है, प्रवचन में तुम कहते हो। समता रस ......

यश की ऐसी किरणें फैली, जय जयकार हुआ,-2

गुरुवर के आकर्षण से, मोहित संसार हुआ,-2

प्रभु जैसा बन जाएँ हम, सब जीवों से कहते हों। समता रस ....

   ।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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