हे प्रभु

हे प्रभु 

हे प्रभु चरणों में तेरे आ गए, भावना अपनी का फल हम पा गए।

वीतरागी हो तुम्ही सर्वज्ञ हो, सप्त तत्वों के तुम्ही मर्मज्ञ हो, 

मुक्ति का मार्ग तुम्ही से पा गए, भावना ___________ ।

विश्व सारा है झलकता ज्ञान में, किन्तु प्रभुवर लीन हैं निज ध्यान में, 

ध्यान में निज ज्ञान को हम पा गए, भावना ___________ ।

तुमने बतलाया जगत के आत्मा, द्रव्य दृष्टि से सदा परमात्मा, 

आज निज परमात्मा पद पा गए, भावना ___________ ।

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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