हे प्रभु
हे प्रभु
हे प्रभु चरणों में तेरे आ गए, भावना अपनी का फल हम पा गए।
वीतरागी हो तुम्ही सर्वज्ञ हो, सप्त तत्वों के तुम्ही मर्मज्ञ हो,
मुक्ति का मार्ग तुम्ही से पा गए, भावना ___________ ।
विश्व सारा है झलकता ज्ञान में, किन्तु प्रभुवर लीन हैं निज ध्यान में,
ध्यान में निज ज्ञान को हम पा गए, भावना ___________ ।
तुमने बतलाया जगत के आत्मा, द्रव्य दृष्टि से सदा परमात्मा,
आज निज परमात्मा पद पा गए, भावना ___________ ।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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