होली खेलें मुनिराज
होली खेलें मुनिराज
होली खेलें मुनिराज अकेले वन में।
काहे का रंग काहे की पिचकारी, काहे गुलाल उड़ाये वन में, होली ...........
समता रंग क्षमा की पिचकारी, ज्ञान गुलाल उड़ाये वन में, होली ............. ।
काहे की कीच काहे का गारा, काहे की धूल उड़ावे वन में, होली ..........
धर्म की कीच ज्ञान का गारा, कर्मों की धूल उड़ावे वन में, होली ............. ।
ऐसी होली जो कोई खेले, पाप कटे उसके क्षण में, होली .......... ।
काहे का रंग काहे की पिचकारी, काहे गुलाल उड़ाये वन में, होली ...........
समता रंग क्षमा की पिचकारी, ज्ञान गुलाल उड़ाये वन में, होली ............. ।
काहे की कीच काहे का गारा, काहे की धूल उड़ावे वन में, होली ..........
धर्म की कीच ज्ञान का गारा, कर्मों की धूल उड़ावे वन में, होली ............. ।
ऐसी होली जो कोई खेले, पाप कटे उसके क्षण में, होली .......... ।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
द्वारा - सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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