हम उस ज्ञान के धारी हैं
हम उस ज्ञान के धारी हैं
धुन - होठों पे सच्चाई रहती है
देखो तो दिखाई देता है, जहाँ सहज ही आनन्द भरता है।
हम उस ज्ञान के धारी हैं - 2
जहाँ विश्व प्रकाशित होता है, जहाँ सत्य दिखाई देता है। - 2
जब हर व्यवहारी जगता है तो निश्चय से सो जाता है,
जो जगता है परमारथ में, संसार सभी कट जाता है।
जन-जन के लिए जिनवाणी माँ अमृत सा पेय पिलाती है,
हम उस ज्ञान के धारी हैं.... । - 2
पर्याय बिना न द्रव्य कोई, न द्रव्य बिना पर्याय रहे,
पर्याय झुके निज धाम लखो, सुख वीर्य सदा झरता ही रहे।
लिया नहीं ज्ञेयों से कुछ हमने, हम ज्ञेयों को बस जानते हैं,
हम उस ज्ञान के धारी हैं ... । - 2
ध्रुवता से मिली सम्यक् दृष्टि, शुद्धातम को पूजा हमने,
हैं सहयोगी पर द्रव्य सभी, उपयोग को भी जाना हमने।
इक हम ही नहीं सारे जिनवर, और शास्त्र जिनागम कहते हैं,
हम उस ज्ञान के धारी हैं...... ।
।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।
सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
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