जय सन्मति देवा

जय सन्मति देवा 

आरती महावीर स्वामी

जय सन्मति देवा, स्वामी जय सन्मति देवा।

वीर महा अतिवीर प्रभु जी, वर्द्धमान देवा। जय सन्मति देवा

त्रिशला उर अवतार लिया प्रभु, सुरनर हर्षाए।

पन्द्रह मास रतन कुण्डलपुर, धनपति बरसाए। जय सन्मति देवा

शुक्ल त्रयोदशी चैत्र मास की, आनन्द करतारी।

राय सिद्धार्थ घर जन्मोत्सव, ठाठ रचे भारी। जय सन्मति देवा

तीस वर्ष तक रहे गृह में, बन कर बह्यचारी।

राज त्याग कर भर यौवन में, मुनि दीक्षा धारी। जय सन्मति देवा

द्वादश वर्ष किया तप दुद्धर, विधि चकचूर किया।

झलके लोकालोक ज्ञान में, सुख भरपूर लिया। जय सन्मति देवा

कार्तिक श्याम अमावस के दिन, जाकर मोक्ष बसे। 

पर्व दीवाली चला तभी से, घर घर दीप चसे। जय सन्मति देवा

वीतराग सर्वज्ञ हितैषी, शिव मग परकाशी।

हरि हर बह्मा नाथ तुम्ही हो, जय जय अविनाशी। जय सन्मति देवा

दीनदयाला जग प्रतिपाला, सुरनर नाथ जजैं।

सुमरत विघ्न टरें इक छिन में, पातक दूर भजैं। जय सन्मति देवा

चोर भील चाण्डाल उबारे, भव दुःख हरण तुही।

पतित जान ‘शिवराम’ उबारो, है जिन शरण गही। जय सन्मति देवा

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

विनम्र निवेदन

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