कोई आज जा रहा है

 कोई आज जा रहा है

कोई आज जा रहा है, कल कोई जाने वाला,

नहीं रोगी तन हमारा, परिवार जन हमारा।

पागल तू बन रहा है, नहीं है कोई  अनुशासन। 

कहता पावन जिनशासन, सोने का है सिंहासन। 

यदि आंख खुली न तेरी, फिर  राम ही है रखवाला।

ये दुनिया नहीं तुम्हारी, हर चीज प्यारी-२,

संसार का ये घेरा, मत पियो ऐसा प्याला।

प्रभु नाम है अनूठा, सब रूप रंग झूठा,

आराम से जप प्रभु मन में, जिन नाम मंत्र की माला।

णमोकार का सुमिरन कर ले, अरिहंत सिद्ध भज ले,

कटे कर्म बंध की माला, दुनिया है धर्मशाला।

।। ओऽम् श्री महावीराय नमः ।।

द्वारा - सरिता जैन

सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका

हिसार

🙏🙏🙏

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